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  • Dec 13 2019 5:30PM
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नागरिकता संशोधन विधेयक के संभावित परिणामों पर करीबी नजर रख रहा है UNO

नागरिकता संशोधन विधेयक के संभावित परिणामों पर करीबी नजर रख रहा है UNO

संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुतारेस के उप प्रवक्ता ने कहा है कि भारत के संशोधित नागरिकता अधिनियम के संभावित परिणामों का यह वैश्विक संस्था करीबी निगरानी कर रही है.

प्रवक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र के अपने मूलभूत सिद्धांत हैं, जिनमें मानवाधिकारों के सार्वभौम घोषणापत्र में शामिल अधिकार निहित हैं. उम्मीद है कि उन्हें कायम रखा जायेगा. उल्लेखनीय है कि अधिनियम के मुताबिक, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आये हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी जायेगी. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम को बुधवार को राज्यसभा ने पारित किया, इससे पहले सोमवार को इसे लोकसभा ने पारित किया था.

अधिनियम में कहा गया है इन छह समुदायों के शरणार्थियों को पांच साल भारत में निवास करने के बाद भारतीय नागरिकता दी जायेगी, जबकि पहले इसके लिए 11 साल निवास करने की जरूरत थी. संरा महासचिव गुतारेस के उप प्रवक्ता फरहान हक ने बृहस्पतिवार को संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, हम इस बात से अवगत हैं कि भारतीय संसद के निचले एवं उच्च सदन ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक पारित किया है और हम सार्वजनिक रूप से प्रकट की गयी चिंताओं से भी अवगत हैं. संयुक्त राष्ट्र नये अधिनियम के संभावित परिणामों की करीबी निगरानी कर रहा है. उप प्रवक्ता ने एक सवाल के जवाब में यह कहा.

दरअसल, उनसे पूछा गया था कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम पर क्या महासचिव कोई टिप्पणी करेंगे. उन्होंने कहा कि वह इस तथ्य की ओर ध्यान आकृष्ट करना चाहेंगे कि संयुक्त राष्ट्र के कुछ मानवाधिकार प्रतिवेदनों में इस कानून के स्वरूप के बारे में पहले ही चिंता जतायी जा चुकी है और आप देख सकते हैं कि वे मानवाधिकार कार्यालय से हैं. यह पूछे जाने पर कि क्या इस नये कानून के संभावित परिणामों का संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्लेषण पूरा करने के बाद कोई और बयान जारी किया जायेगा. हक ने कहा, हमें देखना होगा कि हमें किस तरह की प्रतिक्रिया करने की जरूरत है. फिलहाल, हम इसकी विशेषताओं का विश्लेषण करने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं.

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