हमारे राज्य झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के क्षेत्र में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है बल्कि स्थिति पहले से भी बदतर हुई है. गांव के स्कूल के छात्रों से कोई भी यौगिक का सूत्र पूछेंगे, तो वे नहीं बता पाएंगे. अंग्रेजी में कोई वाक्य बनाने कहेंगे, तो उनका मुंह ही नहीं खुलेगा. हम […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
हमारे राज्य झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के क्षेत्र में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है बल्कि स्थिति पहले से भी बदतर हुई है. गांव के स्कूल के छात्रों से कोई भी यौगिक का सूत्र पूछेंगे, तो वे नहीं बता पाएंगे.
अंग्रेजी में कोई वाक्य बनाने कहेंगे, तो उनका मुंह ही नहीं खुलेगा. हम यह कह सकते हैं कि बच्चे साक्षर हो रहे हैं ना की शिक्षित. अब यह किसका गलती है? यह तो विद्यालयों में जाने से पता चलेगा. ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षकों की भी मनमानी होती है.
उन विद्यालयों का कभी निरीक्षण भी नहीं होता है. हम सब लोगों को सोचना चाहिए कि ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में जो शिक्षा दी जा रही है क्या वह साक्षर करने के लिए है या बच्चों को सही मायने में शिक्षित करने के लिए है? इसमें सुधार के लिए सरकार को पहल करनी चाहिए.