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vishesh aalekh

  • Jul 12 2019 11:04AM
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प्रभात खबर की पहल का असर: मां को अस्पताल से दिलवायी मुक्ति, भीख मांगनेवाला कुंदन अब बोलता है फर्राटेदार अंग्रेजी

प्रभात खबर की पहल का असर: मां को अस्पताल से दिलवायी मुक्ति, भीख मांगनेवाला कुंदन अब बोलता है फर्राटेदार अंग्रेजी

 -हम सिर्फ कहते नहीं, कर के दिखाते हैं

- मां के लिए गांव-गांव भीख मांगनेवाला कुंदन आज बोलता है फर्राटेदार अंग्रेजी
- प्रभात खबर की पहल पर अस्पताल के कब्जे से मुक्त हुई थी कुंदन की मां
- प्रभात खबर प्रतिभा सम्मान समारोह के मंच पर स्कूल ने लिया गोद
- चिकित्सकों की बेरुखी से दुखी कुंदन बनना चाहता है डॉक्टर

जीवेश रंजन सिंह
भागलपुर : वर्ष 2017 के नवंबर महीने की 25 तारीख थी. अचानक मधेपुरा के साथी ने फोन किया कि एक छोटा-सा बच्चा कुंदन गांव-गांव घूम कर भीख मांग रहा. अपनी बात पूरी होने से पहले उसने यह जोड़ कर हैरान कर दिया कि वो बच्चा पटना के एक निजी अस्पताल में बंधक बनी अपनी मां को मुक्त कराने के लिए भीख मांग रहा है.

खबर हैरान करने से ज्यादा परेशान करनेवाली थी. तत्काल उस बच्चे को लाने की जिम्मेदारी साथी रुपेश, रवि व पिंटू को दी गयी. लगभग सात वर्ष के उस बच्चे ने अपनी टूटी-फूटी भाषा में जो कुछ बताया, वह सुन कर सब दंग हो गये. उसके अनुसार मधेपुरा जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर सदर प्रखंड के महेशुआ पंचायत के हनुमान नगर चौड़ा वार्ड नंबर 20 में उसका घर है. उसको फिर भाई होनेवाला था, पर उसकी मां ललिता की तबीयत खराब हो गयी. इस कारण पेट में ही बच्चा मर गया.
 
ऑपरेशन कर बच्चे को निकाला गया. इस कारण उसकी तबीयत काफी खराब हो गयी. दलालों के चक्कर में उसे पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. इलाज क्या हुआ यह तो उनकी समझ में नहीं आया, पर उनके जीने का एकमात्र सहारा इकलौती गाय भी 10 हजार में बिक गयी. जमा पूंजी सब खत्म हो गया. दूसरी ओर न तो मां पूरी तरह से ठीक हुई और न ही बिल का बढ़ना कम हुआ. अस्पताल के लोगों ने ललिता को कह दिया कि जब तक बिल के पूरे पैसे नहीं मिलेंगे, वो छोड़ेंगे नहीं. वहां साथ में रह रहे पिता निर्धन राम मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण कुछ खास नहीं कर पा रहे थे. अब पैसे जमा करने व मां को मुक्त कराने की जिम्मेदारी कुंदन ने संभाली.
 
वह गांव-गांव घूम कर सिर्फ इतना कह पाता था कि मां को छुड़ाना है, मदद करें. इस तरह उसने 13 हजार रुपये जमा कर लिये थे. 
प्रभात खबर ने तय किया ललिता को बचाना है. उसकी कहानी इतनी मार्मिक थी कि उसी वक्त जनसरोकार के लिए प्रतिबद्ध प्रभात खबर ने तय किया कि हर हाल में बच्चे को न्याय दिलाना है. 26 नवंबर 2017 के अखबार में कुंदन की पूरी कहानी छपी. पूरे बिहार में खबर छपने के साथ ही प्रशासन के लोग पटना स्थित अस्पताल पहुंचे और न सिर्फ बिना किसी शर्त के अस्पताल के प्रबंधन ने ललिता को मुक्त किया, बल्कि प्रशासन ने चिकित्सकों के साथ उसे उसके गांव मधेपुरा भी भेजा. गांव आने के बाद भी अखबार के प्रयास से ललिता का इलाज नि:शुल्क जारी रहा और अब वह बिलकुल ठीक हो गयी है. 

अब कुंदन को पढ़ाना है
कुंदन को कुछ बनाने की अपनी जिद्द में प्रभात खबर ने उसे गोद लिया और मधेपुरा में 11 नवंबर 2018 को आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में उसे अपने मंच पर जगह दी. वहां सैकड़ों बच्चों और गणमान्य के बीच जब कुंदन की कहानी सुनायी गयी, तो सब दंग थे. प्रभात खबर के अनुरोध पर मंच पर मौजूद कई प्रबुद्धजनों ने न सिर्फ उसकी आर्थिक मदद की, बल्कि मधेपुरा के ग्रीन फील्ड इंटरनेशनल स्कूल के निदेशक राजेश कुमार व रूपेश कुमार ने उसे गोद ले लिया. दूसरे ही दिन 12 जुलाई को गांव-गांव खाली पैर भटकनेवाले कुंदन का दाखिला ग्रीन फील्ड इंटरनेशनल स्कूल में हो गया. कुछ दिनों बाद स्कूल के निदेशक राजेश कुमार ने अपना अलग स्कूल आरआर ग्रीन फील्ड इंटरनेशनल स्कूल खोल लिया, तो वह कुंदन को अपने साथ अपने नये स्कूल में लेते आये. आज मात्र एक साल बाद कल तक कुछ भी स्पष्ट नहीं बोल पानेवाला कुंदन फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता है. अपने साथियों और कक्षा में वह सबका प्रिय है. 
 
डाक्टर बनेगा कुंदन
ललिता के जीवन का तो मानो मतलब ही बदल गया है. इधर कुंदन की जिद्द है कि वह डॉक्टर बनेगा. जिद्द भी इस कारण, क्योंकि एक चिकित्सक के कारण उसकी मां उससे दूर हो गयी थी. मां के लिए उसे भीख मांगने की नौबत आ गयी थी और वह कभी मां के साथ फिर खेल सकेगा या नहीं इसकी उसने कल्पना भी नहीं थी. वह डॉक्टर बन एक मिसाल बनना चाहता है कि कभी किसी गरीब को दिक्कत न हो.
 
प्रतिभा का संरक्षक है प्रभात खबर
कुंदन तो बानगी भर है. प्रभात खबर प्रतिभा सम्मान समारोह में हर वर्ष ऐसी प्रतिभा की तलाश कर उसे मुकाम तक पहुंचाने की व्यवस्था करता है प्रभात खबर. इस वर्ष भी प्रतिभा सम्मान समारोह में ऐसी प्रतिभा पर रहेगी नजर.
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