बेकाबू ठेकेदार !

देश में ठेकेदारों की लापरवाही और दादागिरी से जनता बहुत परेशान है. इनके गलत और गैर-जिम्मेदाराना रवैये से ही देश को बहुत बड़ी हानि होती है, क्योंकि ये लोग कहीं भी निर्माण सामग्री रेत, मिट्टी, रोड़ी, बजरी आदि अन्य मलबे डालकर छोड़ देते हैं, जिसे महीनों और वर्षों तक उठाने का नाम ही नहीं लेते. […]

देश में ठेकेदारों की लापरवाही और दादागिरी से जनता बहुत परेशान है. इनके गलत और गैर-जिम्मेदाराना रवैये से ही देश को बहुत बड़ी हानि होती है, क्योंकि ये लोग कहीं भी निर्माण सामग्री रेत, मिट्टी, रोड़ी, बजरी आदि अन्य मलबे डालकर छोड़ देते हैं, जिसे महीनों और वर्षों तक उठाने का नाम ही नहीं लेते.
कई बार तो काम ही अधूरा छोड़ देते हैं. इससे अनेकों दुर्घटनाएं होती हैं और साथ में प्रदूषण भी होता है. इनके इस बेकाबू रवैये का कारण इन्हें अफसरों का प्राप्त संरक्षण ही हैं, जो कभी स्थल पर जाकर इन्हें देखते तक नहीं है. निजीकरण और ठेकेदारी कार्य प्रणाली लोकतांत्रिक इसलिए नहीं कि इसमें शोषण और बर्बादी अधिक है. इसलिए इसकी जगह पारदर्शी कार्य प्रणाली ही लाने की जरूरत है, जिसमें सभी का कल्याण है.
वेद मामूरपुर, इमेल से

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