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siliguri

  • Feb 12 2019 5:15AM

सिलीगुड़ी : रेगुलेटेड मार्केट घोटाला-5. हर रोज एक नया मोड़ ले रहा है फर्जीवाड़ा

 सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट में दुकानों का आवंटन या हस्तांतरण में सामने आया फर्जीवाड़ा हर रोज एक नया मोड़ ले रहा है. हर दिन एक नये फर्जीवाड़े का खुलासा हो रहा है. आवंटन या हस्तांतरण के डीड पर  सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट कमेटी (एसआरएमसी) की चेयरपर्सन के साथ ही सचिव अपने दस्तखत को स्वयं वेही फर्जी बता रहे हैं. 

 
उसी डीड पर वर्तमान काबिज व पट्टेदार (लीज लेने वाला) और एक गवाह के भी दस्तखत हैं. अधिकांश डीड पर गवाह के रूप में एसआरएमसी के क्लर्क समीरन चटर्जी के दस्तखत हैं. लेकिन उन्होंने इस मसले पर किसी भी तरह का बयान देने से साफ इनकार कर दिया है. वहीं दूसरी ओर फर्जीवाड़े के खुलासे पर रेगुलेटेड मार्केट के एक व्यवसायी गणेश सिंह ने आपत्ति जतायी है. 
 
इसबीच,इस मामले में एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है. प्राप्त दस्तावेजों के मुताबिक वर्ष 2008 के फरवरी में सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट कमेटी ने नियमानुसार वेस्ट बंगाल स्टेट मार्केट बोर्ड की स्वीकृति व निर्देशानुसार स्टॉल नंबर टीएस-1 गणेश सिंह को आवंटित किया गया. 750 वर्गफीट का यह स्टॉल फल-सब्जी यार्ड में स्थित है. 
 
मेमो नंबर 124/एसआरएमसी के अनुसार इस स्टॉल पर गणेश सिंह का पहले से ही कब्जा था. 7 फरवरी 2008 को जारी निर्देशिका में  स्टेट मार्केटिंग बोर्ड के अनुसार एसआरएमसी ने गणेश सिंह को एक लाख रूपए नन रिफंडेबल सलामी जमा कराने का निर्देश दिया. एसआरएमसी के निर्देशानुसार गणेश सिंह ने  21 फरवरी 2008 को बैंकर्स चेक नंबर 472842 के मार्फत सलामी की एक लाख रूपए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट शाखा में जमा करा दिया. 
 
यहां तक वेस्ट बंगाल एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग (रेगुलेशन) एक्ट-1972 के दिशा-निर्देशों का पालन किया गया. इसके बाद वर्ष 2018 के 1 अक्टूबर को यही स्टॉल (टीएस-1) कुमार प्रसाद उर्फ बम भोला नामक व्यवसायी के नाम पर आवंटित किया गया. लेकिन यहां वेस्ट बंगाल स्टेट मार्केटिंग बोर्ड के नियमों की धज्जियां उड़ायी गयी. 
 
कुमार प्रसाद को आवंटित किये जाने वाले डीड में कहीं भी स्टेट मार्केटिंग बोर्ड की स्वीकृति या दिशा-निर्देशों का जिक्र नहीं किया गया है. जबकि कुमार प्रसाद ने भी मनी रसीद नंबर 19934 के जरिए पचास हजार की नन रिफंडेबल सलामी जमा करायी है. बल्कि इस डीड में वित्तीय और प्रशासनिक संकट की वजह से दोनों के बीच के पार्टनरशीप को खंडित कर एसआरएमसी द्वारा वर्तमान काबिज को स्टॉल आवंटित करने का जिक्र किया गया है. 
 
जबकि स्टॉल के पूर्व मालिक गणेश सिंह ने वर्षों से तहखाने में दबे फर्जीवाड़े के खुलासे पर आपत्ति जतायी है. उन्होंने कहा कि प्रभात खबर पूरी तरह से गलत खबर प्रकाशित कर रहा है.  1983 से ही रेगुलेटेड मार्केट में इसी तरह से स्टॉलों का आवंटन एवं हस्तांतरण होता आ रहा है. उन्होंने साफ कहा कि कुमार प्रसाद के साथ उनकी व्यवसायिक साझेदारी थी.
 
 बाद में उन्होंने साझेदारी तोड़ दी. नियम के अनुसार ही वह स्टॉल कुमार प्रसाद को आवंटित हुआ है. उन्होंने प्रभात खबर में प्रकाशित खबरों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि स्टॉल के हस्तांतरण में पूर्व मालिक व वर्तमान काबिज को कोई एतराज नहीं है तो फिर पत्रकारों को क्या समस्या है. 
 
गवाह के रूप में एसआरएमसी के क्लर्क का हस्ताक्षर
यहां बता दे कि एसआरएमसी की चेयरपर्सन सह जिला शासक व सचिव ने आवंटन व हस्तांतरण के डीड पर अंकित उनके दस्तखत को जाली करार दिया है. बल्कि इसकी जांच के लिए जिला शासक की ओर से सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस की साईबर क्राइम थाने में शिकायत भी दर्ज करायी गयी है. 
लेकिन इन दस्तावेजों पर उन दोनों के साथ-साथ पट्टेदार व एक गवाह के दस्तखत भी अंकित है. 1 अक्तूबर 2018 को कुमार प्रसाद को आवंटित या हस्तांतरित स्टॉल के डीड पर गवाह के रूप में एसआरएमसी के क्लर्क समीरन चटर्जी का भी हस्ताक्षर है और वर्तमान काबिज कुमार प्रसाद का भी दस्तखत है. 
कुमार प्रसाद ने अपने दस्तखत को सही बताया है. उन्होंने कहा कि नियमों के उल्लंघन का उन्हें पता नहीं हैं, लेकिन एसआरएमसी के निर्देशानुसार उन्होंने सलामी की रकम भी जमा करायी और डीड पर हस्ताक्षर भी किया है. फर्जीवाड़े का यह खेल कैसे रचा गया इस संबंध में उन्हें कुछ भी पता नहीं. एसआरएमसी के क्लर्क समीरन चटर्जी ने अपने दस्तखत व इस मसले पर किसी भी तरह का बयान देने से साफ इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि इस मामले में एसआरएमसी के सचिव ही बता पायेगें. 
 
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