saraikela kharsawan

  • Jan 17 2020 8:46PM
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खरसावां : 24 साल बाद हाई स्कूल में मिले 1996 के पास आउट विद्यार्थी

खरसावां : 24 साल बाद हाई स्कूल में मिले 1996 के पास आउट विद्यार्थी

- स्कूल के दिनों की यादों को किया ताजा, अपने गुरुओं को किया सम्मानित

शचीन्द्र कुमार दाश, खरसावां

राजकीय प्लस टू उच्च विद्यालय खरसावां के वर्ष 1996 बैच के पास आउट विद्यार्थियों का मिलन समारोह शुक्रवार को स्कूल परिसर में आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में 21 साल बाद 1996 बैच के स्कूल के करीब 40 विद्यार्थी परिवार के साथ पहुंचे. कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने अपने स्कूल में बिताये पुराने दिनों की यादों को ताजा करते हुए आगे भी एक दूसरे के सुख-दुख में भागीदार रहने की बात कही.

दिन भर चले कार्यक्रम में छात्रों ने जम कर मौज मस्ती की. कार्यक्रम के दौरान अपनी मित्रता को हमेशा के लिए बरकरार रखने की बात कही. मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया. 

शिक्षकों को किया गया सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान उन दिनों (1996 में) स्कूल के शिक्षक रहे (वर्तमान में सेवानिवृत शिक्षक) राम अयोध्या सिंह, कामाख्या प्रसाद षांडगी, जयशंकर नंद, हरिशचन्द्र आचार्य व वर्तमान में कार्यरत अनील भारती को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया. 90 के दशक में स्कूल की शिक्षा व्यवस्था, अनुशासन के साथ-साथ अक्सर आयोजित होने वाले संस्कृतिक कार्यक्रमों पर भी प्रकाश डालते हुए सभी शिक्षकों ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की.

सभी विद्यार्थियों ने अपने गुरुओं के पैर छूकर आशीर्वाद लिये. कार्यक्रम में स्कूल के वर्तमान प्राचार्य सुदांशु मंडल, प्रियंका पाणी, रश्मि नंदा, रंजीता जेना, रंजीता ब्रम्हा, अरविंद नंदा, राजीव मिश्रा, सपन आचार्या, प्रमोद सिंहदेव, सचिन्द्र दास मानिक, दिनेश सिंहदेव, हेमंत महतो, तनुज घोड़ाई, जगन्नाथ राउत, राकेश नायक, चंदना सतपथी, बलदेव दे, सुशील प्रजापति, प्रताप मंडल, राजकिशोर महतो आदि विद्यार्थी उपस्थित थे. 

बदलते परिवेश में शिक्षक-छात्रों की भूमिका महत्वपूर्ण : केपी षाडंगी 

कार्यक्रम में सेवा निवृत प्राचार्य कामाख्या प्रसाद षांडगी ने कहा कि वर्तमान के बदलते परिवेश में शिक्षक-छात्रों की भूमिका अहम है. परंपरागत शिक्षा में शिक्षक मात्र गुरु ही नहीं होते, बल्कि अभिभावक की भूमिका भी अदा करते हैं. एक शिक्षक को सबसे अधिक खुशी तब मिलती है, जब उसके छात्र अपने जीवन में सफल होते हैं. 

सेवा निवृत शिक्षक जयशंकर नंदा ने कहा कि एक शिक्षक को सबसे अधिक खुशी तब मिलती है, जब उसके छात्र अपना मुकाम हासिल करते हैं. उन्होंने शिक्षक व छात्र के बीच के संबंधों पर भी प्रकाश डाला. 

सेवा निवृत शिक्षक हरिशंकर आचार्या ने कहा कि शिक्षा में समग्रता को एक हिस्सा माना जाता है और वक्त की जरूरत भी. कहीं विद्यार्थी पढ़ाई में अव्वल होकर विद्यालय का ग्रेड बढ़ाते हैं, तो कहीं खेल में मेडल जीतकर विद्यालय का नाम रोशन करते हैं. जिससे गुरुओं का मान-सम्मान बढ़ जाता है. 

कार्यक्रम को सेवानिवृत शिक्षक राम अयोध्या सिंह ने संबोधित करते हुए पास आउट छात्रों का मिलन समारोह आयोजित करने के निर्णय की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि ज्ञान की सार्थकता किसी को शिक्षा दान में है. शिक्षक अनिल भारती ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में शिक्षक को प्रेरणदायक व्यक्तित्व के साथ छात्रों को भावी जीवन की समस्याओं के हल करने में भूमिका अदा करनी होगी. शिक्षा दान से बड़ा कोई दान नहीं है.

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