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  • Apr 15 2019 6:40AM
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सियासी चक्रव्यूह में यूपी की छह लोस सीटों पर भाजपा का बसपा से मुकाबला, दूसरे चरण के चुनाव तय करेंगे केंद्र में मायावती की राजनीतिक ताकत

सियासी चक्रव्यूह में यूपी की छह लोस सीटों पर भाजपा का बसपा से मुकाबला, दूसरे चरण के चुनाव तय करेंगे केंद्र में मायावती की राजनीतिक ताकत
दूसरे चरण के चुनाव तय करेंगे केंद्र में मायावती की राजनीतिक ताकत  
 
लखनऊ : दूसरे चरण में 13 राज्यों की 97 लोस सीटों के लिए गुरुवार को मतदान होगा, इनमें उत्तर प्रदेश की आठ लोकसभा सीटें शामिल हैं. इन आठ में से छह सीटों नगीना, अमरोहा, बुलंदशहर, अलीगढ़, आगरा और फतेहपुर सीकरी पर बसपा और भाजपा के बीच सियासी घमासान होगा, वहीं, हाथरस सीट पर भाजपा का सपा से और मथुरा सीट पर आरएलडी से मुकाबला होगा. 2014 के चुनाव में इन सभी सीटों पर भाजपा ने जीती थी. इन सीटों के नतीजों पर यह निर्भर करेगा कि केंद्र में सरकार बनाने में मायावती कितनी प्रभावी रूप से उभरेंगी या पीएम मोदी की ताकत उप्र में कितनी कायम रहेगी. 

बुलंदशहर
 
इस आरक्षित सीट पर बसपा ने योगेश वर्मा,  भाजपा ने मौजूदा सांसद भोला सिंह व कांग्रेस ने पूर्व विधायक बंसी सिंह पहाड़िया को मैदान में उतारा है. गोहत्या के शक में हुई हिंसा के बाद इस सीट पर पूरे देश की नजर है. यहां 17 लाख से अधिक वोटर हैं. जिले में करीब 77% हिंदू व 22% मुस्लिम हैं. यहां बसपा और भाजपा के बीच सीधी जंग है. भाजपा के नाम पर वोट मांग रही है. वहीं, योगेश वर्मा दलित-मुस्लिम समीकरण के दम पर जीत का ख्वाब संजोये हुए हैं.
 
अलीगढ़ 
 
भाजपा ने यहां अपने मौजूदा सांसद सतीश गौतम को उतारा है. बसपा ने अजीत बालियान को व कांग्रेस ने चौधरी बिजेंद्र सिंह को टिकट दिया है. बसपा और कांग्रेस, दोनों के उम्मीदवार जाट हैं. उन्हें यहां के जाटों के समर्थन की उम्मीद है, पर दोनों के उम्मीदवारों की अपनी जातीय पकड़ के कारण इस वर्ग के वोट में बिखराव की आशंका है, जिसका लाभ भाजपा उम्मीदवार को मिल सकता है. 
 
फतेहपुर सीकरी 
 
कांग्रेस ने यहां अपने प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर को व भाजपा ने मौजूदा सांसद बाबूलाल का टिकट काट कर नये चेहरे राजकुमार को प्रत्याशी बनाया है. राजकुमार राष्ट्रवाद और मोदी के नाम की बदौलत जीत  के दावे कर रहे हैं. बसपा ने गुड्डू पंडित  प्रत्याशी बनाया है. उन्हें गठबंधन की  बदौलत जीत की उम्मीद है. वहीं, कांग्रेस बड़े  फिल्मी सितारों के जरिये यहां पर जीत हासिल करना चाहती है. 
 
आगरा 
 
इस आरक्षित सीट पर भाजपा और बसपा के बीच सीधी टक्कर है. बसपा ने मनोज सोनी को, भाजपा ने एसपी सिंह बघेल और कांग्रेस ने प्रीता हरित को यहां मैदान में उतारा है. यहां बसपा का पुराना दबदबा रहा है. लिहाजा इस बार चुनाव नतीजा उलट देने का उसे भरोसा है. उसे उम्मीद है कि गठबंधन की वजह से दलित मुस्लिम वोट के अलावा अन्य पिछड़ी जातियों का भी उसे समर्थन मिलेगा. 

नगीना 
 
यहां करीब 21% एससी व 50% से अधिक मुस्लिम वोटर हैं. मुख्य मुकाबला भाजपा व बसपा में है. कांग्रेस की ओमवती देवी के मैदान में होने से मुकाबला दिलचस्प है. भाजपा ने यशवंत सिंह व बसपा ने गिरीश चंद्र को उतारा है. बसपा को उम्मीद है कि दलित मुस्लिम समीकरण में पार्टी बाजी मार सकती है. कांग्रेस मुस्लिम व दलित वोटर में सेंध लगाने में कामयाब हो जाती है, तो भाजपा जीत सकती है.

अमरोहा 
 
यह मुस्लिम व जाट बहुल क्षेत्र है. मुख्य मुकाबला भाजपा-बसपा में है. कांग्रेस प्रत्याशी राशिद अल्वी चुनाव लड़ने से पहले ही मैदान छोड़ चुके थे. लिहाजा कांग्रेस ने सचिन चौधरी को उम्मीदवार बनाया. बसपा खुद को मजबूत मान रही है. भाजपा ने सांसद कंवर सिंह तंवर को फिर टिकट दिया है. मुस्लिम वोटर 20 फीसदी से ऊपर हैं. 

2014 का परिणाम
 
कुल मतदाता10,95,860
भाजपा5,28,880    
बसपा (3 नंबर पर)1,62,983
 

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