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saran

  • Apr 19 2019 7:20AM
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छह से आठ महीने में करेगा एमडीआर टीबी का सफाया

  छपरा : मल्टी ड्रग रेजिसटेंट(एमडीआर) टीबी के इलाज को आसान बनाने के लिए सरकार की ओर से प्रभावी कदम उठाया गया है. पहले एमडीआर टीबी से पीड़ित मरीजों को 24 महीने तक दवा खानी पड़ती थी. अब ऐसे मरीजों को सिर्फ छह से आठ महीने तक ही दवा खानी पड़ेगी. इसके लिए सरकार की ओर से बीडाकुलीन नामक दवा की शुरुआत की गयी है. एमडीआर-टीबी खतरनाक क्षय रोग यानि टीबी माइकोबैक्टीरियम नामक जीवाणु के संक्रमण के कारण होता है.

 
 इस बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण शरीर की प्रतिरक्षक शक्ति में बहुत गिरावट आ जाती है. आमतौर पर टीबी का इलाज एंटी-टीबी दवाओं के प्रथम श्रेणी की दवाओं के साथ शुरू किया जाता है. मल्टी ड्रग रेजिसटेंट टीबी (एमडीआर-टीबी) टीबी संक्रमण का एक रूप है. 
 
जो कम से कम दो सबसे शक्तिशाली प्रथम-लाइन की दवाओं के साथ इलाज के लिए प्रतिरोधी हो जाती हैं. इससे इलाज के लिए दी जाने वाली प्रथम पंक्ति की दवाइयों का असर रोगी पर होना बंद हो जाता है, जिससे मरीजों की समस्याएं बढ़ जाती हैं. साथ ही ससमय सटीक इलाज नहीं किये जाने पर इससे मौत भी हो सकती है.
 
सिर्फ सरकारी अस्पतालों में होगी उपलब्धता : जिला सनचारी रोग पदाधिकारी डॉ रतनेश्वर प्रसाद ने बताया कि एमडीआर टीबी से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए सरकार की ओर से बीड़ाकुलीन दवा मुफ्त में दी जायेगी. इस दवा की लगभग विदेशों में प्रति गोली लगभग पांच हजार रुपये की कीमत आंकी गयी है. बीड़ाकुलीन की उपलब्धता सिर्फ सरकारी विभाग के पास ही होगी. 
 
किसी भी निजी हॉस्पिटल या फाॅर्मा दुकानों में यह बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं होगी. साथ ही यह दवा राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण विभाग की ओर से तय किये मापदंडो के हिसाब से ही दी जायेगी. इस आकलन के अनुसार एमडीआर टीबी मरीज को बीडाकुलीन दवा के कोर्स से ठीक करने में लगभग सात से आठ लाख सरकार द्वारा खर्च किये जाने का अनुमान लगाया जा सकता है. 
 
नोडल डीआर टीबी सेंटर में होना होगा भर्ती : डीआर टीबी सेंटर से चिह्नित ऐसे एमडीआर मरीज जिनपर अन्य किसी दवा का असर नहीं हो रहा हो उसे पटना स्थित नोडल डीआर टीबी सेंटर,अगमकुआं पटना में भर्ती किया जायेगा.
 
 भर्ती के बाद ड्रग सेंसटिवीटी टेस्ट से यह सुनश्चित होगा की मरीज को बीडाकुलीन दवा दी जायेगी या नहीं. सुनिश्चित होने के बाद मरीज को बीडाकुलीन की 188 टेबलेट्स प्रदान की जायेगी. इस तरह छह से आठ महीने के कोर्स से एमडीआर-टीबी पर प्रभावी नियंत्रण हो सकेगा. 
 
दवा का पूरा कोर्स बचा सकता है एमडीआर टीबी होने से : टीबी से ग्रसित मरीजों को दवा का पूरा कोर्स नहीं करने के कारण एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है. अनियमित दवा का सेवन करना. 
 
बिना चिकित्सीय परामर्श के दवा दुकानों से टीबी का दवा लेना व दवा खाने से पहले ड्रग सेंसटिवीटी जांच नहीं होने से भी एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है. टीबी का संपूर्ण व सटीक इलाज सरकारी स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध है.
 
परिजनों का कहना है कि ड्यूटी के समय जो भी डॉक्टर तैनात थे, उन सब पर उचित कार्रवाई हो और दोनों डॉक्टरों के खिलाफ एफआइआर की जाये. फिलहाल पुलिस सदर अस्पताल में तैनात है. परिजन सिविल सर्जन डॉ अशेष कुमार एवं उपाधीक्षक डॉ एमके आलम के आने का इंतजार कर रहे थे.
 
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