Advertisement

ranchi

  • Nov 7 2018 7:24AM

धैर्य रखें, झारखंड में दिल्ली जैसे हालात मत बनने दीजिए

धैर्य रखें, झारखंड में दिल्ली जैसे हालात मत बनने दीजिए
अनुज कुमार सिन्हा
 
सुप्रीम काेर्ट का आदेश है-दीपावली के दिन सिर्फ दाे घंटे (रात में आठ बजे से 10 बजे) पटाखा फाेड़े. झारखंड में राज्य सरकार ने भी आदेश जारी कर दिया है. पुलिस प्रशासन ने तैयारी भी की है. जिसने भी आदेश का उल्लंघन किया, कार्रवाई हाेगी. अब सारा कुछ जनता के विवेक पर निर्भर करता है कि इस आदेश का वास्तव में कितना पालन हाेता है. 
 
अदालत ने ऐसा आदेश यूं ही नहीं दिया है. अगर सारा कुछ सामान्य हाेता ताे ऐसे आदेश की जरूरत ही नहीं पड़ती. हालात बिगड़ चुके हैं. भले ही देश के अन्य हिस्साें के लाेग उसे उतना महसूस नहीं कर रहे हाें जितना दिल्ली के लाेग कर रहे हैं. दीपावली के दिन आैर उसके बाद दिल्ली की घटना काे याद करने से सारी बातें स्पष्ट हाे जाती हैं कि आखिर काेर्ट ने आदेश क्याें दिया है.  
 
पटाखाें-बारूद से पिछले दाे-तीन सालाें से दिल्ली में ऐसी तबाही मची है कि कई दिनाें तक लाेग घराें से निकलने में हिचकते रहे. इतना प्रदूषण कि सांस लेना मुश्किल हाे गया था. इतना धुआं कि दिन में भी लाइट जला कर वाहन धीरे-धीरे चलते थे. स्कूलाें काे बंद करना पड़ा था. दिल्ली की सड़काें पर मास्क लगा कर लाेग निकलने लगे थे. आैर ताे आैर, हालात ऐसे हाे गये थे कि टेस्ट  क्रिकेट मैच काे रद्द  करने की स्थति बन गयी थी. खिलाड़ियाें काे खेलने में सांस की परेशानी हाेने लगी थी.  
 
सुप्रीम काेर्ट का आदेश इसी संदर्भ में आया है ताकि जीवन संकट में न पड़े. एक बड़ा वर्ग यह सवाल कर रहा है कि परंपरा है, पटाखा फाेड़ेंगे. पुलिस क्या कर लेगी? कितने लाेगाें काे पकड़ेगी या कार्रवाई करेगी. ऐसे लाेग अपने बारे में, अपनेे परिवार आैर बाद की पीढ़ी के बारे में भी साेचे. पटाखा जरूर फाेड़े, परंपरा का जरूर पालन करें. किसी ने राेका नहीं है. लेकिन सिर्फ परंपरा के नाम पर जिंदगी से खिलवाड़ी न करें.  धैर्य रखें. यह त्याेहार है. ऐसा कुछ न करें जिससे आपका जीवन ही संकट में पड़ जाये. सांस लेने में दिक्कत हाेने लगे. यह आत्म अनुशासन का मामला है.
 
आप अपने लिए, अपने परिवार-समाज के लाेगाें के लिए कुछ नियंत्रण रखें. यह सही है कि झारखंड आज भी हरा-भरा है आैर छाेटे-छाेटे झटके बरदाश्त कर सकता है. लेकिन अगर यहां भी दिल्ली जैसा खिलवाड़ हाेगा ताे झारखंड के पर्यावरण काे भी बिगड़ने में वक्त नहीं लगेगा. प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने का नतीजा भुगतने काे तैयार रहना हाेगा.  
 
आंकड़े बताते हैं कि राजधानी रांची के कई प्रमुख चाैराहाें पर दीपावली के दिन प्रदूषण का स्तर खतरे के निशान काे पार कर जाता है.  कार्बनडायक्साड की मात्रा इतनी तेजी से बढ़ती है कि नाक-मुंह बंद करना पड़ता है. चाहे ध्वनि प्रदूषण हाे या वायु प्रदूषण,दाेनाें से बचना हाेगा. इसे बचाना आपका दायित्व है. अदालत ने जाे आदेश दिया है, वह आपके आैर हमारे हित के लिए है. इसे समझना हाेगा. चुनाैती देने या अवहेलना करने से हम सभी का नुकसान हाेगा. यह सही है कि अगर लाेग नहीं माने, हर जगह मनमानी करने लगे ताे पुलिस बेबस नजर आयेगी.  कुछ कर नहीं पायेगी. 
 
लेकिन ऐसा कर हम सभी अपना ही अहित करेंगे.  हर  एक व्यक्ति काे जिम्मेवार नागरिक की तरह वर्ताव करना हाेगा. अदालत या प्रशासन का आदेश नहीं भी आता, तब भी पटाखा छाेड़ने के दाैरान इस बात का ख्याल रखना ही चाहिए कि दूसराें काे इससे परेशानी न हाे, पर्यावरण (जाे सबसे गंभीर मुद्दा है) प्रदूषित न हाे. अगर इसके बावजूद लाेग नहीं मानते, ताे इसका खामियाजा भुगतने के लिए भी तैयार रहना चाहिए. 
 
दाे घंटा कम नहीं हाेता. ऐसी बात नहीं है कि 10 बजे के बाद पटाखा नहीं फाेड़ेंगे, किसी की नींद हराम नहीं करेंगे ताे परंपरा टूट जायेगी.  अगर 10-20 बम कम फाेड़ेंगे, पटाखा कम चलायेंगे ताे काेई पहाड़ नहीं टूट जायेगा. यह राेशनी का त्याेहार है. इसकी पवित्रता काे बनाये रखें.  परंपरा ताे यही है कि दीपक से घराें काे सजाये. लेकिन दाे-चार  दीपक जलाकर खानापूर्ति की जाती है.  
 
अब दीयाें की जगह लाेग चाइना के छाेटे-छाेटे बल्बाें से घराें काे सजाते हैं. परंपरा वहां भी दिखनी चाहिए. वक्त है चेतने का. यह मामला जीवन से जुड़ा है. आपकाे तय करना है कि अंधाधुंध तेज आवाजवाले पटाखा छाेड़ कर, समय काे नहीं मान कर, अपना, अपने परिवार का आैर पड़ाेसियाें-समाज का जीवन तहस-नहस करना चाहते हैं या संयम बरतते हुए, कानून-स्व अनुशासन का पालन करते हुए अपनी परंपरा का निर्वाह करना चाहते हैं. बेहतर है दूसरा रास्ता अपनाये आैर अपने भविष्य काे बचायें.
 

Advertisement

Comments

Advertisement