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  • Sep 16 2019 6:50AM
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लें हेल्थ इंश्योरेंश, सरलता से कराएं इलाज

लें हेल्थ इंश्योरेंश, सरलता से कराएं इलाज
कभी-न-कभी हर किसी को अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ता है. कब कौन-सी बीमारी होगी या कब सर्जरी के लिए अस्पताल जाना पड़ जाए, कोई नहीं जानता. इस बात से भी हम सभी वाकिफ हैं कि आजकल अस्पतालों में इलाज पर बेतहाशा खर्च होता है. इससे बचने का आसान रास्ता है हेल्थ इंश्योरेंश. पेश है इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी.
 
कब क्या होगा, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. एक समय सब कुछ ठीक ठाक रहता है और एक ही क्षण परिस्थितियां बदल जाती हैं. सब कुछ उलटा-पुलटा हो जाता है. हर किसी को ऐसी परिस्थिति का सामना करना पड़ ही जाता है, खास कर मेडिकल इमरजेंसी के समय. और ऐसे समय में अचानक पैसों की व्यवस्था करना एक मुश्किल भरा काम होता है.
 
एटीएम व बैंक का चक्कर या फिर दोस्तों और संबंधियों को पैसे के लिए फोन करना पड़ जाता है. इसके साथ-साथ इलाज पर होने वाले खर्च की चिंता सताने लगती है क्योंकि आज के समय में इलाज काफी महंगा हो गया है. एक अच्छी हेल्थ इंश्योरेंश की पॉलिसी लेकर आप इसका सफलता से सामना कर सकते हैं. यह आपके मेडिकल इमरजेंसी के समय में बिना किसी परेशानी के पैसों का इंतजाम करते हुए इलाज का पूरा खर्च उठाने के दबाव से भी मुक्ति दिलाता है.
 
पैसा बर्बाद नहीं होता
 
बहुत से लोग हेल्थ इंश्योरेंस लेने को पैसे की बर्बादी मानते हैं, लेकिन मेडिकल इमरजेंसी के समय इलाज का खर्च आपकी पूरी पूंजी समाप्त कर सकता है. मामूली सा प्रीमियम चुकाने के बाद पांच-सात लाख रुपये का हेल्थ कवर लेना समझदारी की बात है. इसको एक उदाहरण से समझें. अगर Rs 10,000 वािर्षक प्रीमियम 20 वर्षों तक देते हैं, तो आपने दो लाख रुपये खर्च करने के बाद आसानी से पांच से सात लाख रुपये का इलाज अस्पतालों में करा सकते हैं.
 
तुलना करें फिर लें हेल्थ पॉलिसी
 
एक हेल्थ इंश्योरेंश पॉलिसी लेने से पहले उसके सभी शर्तों की जानकारी लेना बहुत जरूरी है. अलग-अलग इंश्योरेंश कंपनियों द्वारा दिये जानेवाले लाभ और सुविधाओं की तुलना करते हुए अपने और पूरे परिवार के लिए एक ऐसी हेल्थ पॉलिसी का चयन करना चाहिए जिसमें सबसे अधिक सुरक्षा दिया गया हो. इसके अलावा विभिन्न कंपनियों के क्लेम सेटलमेंट रेशियो पर भी ध्यान देना जरूरी है. 
 
जल्द खरीदने पर प्रीमियम कम
 
हेल्थ कवर के मामले में कहा जाता है कि जल्द कवर लेंगे तो कम प्रीमियम चुकाना पड़ेगा. अगर आप 40 साल की उम्र से पहले कवर लेते हैं तो आपको बिना शर्त के अधिकतम फायदा मिल सकता है. 
 
अधिकतम कवरेज वाली पॉलिसी लाभदायक
 
पॉलिसी लेते समय ही अधिकतम कवरेज वाली हेल्थ इंश्योरेंश पॉलिसी चुनना चाहिए. आनेवाले समय में मेडिकल खर्च बढ़ता ही जायेगा. ऐसे में जितना अधिक का कवरेज होगा उतना ही फायदा होगा. 
 
एक्सक्लूशंस को भी समझें : हेल्थ पॉलिसी लेते समय, अक्सर इंश्योरेंस डॉक्यूमेंट के बहुत ही छोटे में दी गयी जानकारी को नहीं पढ़ते. ऐसे में मेडिकल इमरजेंसी के समय हैरानी व परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. 
 
17 बीमारियां शामिल नहीं :  इरडा द्वारा जारी की गयी सूची में मिर्गी, जन्म के समय से मौजूद हार्ट की बीमारी, सेरिब्रल स्ट्रोक, लंबे समय से लीवर और किडनी की बीमारी, हेपेटाइटिस बी, अल्जाइमर रोग, पार्किन्संस रोग, एचआइवी एड्स, सुनाई न देना और शारीरिक विकलांगता. इरडा ने यह भी कहा है कि हेल्थ कवर खरीदने के बाद अगर अल्जाइमर रोग, पार्किन्संस रोग, एड्स/एचआइवी संक्रमण, अस्वस्थ मोटापा जैसी बीमारियों के लिए कवर देने से बीमा कंपनियां इनकार नहीं कर सकती हैं.
 
लिमिट या सब लिमिट वाला प्लान न लें : अस्पताल में कमरे के किराये की सीमा जैसी लिमिट से बचें. खर्च के लिए स्वास्थ्य बीमा कंपनी द्वारा कोई सब-लिमिट तय किया जाना आपके लिए ठीक नहीं है. हेल्थ पॉलिसी खरीदते वक्त इस बात का ध्यान रखें और ऐसी पॉलिसी न लें.
 
कवरेज शुरू होने का समय
 
सभी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में सिर्फ दुर्घटना के कारण पैदा होने वाली समस्याओं को छोड़ कर, शुरू के 30 दिनों में कोई कवरेज नहीं मिलता है. इसके अलावा कई बीमारियां ऐसी होती है जिनका कवरेज एक-दो या तीन साल के बाद शुरू होता है. जैसे ब्लड प्रेशर, डायबीटिज, हर्निया, पाइल्स, पथरी (दोनों तरह के), मोतियाबिंद, घुटने का ऑपरेशन इत्यादि. 
 
नहीं कवर होनेवाली स्वास्थ्य समस्याएं 

आयुष चिकित्सा
 
लगभग सभी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और यूनानी चिकित्सा के तहत किये जाने वाले इलाज कवर नहीं होता है. इसी तरह के अन्य इलाज जैसे मैग्नेटिक थेरेपी और एक्यूप्रेशर को भी कवर नहीं किया जाता है. फिर भी कुछ नयी इंश्योरेंस कंपनियां, अल्टरनेटिव इलाज को भी कवर करने लगी हैं.
 
कॉस्मेटिक सर्जरी 
 
मोटापा कम करने के लिए की जाने वाली सर्जरी या लिपोसक्शन, बोटॉक्स ट्रीटमेंट, कॉस्मेटिक सर्जरी या इस तरह की किसी अन्य सर्जरी को हेल्थ इंश्योरेंस द्वारा कवर नहीं किया जाता है. दांत के इलाज को भी कवर नहीं किया जाता है क्योंकि इन्हें कॉस्मेटिक माना जाता है.
इसके अलावा आत्महत्या की कोशिश करने या जानबूझ कर खुद को नुकसान पहुंचाने के कारण पैदा होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को भी कवर नहीं किया जाता है.
 
माता-पिता के लिए अलग से लें पॉलिसी
 
खुद के लिए हेल्थ कवर लेते समय अपने घर के वरिष्ठ जनों (मां-पिता) के लिए अलग से हेल्थ पॉलिसी ले सकते हैं. उनके इलाज के लिए होनेवाले खर्च को आप आसानी से हेल्थ इंश्योरेंस से पूरा कर सकते हैं. माता-पिता के 60 वर्ष पूरा होने से पहले ही उनके लिए पॉलिसी लेना लाभदायक होता है. लेकिन कुछ कंपनियां हैं जो 60 साल के बाद भी पॉलिसी को रिन्यू करती है. 
 
पॉलिसी शुरू होने पहले इनका मेडिकल चेक अप किया जाता है. ऐसी बहुत सारी कंपनियां हैं जो सिनियर सिटिजन के लिए हॉस्पिटल रूम के किराये पर बिना कैपिंग लगाये, बिना को-पेमेंट और न ही किसी बीमारी पर सब-लिमिट आदि सुविधाओं के साथ कंप्रिहेंसिव हेल्थ पॉलिसियां लेकर आयी हैं. इसके इलाज के खर्च पर आयकर अधिनियम की धारा 80डी के तहत टैक्स में विशेष छूट भी देती है.
 
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