जहरीली पॉलिथीन से मुक्ति

आखिर रांची को भी पॉलिथीन से लगभग मुक्त होते हुए देख लिया. सब्जी व फलवालों से इसे हटाने में प्रयास करना होगा. मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि इस महती कार्य के लिए धन्यवाद किसे दूं. राज्य सरकार को या नगर निगम को. वैसे नागरिक प्रयास तो बहुत वर्षों से हो रहे थे. बच्चे […]

आखिर रांची को भी पॉलिथीन से लगभग मुक्त होते हुए देख लिया. सब्जी व फलवालों से इसे हटाने में प्रयास करना होगा. मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि इस महती कार्य के लिए धन्यवाद किसे दूं. राज्य सरकार को या नगर निगम को. वैसे नागरिक प्रयास तो बहुत वर्षों से हो रहे थे.
बच्चे पॉलिथीन के दुष्प्रभावों पर खूब जुलूस निकाल रहे थे. एनजीओ ‘से नो टू पॉलिथीन’ की पट्टियां रास्तों पर एवं चौक चौराहों पर साट रहे थे. समाचार-पत्र, विशेषकर प्रभात खबर, पॉलिथीन के भयावह विनाशकारी प्रभावों को उजागर कर रहे थे. नगर विकास मंत्री सीपी सिंह अपील भी कर रहे थे, परंतु अंत में काम आया कानून का डंडा ही.
यही हाल रहा हेलमेट की उपेक्षा पर भी, जहां पुलिस वाले बिना हेलमेट की सवारी करते लोगों को समझाना-बुझाना, अपील की कौन कहे फूल भी देकर देख लिया. अब निहित वर्ग के द्वारा कई आधारों पर विरोध में न्यायालय का दरवाजा तो खटखटाया जायेगा ही. लेकिन नगर आयुक्त, डाॅक्टर शांतनु अग्रहरी ने जिस दृढ़ता से घोषणा की है कि रांची 1 दिसंबर से पॉलिथीन फ्री सिटी होगा, वह स्वागत योग्य है.
पारस नाथ सिन्हा, हरमू, रांची

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