Advertisement

ranchi

  • Aug 10 2018 8:12AM

सरायकेला को-ऑपरेटिव बैंक का है मामला: डिपॉजिट बढ़ाने के लिए बैंक ने 33 लाख रुपये घूस दिये

सरायकेला को-ऑपरेटिव बैंक का है मामला: डिपॉजिट बढ़ाने के लिए बैंक ने 33 लाख रुपये घूस दिये
शकील अख्तर
 
रांची : को-ऑपरेटिव बैंक के अफसरों ने रिश्वत देने पर 33.24 लाख रुपये खर्च किये. यह राशि बैंक ने डिपोजिट बढ़ाने के एवज में  जमाकर्ताओं को दी थी. बैंक के हिसाब-किताब में इसे ‘फंड मोबलाइजेशन चार्ज’ के रूप में दिखाया गया है. 
 
को-ऑपरेटिव बैंक के इतिहास में रिश्वत देकर किसी से पैसा जमा कराने का यह पहला मामला पकड़ में आया है. फिलहाल इस खर्च को जायज करार देने का मामला बैंक के सीइओ  ब्रजेश्वरनाथ के पास विचाराधीन है. रिश्वत देकर पैसा जमा कराने का यह मामला सरायकेला को-ऑपरेटिव बैंक का है. 
 
बैंक में पैसा जमा कराने के लिए को-ऑपरेटिव बैंक चाईबासा ने ‘फंड मोबलाइजेशन चार्ज’ के नाम से एकाउंट बनाया. इसके बाद इस एकाउंट में बैंक में जमा धनराशि ट्रांसफर कर निकासी शुरू कर दी गयी.  
 
एक अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2018 तक ‘फंड मोबलाइजेशन चार्ज’ से 33.24 लाख रुपये की निकासी की गयी. निकासी के ब्योरे के विश्लेषण से इस बात की जानकारी मिलती है कि इस राशि में से कुल 7.94 लाख रुपये मूल्य के इलेक्ट्राॅनिक आइटम खरीद कर राशि जमा करनेवालों को उपहार में दिये गये. शेष 25.30 लाख रुपये की नकद निकासी की गयी. 
 
निकासी से संबंधित आंकड़ों से इस बात की जानकारी मिलती है कि गुप्ता इलेक्ट्राॅनिक्स नामक दुकान से एक सप्ताह में 1.38 लाख रुपये की सामग्री खरीदी गयी. वहीं, गर्ग इलेक्ट्राॅनिक्स से 20 दिन में 6.56 लाख रुपये के सामान खरीदे गये. बैंक के हिसाब-किताब में सिर्फ इस दोनों प्रतिष्ठानों को भुगतान करने का ब्योरा दर्ज है. इसमें इसका उल्लेख नहीं किया गया है कि यह सामग्री  किन अधिकारियों को बतौर उपहार दी गयी.
 
बैंक में फंड मोबलाइजेशन चार्ज एकाउंट से की गयी नकद निकासी किन अधिकारियों को दिये गये, इसका ब्योरा भी दर्ज नहीं है. हालांकि एक-एक दिन में फंड मोबलाइजेशन चार्ज मद से 78 हजार रुपये तक की नकद निकासी की गयी है. बैंक के दस्तावेज में फंड मोबलाइजेशन मद से निकासी की अवधि में सरायकेला जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के कार्यालय में को-ऑपरेटिव बैंक में रुपये जमा कराये गये हैं. हालांकि भू-अर्जन कार्यालय द्वारा जमा करायी गयी 93 करोड़ रुपये की  राशि में से दूसरे और तीसरे ही दिन से ही  निकासी शुरू हो गयी.  
 
भू-अर्जन कार्यालय द्वारा जारी अवार्डी की सूची के आलोक में को-ऑपरेटिव बैंक द्वारा भुगतान किया जाने लगा. को-ऑपरेटिव बैंक द्वारा फंड मोबलाइज करने के नाम पर 33 लाख रुपये खर्च करने और जिला भू-अर्जन कार्यालय से बैंक में पैसा जमा कराये जाने की घटना को देखते हुए बैंक अधिकारियों के बीच इस राशि के गबन की आशंका जतायी जा रही थी. 
 
इसके लिए यह तर्क पेश किया जा रहा था कि को-ऑपरेटिव बैंक में पैसा जमा करने के लिए कोई सरकारी अधिकारी उपहार तो स्वीकार कर सकता है, लेकिन इतनी बड़ी रकम रिश्वत के तौर पर नकद नहीं ले सकता है. मामला प्रकाश में आने के बाद  सहायक महाप्रबंधक हेमंत पांडेय को मामले की जांच के लिए अधिकृत किया गया था, लेकिन बैंक के बड़े अधिकारियों  ने यह कहते हुए उन्हें जांच के लिए नहीं जाने दिया कि वहां कोई गड़बड़ी नहीं हुई है.

घूस देने के लिए की गयी निकासी का ब्योरा
 
 तिथि    किसे दिया  राशि (रुपये में)
19-7-2017 गुप्ता इलेक्ट्राॅनिक्स  27,000
19-7-2017 गुप्ता इलेक्ट्राॅनिक्स  38,000
25-7-2017 गुप्ता इलेक्ट्राॅनिक्स  73,000
26-7-2017 नकद निकासी  60,000
27-7-2017 नकद निकासी 55,000
04-8-2017  गर्ग इलेक्ट्राॅनिक्स  62,500
05-8-2017  नकद निकासी  53,000
पेज 17 भी देखें
घूस देने के लिए की गयी निकासी का ब्योरा
08-8-2017  नकद निकासी  54,000
11-8-2017  नकद निकासी  75,000
16-8-2017  नकद निकासी 62,000
18-8-2017  गर्ग इलेक्ट्राॅनिक्स  60,000
22-8-2017  नकद निकासी  55,000
24-8-2017  नकद निकासी  51,000
25-8-2017  नकद निकासी 52,000
6-9-2017  नकद निकासी 64,000
12-9-2017  नकद निकासी  77,000
13-9-2017  नकद निकासी 65,000
16-9-2017  गर्ग इलेक्ट्राॅनिक्स 78,000
19-9-2017  गर्ग इलेक्ट्राॅनिक्स 69,000
21-9-2017 गर्ग इलेक्ट्राॅनिक्स 72,000
25-9-2017  गर्ग इलेक्ट्राॅनिक्स  86,000
26-9-2017  गर्ग इलेक्ट्राॅनिक्स 77,000
27-9-2017  नकद निकासी  77,000
4-10-2017  गर्ग इलेक्ट्राॅनिक्स  75,000
 

Advertisement

Comments

Advertisement