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vishesh aalekh

  • May 22 2019 1:21AM
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साइबर क्राइम: जरा सी चूक और बैंक एकाउंट खाली

साइबर क्राइम: जरा सी चूक और बैंक एकाउंट खाली
  • झारखंड के लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं मणिपुर और यूरोप के साइबर अपराधी
  • बीमा, शादी डॉट कॉम, नौकरी डॉट काॅम और फेसबुक से दिल्ली एनसीआर के अपराधी करते हैं ठगी 
  • भरतपुर के साइबर अपराधी खतरनाक, ओएलएक्स पर फौजियों की गाड़ी बिक्री के नाम पर ठगते हैं 
  • कभी खपरैल के घरों में रहने वाले साइबर ठग अब जी रहे हैं रइसों जैसी जिंदगी

प्रणव और प्रवीण
रांची :
एटीएम फ्रॉड को अंजाम देने वाले साइबर अपराधियों का गढ़ जामताड़ा को माना जाता है. लेकिन अब साइबर अपराधियों का नये गढ़ के तौर पर राजस्थान का भरतपुर और दिल्ली एनसीआर तेजी से आगे बढ़ रहा है. दिल्ली एनसीआर के साइबर अपराधी जीवन बीमा, शादी, हनीमून, नौकरी और गिफ्ट के नाम पर लोगों की मोटी रकम उड़ा रहे है. वहीं, ओएलएक्स पर आर्मी, सीआइएसएफ आदि के लोगों का वाहन बिक्री के नाम पर राजस्थान के भरतपुर के साइबर अपराधी लोगों को लूट रहे हैं.
 
अभी झारखंड के कई लोगों को दिल्ली एनसीआर और भरतपुर के अपराधी शिकार बना चुके हैं. अब मणिपुर का नाम भी साइबर अपराधियों की फेहरिस्त में जुट गया है. वहीं, झारखंड का रहने वाला आइटीबीपी के एक जवान को यूरोपियन महिला द्वारा हुस्न का जादू दिखा मोटी रकम एेंठने का एक मामला भी सामने आया है. हालांकि, इस मामले में अभी तक जवान द्वारा प्राथमिकी दर्ज नहीं करायी गयी है. उक्त जवान दूसरे राज्य में पदस्थापित है. प्रस्तुत है ऐसे ही मामलों की पड़ताल करती की रिपोर्ट...
 
इन जगहों पर ज्यादा साइबर अपराध  
राज्य में करीब 1850 मामले साइबर अपराध के सामने आ चुके हैं. इनमें रांची में 444, जमशेदपुर में 210, देवघर में 235, जामताड़ा में 284, बोकारो 130, कोडरमा में 57, सरायकेला में 71, गिरिडीह 134, गुमला में 17, गोड्डा में 05, हजारीबाग में 14 और धनबाद में 23 मामले अप्रैल 2019 तक सामने आ चुके हैं. 
 
रिसर्च शुरू : पिछड़े करमाटांड़ में कैसे बढ़े साइबर अपराधी 
रांची. जामताड़ा के पिछड़े इलाकों में शुमार करमाटांड़ में साइबर अपराध कैसे फल फूल रहा है? इस पर झारखंड हाइकोर्ट ने संज्ञान लिया है. जस्टिस एबी सिंह के  निर्देशन में राज्य में बढ़ रहे साइबर क्राइम पर  शोध शुरू हो गया है. ज्यूडिशियल एकेडमी के एडिशनल डायरेक्टर बिरेश कुमार ने पिछले दिनों जानकारी  दी कि ज्यूडिशियल एकेडमी झारखंड अौर नेशनल लॉ कॉलेज रांची की टीम द्वारा यह  शोध किया जा रहा है.  
 
इसमें न्यायिक पदाधिकारी, कानून के छात्र मुख्य रूप से  शामिल हैं. साथ ही रिसर्च में पुलिस विभाग की भी मदद ली जा रही है. इस शोध  को मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस नयी दिल्ली की ओर से स्पांसर किया गया है.  शोध का विषय है साइबर क्राइम्स इश्यूज, चैलेंजेज एंड रेमीडीज अंडर द  प्रेजेंट लॉ. 
 
शोध में जो टीम लगी है, उनमें प्रो मृणाल सतीश, ज्यूडिशियल  एकेडमी झारखंड के निदेशक गौतम कुमार चौधरी, आइजी नवीन कुमार सिंह, लॉ  यूनिवर्सिटी से डॉ के श्यामल, अधिवक्ता कृष्णा कुमार और लॉ के 24  विद्यार्थी शामिल हैं. यह शोध छह महीने के लिए हो रहा है. इसमें राज्य में  होनेवाले साइबर अपराध के तकरीबन सभी दर्ज मामलों को खंगाला जा रहा है.  
 
प्राइमरी डाटा कलेक्शन का काम हो चुका है अभी फील्ड विजिट कर डाटा को  वेरीफाइ किया जा रहा है. रिसर्च पूरे होने पर साइबर अपराध से जुड़े कानूनों  की समीक्षा की जायेगी. साथ ही जांच एजेंसियों को अौर सक्षम बनाने की भी  पहल की जायेगी. इस रिसर्च का एक अहम बिंदु यह भी है कि आखिर करमाटांड़ जैसा  पिछड़ा इलाका ही साइबर क्राइम का केंद्र क्यों बना?

ठगी के तरीके
एटीएम फ्रॉड : साइबर अपराधी बैंक अधिकारी बनकर फोन करते हैं और एटीएम का नंबर और ओटीपी मांग कर खाते से पैसे उड़ा लेते हैं. जामताड़ा के साइबर अपराधी सैंकड़ों लोगों को शिकार बना चुके हैं. इनमें पुलिस, पत्रकार, नेता, अभिनेता सभी शामिल हैं. 
 
बीमा : बीमा कंपनी का अफसर बन फोन करते हैं. कहते हैं कि आपके बीमा की अवधि समाप्त हो रही है. आप अगर एजेंट के जरिये बीमा करायेंगे, तो ज्यादा पैसा लगेंगे. बेहतर होगा कि आप अपना पॉलिसी नंबर दें. पैसा ऑनलाइन भेजें बीमा अपडेट कर दिया जायेगा. 
 
सीसीएल के रिटायर्ड कर्मी आनंद कुमार राय से इसी तरह दिल्ली एनसीआर के साइबर अपराधी ने 91 लाख रुपये ठग लिये थे. मामले की शिकायत पर पुलिस ने दिल्ली से साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया. अपराधी के एकाउंट में 88 लाख रुपये थे. जिसे पुलिस ने फ्रीज करा दिया. बचे हुए तीन लाख रुपये भी पुलिस ने सीसीएल अधिकारी को दिला दिये.
 
फेसबुक से गिफ्ट : फेसबुक के जरिये साइबर अपराधी फर्जी एकाउंट के जरिये पहले दोस्ती करते हैं. फिर तीन चार माह बाद कहते हैं कि मैंने आपको शानदार और कीमती गिफ्ट आपके पते पर भेजा है. कुछ दिनों बाद फोन आता है कि मैं कस्टम अधिकारी बोल रहा हूं एयरपोर्ट पर आपका सामान आया है. इसके एवज में टैक्स जमा कर आप अपना सामान ले जाएं. 
 
पैसा जमा करने के बाद सामान ही मिलता. पंडरा के एक व्यक्ति से इसी तरह 84 लाख रुपये नाइजीरिया मूल के साइबर अपराधी जेम्स विलियम्स ने ठग लिये थे. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा. फिलवक्त वह रांची जेल में है. 

शादी डॉट कॉम : शादी डॉट कॉम बैचलर लोगों को जीवन साथी तलाशने में मदद करने वाली वेबसाइट है. लेकिन, अब इसका इस्तेमाल भी साइबर ठग कर रहे हैं. हाल के दिनों में दो पुरुषों और पांच युवतियों को दिल्ली एनसीआर के साइबर अपराधियों ने निशाना बनाया है. साइबर ठग फर्जी तरीके से अपनी शादी का प्रोफाइल शादी डॉट कॉम पर अपलोड करते हैं.
 
 पहले लड़की से चैटिंग, फिर प्यार. बात जब शादी तक पहुंचती है, तो साइबर अपराधी शादी से पहले हनीमून पैकेज, फ्लैट आदि लेने की बात करता है. कहता है इन सब में एक से सवा करोड़ रुपये लग रहे है. पास में एक करोड़ रुपये है, थोड़ा घट रहा है. अगर तुम मदद कर दो, तो राह आसान हो जायेगी. इस तरह जो लड़के-लड़कियां झांसे में आते हैं, वे लाखों रुपये गंवा देते हैं.
 
नौकरी डॉट कॉम : बेरोजगार युवक युवतियां नौकरी के चक्कर में ऑनलाइन साइटों पर आवेदन करते रहते हैं. इसका फायदा साइबर अपराधी उठा रहे हैं. अब वे बेरोजगारों को पहले प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पहले पैसा लेते हैं. फिर इंटरव्यू के नाम पर. इसके बाद रफूचक्कर हो जाते हैं. दिल्ली एनसीआर के साइबर अपराधी इस तरह की वारदात को ज्यादा अंजाम दे रहे हैं. 
 
आेएलएक्स : इस मोबाइल एेप का इस्तेमाल लोग पुराने सामान को बेचने के लिए हैं. लेकिन इस एेप को भी साइबर अपराधियों ने अपनी कमाई का जरिया बना लिया है. इस काम में राजस्थान के भरतपुर के साइबर अपराधी माहिर हैं. वे आेएलएक्स पर आर्मी और सीआइएसएफ के जवनों और अफसरों के वाहन को उनकी पहचान पत्र के साथ पोस्ट करते हैं. 
 
ताकि लोग पूरी तरह से विश्वास कर लें. लोग अच्छी कंडीशन के वाहन सस्ते में मिलता देख आकर्षित होते हैं और पैसा देकर फंस जाते हैं. पिछले दिनों दिल्ली की पुलिस अपराधियों को पकड़ने भरतपुर गयी थी. तब साइबर अपराधियों और उस गांव के लोगों ने उस अफसर को पीटकर अधमरा कर दिया था. हाल में रांची के  कई लोगों को इस गिरोह ने शिकार बनाया है.  
 
साइबर अपराध का गढ़ मानें जानेवाले जामताड़ा जिले का करमाटांड़ थाना क्षेत्र को 15 साल पहले कम ही लोग जानते थे. इस इलाके में करीब 150 गांव हैं. इसे पहले ट्रेन में नशा खिलाकर लोगों का सामान लूटने वाले जोन के तौर पर जाना जाता था. लेकिन, इसमें मोटी कमाई नहीं होती थी और पुलिस का खतरा भी ज्यादा था. पुराने पुलिस के अधिकारी बताते हैं कि वर्ष 2008 में करमाटांड़ क्षेत्र के युवाओं ने साइबर अपराध की दुनिया में कदम रखा. 
 
सबसे पहले स्थानीय युवाओं ने मोबाइल से बैलेंस चोरी करना शुरू किया. यह धंधा इतना पॉपुलर हुआ कि अच्छे लोग भी आधी दाम पर दोगुना मोबाइल बैलेंस या रिचार्ज पाने की होड़ में शामिल हो गये. 2010 के बाद करमाटांड़ में अन्य राज्यों की पुलिस पहुंचने लगी, तो खुलासा हुआ कि करमाटांड़ से देश भर में साइबर ठगी हो रही है. 
 
आठवीं-दसवीं की शिक्षा ग्रहण किये यहां के आपराधिक प्रवृत्ति वाले युवाओं ने देखते ही देखते झारखंड के बाहर दूसरे राज्यों - दिल्ली, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों के लोगों को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया. इसके बाद इनकी लाइफ स्टाइल ही चेंज हो गयी. कच्चे और खपड़ैल वाले मकान की जगह आलीशान पक्के का मकान, लग्जरी गाड़ी, महंगा मोबाइल फोन, लैपटॉप, घड़ी सबकुछ इनके पास आ गया.
 
सलाह
अपना यूजर नेम और पासवर्ड किसी से शेयर न करें.
दूसरे के मोबाइल और कंप्यूटर पर अपना एकाउंट लॉगइन न करे.
ऑनलाइन बैंकिंग में आप अपने एकाउंट का पासवर्ड मजबूत बनायें, मसलन अंग्रेजी के अल्फाबेट के साथ न्यूमेरिक डिजिट का भी इस्तेमाल करें.
  • समय-समय पर अपना पासवर्ड जरूर बदलें. 
  • एंटी वारयस और एंटी स्पायइवेयर का इस्तेमाल करें.
  • खातों का अपडेट हमेशा लेते रहें.
  • फेसबुक अौर सोशल मीडिया पर अजनबियों का फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें.
  • उन्हीं लोगों का फ्रेंडशिप रिक्वेस्ट स्वीकार करें जिसे आप जानते हों.
  • एटीएम पर अजनबियों अौर गार्ड की सहायता लेने से बचें.
  • अगर कोई कॉल कर या मेल पर आपके  डेबिट कार्ड से संबंधित डिटेल मांगता है, तो उसे डिटेल किसी कीमत पर न दें.
 

क्या करें

  • जैसे ही नया कार्ड मिलता है, उस पर अपने साइन जरूर करें.
  • खरीदारी या बिल के भुगतान के समय कार्ड के इस्तेमाल के समय उस पर नजर बनाये रखें.
  • कार्ड पर पिन नंबर नहीं लिखें.
  • कार्ड के खो जाने या चोरी होने पर इसकी तुरंत रिपोर्ट बैंक अौर थाना को दें.
  • कार्ड से पेमेंट के भुगतान के समय रिसिप्ट से राशि का मिलान करें.
  • अॉनलाइन  रहते समय अपने व्यक्तिगत सूचनाएं जैसे अपना पूरा नाम, इमेड एड्रेस, फोन  नंबर, घर का पता, तसवीरें, स्कूल का नाम न दें. इसका इस्तेमाल आपको ठगने के  लिए किया जा सकता है. 
  • ऐसे लोगों से मिलना खतरनाक हो सकता है, जिसे आप सिर्फ ऑनलाइन जानते हैं.
  • अनजान  ई-मेल, आइएम मैसेंजर, फाइल, तसवीरें या टेक्सट को खोलना खतरनाक हो सकता है.  इनमें वायरस हो सकते हैं या फिर भद्दे मैसेज भी हो सकते हैं.
  • इंटरनेट पर मिलने वाली सूचनाअों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें. सूचनाअों की सत्यता जांचें.
  • सोशल मीडिया पर अगर कोई आपको परेशान कर रहा है, तो इसके बारे में अविलंब अपने अभिभावकों को सूचित करें.
 
इंटरनेट पर ठगी करने का यह भी है जरिया 
1. ईमेल, चैट रूम्स, वेबसाइट्स, मैसेज बोर्ड, पोर्टल, वेब अप्लीकेशन.
2. ऑनलाइन फर्जी नीलामी की प्रक्रिया कर लोगों से पैसे की ठगी की जाती है.
3.  क्रेडिट/डेबिट कार्ड से ठगी. इसमें साइबर अपराधी विक्टिम के क्रेडिट/डेबिट कार्ड का इस्तेमाल पैसे चोरी करने या वस्तुअों को खरीदने के लिए करते हैं.
4.  ठग खुद को व्यवसायी बताते हैं और अपने शिकार का  पासवर्ड, पिन नंबर, जन्मतिथि सहित अन्य सूचनाएं एकत्र करते हैं, जिनका उपयोग  वे ठगी के लिए करते हैं. 
5.  ठग निजी या सार्वजनिक संस्थानों में नौकरी के लिए फर्जी पोर्टल बनाते हैं. कुछ मामलों में इनवेस्टमेंट फर्म में निवेश कर बड़े रिटर्न का लालच देकर शिकार को फंसाते हैं.

कुछ चर्चित मामले
अमिताभ बच्चन से पांच लाख की ठगी
हाल ही में करमाटांड से दिल्ली पुलिस ने साइबर सरगना राम कुमार मंडल उर्फ सीताराम मंडल को गिरफ्तार किया था. पुलिस के अनुसार उसने अभिनेता अमिताभ बच्चन के अकाउंट से पांच लाख उड़ाये. वहीं, एक और सिने स्टार से दो लाख रुपये की ठगी की गयी थी. महाराष्ट्र पुलिस जांच करने पहुंची थी.
 
एक केंद्रीय मंत्री और सांसद से भी हुई ठगी
साइबर ठगों ने एक केंद्रीय मंत्री से करीब 1.80 लाख रुपये ठग लिये. जांच करने आये पार्लियामेंट स्ट्रीट नयी दिल्ली थाने के इंस्पेक्टर राजेश ने करमाटांड़ से दो आरोपियों को पकड़ा था. अपराधियों ने केरल के सांसद से 1.60 लाख की ठगी की. मामला संसद भवन दिल्ली के थाने में दर्ज कराया गया था. उस कांड में यहां से धनंजय व पप्पू मंडल की गिरफ्तारी हुई थी. 
 
यूपी के विधायक को भी ठगा
उत्तर प्रदेश के ललितपुर सदर से बीजेपी विधायक साइबर लुटेरों के शिकार हो गये. बीजेपी विधायक रामरतन कुशवाहा ने अनजाने कॉल पर अपना अकाउंट नंबर और ओटीपी शेयर किया और पांच हजार रुपये गंवा बैठे.
 
रिटायर्ड महिला अफसर के खाते से उड़ाये 65 लाख
गुजरात में साइबर अपराधियों ने ओएनजीसी की एक रिटायर्ड महिला अधिकारी के अकाउंट से 65.95 लाख रुपये उड़ा लिये. अहमदाबाद की क्राइम ब्रांच ने इस मामले में एक महिला सहित दो ठगों को गिरफ्तार किया है.
 
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