आप से उम्मीदें खत्म

देश के लोगों ने जो आम आदमी पार्टी को लेकर उम्मीदें पाल रखी थी, उसका पटाक्षेप हो गया. पहला झटका तो अप्रैल 2015 में ही लग गया था, जब योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, प्रो आनंद कुमार एवं एडमिरल रामदास जैसे काबिल व योग्य लोगों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. अब जनवरी […]

देश के लोगों ने जो आम आदमी पार्टी को लेकर उम्मीदें पाल रखी थी, उसका पटाक्षेप हो गया. पहला झटका तो अप्रैल 2015 में ही लग गया था, जब योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, प्रो आनंद कुमार एवं एडमिरल रामदास जैसे काबिल व योग्य लोगों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.
अब जनवरी 2018 में राज्यसभा के लिए दो गुप्ताओं के नामांकन का एलान के साथ ही स्पष्ट हो गया कि आप में भी वही परंपरागत राजनीति खेला जा रहा है. वह किसी से अलग नहीं है. क्या आप के पास कुमार विश्वास, आतिशी मर्लेना एवं आशुतोष जैसे जुझारू लोग नहीं थे?
आज की तिथि में छद्म राष्ट्रवादियों एवं कांग्रेसियों को पानी पिलाने एवं तर्कों से पराजित करने का गुण अगर किसी में है, तो कवि कुमार विश्वास में है. ऐसा लगने लगा था कि देश भ्रष्ट व्यवस्थापकों से अगले कुछ वर्षों में छुटकारा पा लेगा, पर अब ऐसा नहीं होगा.
जंग बहादुर सिंह, इमेल से

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