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ranchi

  • Jan 12 2019 2:15AM

रांची : वेजफेड के पास नहीं कोई काम अपने भरोसे हैं सूबे के धरतीपुत्र

रांची : वेजफेड के पास नहीं कोई काम अपने भरोसे हैं सूबे के धरतीपुत्र
रांची : झारखंड स्टेट आदिवासी को-अॉपरेटिव वेजिटेबल मार्केटिंग फेडरेशन लि. (वेजफेड) की स्थापना किसान समितियों व इसके सदस्यों के हितों की रक्षा के लिए हुई थी. पर अाज वेजफेड के पास कोई काम नहीं है. न तो कोई पुरानी योजना का संचालन हो रहा है और न ही नये योजना प्रस्ताव को मंजूरी मिली है. 
 
ऐसे में फेडरेशन के प्रबंध निदेशक सहित करीब नौ कर्मी टाइम पास कर रहे हैं. सहकारिता (अब कृषि, पशुपालन व सहकारिता) विभाग के सचिव फेडरेशन के अध्यक्ष होते हैं.
 
 अभी पूजा सिंघल इसकी अध्यक्ष हैं, पर उन्होंने अपने कार्यकाल में अब तक वेजफेड  को लेकर कोई बैठक नहीं की है.  मई-2018 में वेजफेड की अोर से पांच योजना प्रस्ताव मंजूरी के लिए विभाग को भेजे गये, पर मामला लंबित है.
 
 इनमें टमाटर व मिर्च की 10 प्रसंस्करण इकाई, सब्जी की मार्केटिंग के लिए 71 पिक अप वैन की खरीद, पपीता पौध व बिचड़ा उत्पादन इकाई तथा 10 मॉडल स्टोर रूम की योजना शामिल है. 
 
यही नहीं बेड़ो स्थित फेडरेशन के दो हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज की चहारदीवारी निर्माण का प्रस्ताव भी लंबित है. इन सब वजहों से  किसानों को भी वेजफेड का अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा. उन्हें सब्जियों की अच्छी कीमत नहीं मिल रही. इस कारण अाज भी वे बिचौलियों को अपनी सब्जी बेचने को मजबूर हैं. 
 
क्या है वेजफेड का काम 
 वेजफेड की स्थापना न सिर्फ आदिवासी बल्कि अन्य समुदाय के कृषि समितियों तथा इनके सदस्य किसानों के लिए भी हुई है. फेडरेशन का काम अपनी इन करीब 450 समितियों के उत्पाद स्वयं खरीद कर इसके करीब 40 हजार सदस्य किसानों को बिचौलियों के चंगुल से बचाना तथा उन्हें उनके उत्पाद की अच्छी कीमत दिलाना है. 
 
वहीं खरीदे गये सब्जी व फल के लिए कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था करना तथा इनके प्रसंस्करण सहित अन्य वैल्यू एडिशन भी वेजफेड के गठन के उद्देश्यों में शामिल  है. यही नहीं वेजफेड को अपना एक्सपोर्ट (निर्यात) सेल, क्वालिटी कंट्रोल प्रयोगशाला तथा रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल भी गठित करना है. पर यह सब दूर की बात है. 
 
रिटेल सेल सस्ता नहीं : वेजफेड ने रांची में कुल पांच वेजिटेबल रिटेल अाउटलेट  खोले हैं. यहां लोगों को ताजी सब्जियां बाजार से कम कीमत पर मिलनी थी. पर यहां सब्जियों की कीमत कभी खुले बाजार से सस्ती नहीं रहती. इसलिए ये रिटेल आउटलेट लोकप्रिय नहीं हो सके.
 

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