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calcutta

  • Mar 30 2015 7:22AM

डॉ सरला बिरला पंचतत्व में विलीन

डॉ सरला बिरला पंचतत्व में विलीन
कोलकाता: उद्योगपति व समाजसेवी बसंत कुमार बिरला की धर्मपत्नी दिवंगत डॉ सरला बिरला का पार्थिव शरीर रविवार को पंचतत्व में विलीन हो गया. उनके पौत्र कुमार मंगलम बिरला ने केवड़ातल्ला श्मशान घाट में शाम 5.12 बजे मुखाग्नि दी. उल्लेखनीय है कि शनिवार को नयी दिल्ली स्थित पारिवारिक आवास पर हृदय गति रुकने से डॉ सरला बिरला का आकस्मिक निधन हो गया था. वह 90 वर्ष की थीं.

रविवार को सुबह नयी दिल्ली से विशेष चार्टर्ड विमान से उनके पार्थिव शरीर को कोलकाता लाया गया. कोलकाता स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका पार्थिव शरीर लगभग 10 बजे पहुंचा. कोलकाता में बिरला पार्क आवास में उनका पार्थिव शरीर लगभग सुबह 11 बजे पहुंचा.
 
यहां पहले उनके परिवार के सदस्यों व सगे-संबंधियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की.  बिरला परिवार की राजश्री बिरला, कुमार मंगलम-नीरजा बिरला, अनन्याश्री बिरला, आर्यमान विक्रम बिरला, अदैतशा बिरला, जयश्री-प्रकाश मोहता, मंजूश्री खेतान, वासवदत्ता-कुशगरा नयन बजाज, प्रतिभा-साकेत खेतान, मौलीश्री-हसन गनी, विदुला- अंशुमान विक्रम जालान, मैत्रयी-विकास कंदोई, जयंतिका-अनंत जटिया, करण खेतान, युगादिकृत, आनंदमयी, विश्वरूप बजाज, साहिल गनी, वैष्णवी, अभ्यान विक्रम जालान, अद्वैत एवं पार्थवी कंडोई आदि ने श्रद्धांजलि अर्पित की. आम लोगों के लिए दोपहर साढ़े तीन बजे से श्रद्धांजलि देने की व्यवस्था की गयी थी. श्रद्धांजलि देनेवालों में स्वामी गिरिशानंद, डॉ प्रेमा पांडुरंग, मैथिलीशरण महाराज, मृदुलकांत शास्त्री, सुदर्शन बिरला, उषा मार्टिन समूह के संस्थापक चेयरमैन बसंत कुमार झवर, प्रशांत झवर, उद्योगपति हर्षवर्धन नेवटिया, अलका बांगड़, प्रकाशचंद्र अग्रवाल, बसंत गोयनका, पवन चोमाल, विश्वंभर नेवर, विनोद अग्रवाल, पेंटर जया गांगुली, गायक उषा उत्थुप सहित कई गणमान्य लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की.
 
इस अवसर पर श्री झवर ने शोक जताते हुए कहा कि घर-परिवार के अलावा उन्होंने धर्म, शिक्षा, सामाजिक संस्थाओं में अपना बड़ा सर्किल बनाया और उसे निभाया भी. वह बृहत्तर बिरला परिवार के सारे बच्चों का नाम जानती थीं और सबका हालचाल पूछती रहती थीं.
 
स्वामी गिरिशानंद ने शोक जताते हुए कहा कि वह पुण्यात्मा थीं. हर क्षेत्र के लोगों के लिए उनका जीवन आदर्श है. चाहे संन्यासी हो या गृहस्थ. घर में रहते हुए भी उनका जीवन साधनामय था. उनकी जानकारी में शताब्दी भर में भी इस तरह गृहस्थ जीवन में रहने के बावजूद साध्वी जीवन जीनेवाली अत्यंत ही कम लोग होंगे. मातृ शब्द उनके जीवन में चरितार्थ होता है. सबके प्रति उनका वात्सल्य भाव था और सब उन्हें मातृ भाव से देखते थे.
 
चंद्रकांत बिरला, सरोज पोद्दार,  बिमला मोहता, माधुरी धूत, ललित डागा, शीला डागा, जयश्री मंत्री, श्रीकांत मंत्री, राजीव बियानी, अरविंद नेवर, देवेंद्र मंत्री, सुजाता बियानी, पुस्कर बियानी, जय प्रकाश सिंह, आरपी पंसारी, विनोद अग्रवाल, जसवंत मिश्र, संजय सिन्हा व अन्य ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की. शाम लगभग चार बजे उनकी शवयात्र उनके आवास से निकली, जो केवड़ातला श्मशान घाट में समाप्त हुई.
 

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