बूचड़खाने की बंदी पर प्रशासन मौन

इन दिनों आसनसोल के रेलपार के नागरिक यहां वर्षों से चली आ रही बूचड़खाने की दुर्गंध से परेशान हैं.इसे बंद कराने के लिए लोगों को अब आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ रहा है. आसनसोल के अतिरिक्त जिला शासक सह नगर निगम के आयुक्त निगम इलाके में गंदगी को बर्दाश्त नहीं किये जाने का केबल […]

इन दिनों आसनसोल के रेलपार के नागरिक यहां वर्षों से चली आ रही बूचड़खाने की दुर्गंध से परेशान हैं.इसे बंद कराने के लिए लोगों को अब आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ रहा है. आसनसोल के अतिरिक्त जिला शासक सह नगर निगम के आयुक्त निगम इलाके में गंदगी को बर्दाश्त नहीं किये जाने का केबल मात्र राग अलाप रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि यहां के बूचड़खाने को लेकर प्रशासन के सिर में कोई दर्द नहीं है.

पूरा प्रशासन इस मामले में चुप्पी साधे हुए है. सवाल है कि, जहां डेंगू और चिकनगुनिया जैसी घातक बीमारी के लिए राज्य की सीएम ममता बनर्जी तक मौसम और गंदगी को जिम्मेदार ठहरा रही हैं, वहीं आसनसोल में बूचड़खाने के मलबे से उत्पन्न गंदगी की तरफ प्रशासन क्यों नहीं ध्यान दे रहा?

पारो शैवलिनी, आसनसोल, इमेल से

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