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vishesh aalekh

  • Jun 18 2019 6:26AM
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हर साल 52 हजार प्लास्टिक के कण निगलते हैं हम, बोतलबंद पानी है खतरनाक

हर साल 52 हजार प्लास्टिक के कण निगलते हैं हम, बोतलबंद पानी है खतरनाक

इंवायरनमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ की रिपोर्ट, बोतलबंद पानी है खतरनाक  

जर्नल ‘इंवायरनमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, हर साल एक वयस्क पुरुष 52 हजार माइक्रोप्लास्टिक कणों को निगल जाता है. जिस प्रदूषित वातावरण में हम सांस लेते हैं, अगर उसे भी इसमें शामिल कर लिया जाये तो यह आंकड़ा बढ़कर एक लाख 21 हजार कणों तक पहुंच जायेगा, जो हर दिन 320 प्लास्टिक के कणों के बराबर है.

जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी के नतीजे बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति सिर्फ बोतलबंद पानी ही पिये, तो उसके शरीर में हर साल अतिरिक्त 90 हजार माइक्रोप्लास्टिक के कण पहुंचने लगेंगे. वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी इंसान के शरीर में प्लास्टिक के कितने कण जायेंगे, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वह कहां रहता है और क्या खाता है. उनका कहना है कि इंसान के शरीर पर माइक्रोप्लास्टिक का क्या असर होता है यह अभी ठीक से समझा नहीं गया है. 

हालांकि, वैज्ञानिकों के मुताबिक 130 माइक्रोमीटर से छोटे प्लास्टिक के कण में यह क्षमता है कि वह मानव उत्तकों को स्थानांतरित कर दें और फिर शरीर के उस हिस्से की प्रतिरक्षा तंत्र को प्रभावित करें. रिसर्चरों का कहना है कि कितना माइक्रोप्लास्टिक हमारे फेफड़ों और पेट में जाता है और उससे क्या खतरा हो सकता है इसे ठीक से समझने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत होगी. 

शरीर पर प्लास्टिक के असर का अब भी हो रहा है रिसर्च

खतरा

1.21 लाख तक पहुंच जायेगा आंकड़ा, यदि सांस को भी शामिल कर लिया जाये

320 माइक्रोप्लास्टिक पहुंच रहे हैं हमारे शरीर में रोजाना

असर

उत्तकों को कर सकता है स्थानांतरित 

शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र हो सकता है प्रभावित, फेफड़ों को हो रही हानि पर चल रहा रिसर्च 

हर जगह पाया जाता है माइक्रोप्लास्टिक

माइक्रोप्लास्टिक, प्लास्टिक के महीन कण होते हैं जो मानव निर्मित उत्पादों जैसे सिंथेटिक कपड़ों, टायर और कॉन्टैक्ट लेंस आदि से टूट कर बनते हैं. माइक्रोप्लास्टिक पृथ्वी पर हर जगह मिलने वाली सामग्री में से एक है. यह दुनिया के सबसे ऊंचे कुछ ग्लेशियरों और सबसे गहरी समुद्री खाइयों की सतह पर भी पाये जाते हैं.

बच्चे भी नहीं हैं अछूते

प्लास्टिक की बोतल में बच्चों को दूध देने से इसके माइक्रोप्लास्टिक बच्चों के पेट में चले जाते हैं. बचपन से ही प्लास्टिक कण शरीर में जाने से काफी नुकसान होता है.

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