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  • Aug 21 2019 8:04AM
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सोशल मीडिया पर शेयर न करें पर्सनल इन्फॉर्मेशन, अजनबियों से रहें सावधान

सोशल मीडिया पर शेयर न करें पर्सनल इन्फॉर्मेशन, अजनबियों से रहें सावधान
file photo

पटना : फेसबुक पर अनजान लोगों से न तो दोस्ती करें, न ही अपनी निजी गतिविधियों को पोस्ट करें. कोई पर्सनल इन्फॉरमेशन भी शेयर न करें. एडवांस में प्रोग्राम की जानकारी कभी भी न दें. अच्छा होगा कि फेसबुक और वाट्सएप पर साइबर स्वच्छता अभियान चलाइए. सिक्यूरिटी सेटिंग को और इंप्रूव करते हुए अंजान लोगों को फ्रेंड लिस्ट से हटा दें. यह जानकारी आर्थिक अपराध इकाई के एडीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने मंगलवार को दी. प्रभात खबर के सुरभि क्लब के बैनर तले महिला सुरक्षा अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे. कार्यक्रम का आयोजन आरपीएस बीएड ट्रेनिंग कॉलेज में हुआ था. इसमें ट्रेनिंग कॉलेज के साथ ही आरपीएस महिला कॉलेज की छात्राओं ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया. कार्यक्रम में एडीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने छात्राओं को साइबर क्राइम के प्रति जागरूक किया. उन्होंने  कहा कि कभी भी सोशल मीडिया पर अपना एड्रेस पोस्ट न करें. अपनी फोटो के साथ लोकेशन पोस्ट करने से बचें. कार्यक्रम में प्रभात खबर के संपादक अजय कुमार और ब्यूरो चीफ मिथलेश मौजूद थे.

उन्होंने बताया कि सूचना क्रांति के आने के साथ ही कई विसंगतियां भी आयीं हैं. आज 60 करोड़ हाथों में मोबाइल है. हर हाथ में कंप्यूटर रूपी गैजेट से आपको इंटरनेट के माध्यम से स्पीड, कनेक्टिविटी तो मिली, पर यह आज कई अपराधियों के लिए हथियार बन रहा है. महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध बढ़ने में भी इसका हाथ है. इसलिए अनजान लोगों से दोस्ती न करें, क्योंकि आपको यह पता नहीं होता कि वो अनजान व्यक्ति एक लड़का है, एक लड़की है या फिर रोबोट (चैट बोट) जो अपनी प्रोफाइल से आपसे चैट कर रहा है.  लोगों में इन दिनों अपनी सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने का क्रेज काफी बढ़ा है. कई बार ऐसा करने से आप अनजाने में खतरे को आमंत्रण देते हैं. आज के बच्चे एफबी पर मिलने वाले लाइक्स को विटामिन की तरह लेते हैं, जबकि वो आपके लिए जहर है. खुद इतने लायक बने कि दुनिया आपको लाइक करने लगे. सतर्क रहें, सुरक्षा में ही विकास है. अगर आपको ऐसी कोई दिक्कत होती है तो साइबर क्राइम लैंडलाइन नंबर 8544428428 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है.

छात्राओं ने पूछे सवाल
-कैसे पता चलेगा कि किसे ओटीपी शेयर करना है या नहीं?
कोई भी जानकारी देने से पहले आपको बैंक की ओर से मैसेज भेजा जायेगा. बिना आपकी अनुमति के कोई भी ओटीपी नहीं ले सकता है.

-अपनी फ्रेंड को ढूंढने के लिए मैंने कई लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजा और उनसे जानकारी लेने के लिए चैट भी की?
ऐसा करना गलत है. अगर आपको अपनी दोस्त को ढूंढ़ना था तो आप उसके एफबी वॉल पर पोस्ट करती. अनजाने में आपने कई लोगों को अपनी पर्सनल जानकारी साझा कर दी. ऐसा करने से बचें. 

पीपीटी के जरिये छात्राओं को मिली जानकारी
कार्यक्रम में साइबर एक्सपर्ट अभिनव सौरभ ने पीपीटी के जरिये छात्राओं को साइबर क्राइम से जुड़ी कई जानकारियां दी. उन्होंने साइबर स्टॉकिंग यानी किसी पर इंटरनेट के सहारे नजर रखना, साइबर पोर्नोग्राफी, पिक्चर को मॉर्फ कर देना और इ-मेल स्पूफिंग के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि बैंकिंग संबंधी साइबर फ्रॉड काफी बढ़ गये हैं. अपने डिजिटल ट्रांजैक्शन को सुरक्षित रखने के लिए हमेशा पिन कोड को ढक कर रखें, क्योंकि एटीएम कार्ड के मैग्नेटिक स्ट्रीप में आपका नाम, पता और बैंक की पूरी जानकारी होती है. इसे ही साइबर अपराधी हासिल करने के लिए एटीएम मशीन में क्लोनिंग की मशीनें लगाते हैं.

क्या करें?

सोशल साइट्स पर टू फैक्टर आथेंटिंकेशन करें. 

अंजान नंबरों और फ्रेंडलिस्ट को ब्लॉक करें. 

फोन खो जाने पर तुरंत वाट्सएप डिएक्टिव करें. 

फोन में स्ट्रांग पासवर्ड रखें. 

आइएमइआइ को याद कर सुरक्षित रखें. 

लैपटॉप या पीसी में एंटीवायरस अवश्य रखें.

क्या न करें?

ओपेन वाइफाइ का यूज नहीं करें. 

पर्सनल इन्फॉर्मेशन को पब्लिक नहीं करें. 

किसी दूसरे के कंप्यूटर से बैंकिंग कार्य न करें. 

पर्सनल इन्फॉरमेशन को सेव न रखें. 

कैमरा, ब्लूटूथ, वाइफाइ आदि को खुला न रखें.

छात्राएं अनजाने में मोबाइल का इस्तेमाल कर परेशानी में पड़ जाती है. जानकारी के अभाव में कई बार उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में प्रभात खबर ने जब साइबर क्राइम पर कार्यक्रम करने की बात की तो मैंने तुरंत हामी दे दी. इससे छात्राओं को न सिर्फ जानकारी मिलेगी बल्कि उनका मार्गदर्शन भी होगा. ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए.
-डॉ अंजु वर्मा, प्राचार्या, आरपीएस महिला कॉलेज

प्रभात खबर की ओर से साइबर क्राइम पर चल रहे इस अभियान का मैं हृदय से स्वागत करता हूं. किशोरावस्था की शुरुआत के साथ बच्चे नयी - नयी चीजों को जानना चाहते हैं. सोशल मीडिया और इंटरनेट का दायरा आज काफी बढ़ चुका है. ऐसे में बच्चों को अगर साइबर क्राइम से बचाव की जानकारी मिल जाये तो वह इससे बच सकते हैं.
-डॉ प्रभाकर तिवारी, प्राचार्य, आरपीएस  ट्रेनिंग कॉलेज

प्रभात खबर की ओर से यह बहुत ही अच्छी पहल है. ऐसे प्रोग्राम एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में होते रहना चाहिए. क्लिक ऑन वेबसाइट व लिंक  और मैसेज फॉरवर्ड की वजह से होने वाले साइबर क्राइम  के बारे में यहां जानकारी मिली.
-मोनिका, बीकॉम फर्स्ट इयर

इस तरह के कार्यक्रम से हम सभी को जानकारी तो मिलती ही है साथ ही इन जानकारियों को आप अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के बीच साझा भी करते हैं. आज के कार्यक्रम से मिली इस जानकारी को मैं अपनी छोटी बहन से साझा करूंगी.
-अंजलि, बीएड

कई बार हम फेक आइडी बनाने वालों से दोस्ती कर बैठते हैं. इसकी वजह से आप साइबर क्राइम के शिकार होते हैं. साइबर स्टॉकिंग  और इ-मेल स्पूफिंग के बारे में जानकारी मिली. कैसे इससे बचाव हो इसके बारे में भी जाना.
-पिंकी सिंह, बीकॉम सेकेंड इयर

मैं आज से ही साइबर स्वच्छता अभियान की शुरुआत करूंगी. जीतने भी अननोन फ्रेंड्स ही उन्हें अपने फ्रेंड्स लिस्ट से हटा दूंगी ताकि साइबर स्कॉकिंग से बच सकूं. साइबर क्राइम से जुड़ी कई सारी नयी जानकारियां मिली.
-प्रज्ञा, बीएड

 
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