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ranchi

  • May 16 2018 8:32AM

शर्मनाक! पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए ली जाती है घूस

शर्मनाक! पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए ली जाती है घूस
रिम्स में मृतकों के परिजन से सौदा करते हैं फॉरेंसिक विभाग के क्लर्क
 
सरकार  और स्वास्थ्य विभाग चाहे जो कर लें, न रिम्स की व्यवस्था सुधरेगी और न ही  यहां के कर्मचारी सुधरेंगे. यहां पहुंचनेवाले गरीब मरीजों और उनके परिजन को  यहां कर्मचारी कदम-कदम पर प्रताड़ित करते हैं. यहां खून दिलाने के नाम पर,  जांच कराने के नाम पर, महंगी दवाएं खपाने के एवज में, सरकारी एंबुलेंस दिलाने के  नाम पर गरीब मरीजों का जमकर शोषण हो रहा है. बाहरी दलाल तो इसमें संलिप्त  होते ही हैं, रिम्स के कर्मचारी भी इन दलालों का साथ देते हैं. 
 
ताजा मामला  यहां के फॉरेंसिक विभाग से जुड़ा है, जहां मंगलवार को कर्मचारी वीरेंद्र कुमार ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने के एवज में एक मृतक के परिजन  से एक हजार रुपये  घूस के रूप में मांगी. हालांकि, मामला 200 रुपये में ही पट गया. प्रभात खबर ने जब इस संबंध में आरोपी क्लर्क से बात की, तो उन्होंने आरोप को सिरे से खािरज कर दिया.  प्रभात खबर  के पास इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो फुटेज उपलब्ध है.
दुष्यंत तिवारी, राजीव पांडेय
 
रांची : करीब एक महीने पहले कांके ग्राम निवासी छोटन राम की एक सड़क हादसे में मौत हो गयी थी. उनके शव का पोस्टमार्टम रिम्स में हुआ था. पोस्टमार्टम की रिपोर्ट लेने के लिए स्वर्गीय छोटन राम का बेटा अजय उरांव पिछले तीन दिनों से रिम्स के फॉरेंसिक विभाग के चक्कर लगा रहा था. लेकिन, रिपोर्ट नहीं मिल रही थी. आखिरकार मंगलवार को फॉरेंसिक विभाग के क्लर्क  वीरेंद्र कुमार ने दया दिखायी और 200 रुपये लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट मृतक के परिजन को सौंप दी. 
 
यह तो हद ही हो गयी!
 
रिम्स में कदम-कदम पर शोषित और प्रताड़ित किये जा रहे गरीब मरीजों और उनके परिजन
रिम्स में मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए क्लर्क द्वारा घूस लेते हुए वीडियो आया सामने 
मृतक के परिजन से 1000 रुपये मांगते दिख 
रहा है क्लर्क, 200 रुपये में पटा मामला
 
पहले भी वीरेंद्र कुमार पर लगते रहे हैं कई आरोप   
 
रिम्स प्रबंधन  वीरेंद्र कुमार पर काफी मेहरबान रहा है. पोस्टमार्टम, किचेन, टेंडर सहित रिम्स के कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी उन्हें दी जा चुकी है. 
 
इसके अलावा वाहन के संचालन के लिए ईंधन का लेखाजोखा रखने का जिम्मा भी वीरेंद्र कुमार के ही पास था.  करीब तीन माह पहले स्वास्थ्य मंत्री के क्षेत्र के एक मृतक को वाहन दिलाने में देरी हुई थी. काफी प्रयास के बाद शव वाहन मिल पाया था. लेकिन, इस वाहन के चालक ने मृतक के परिजन से पैसे ले लिए थे, जबकि यह वाहन मंत्री की सिफारिश पर परिजन को नि:शुल्क उपलब्ध कराया गया था. मामला सामने आने के बाद मंत्री ने वीरेंद्र कुमार के खिलाफ जांच के आदेश दिये थे. साथ ही उन्हें ई-टेंडर से जुड़े कार्य से भी हटा दिया गया था.
 
सड़क दुर्घटना में हुई थी की मौत : कांके निवासी छाेटन राम कृषि विश्वविद्यालय में कार्यरत थे. एक माह पहले वे ड्यूटी के बाद साइकिल से घर लौट रहे थे. इसी दौरान एक वाहन ने उनको रौंद दिया था. गंभीर रूप से घायल छोटन राम को परिजन रिम्स लाये, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था. शव का पोस्टमार्टम रिम्स में ही हुआ था. 
 
वीडियो फुटेज में कैद हुआ पूरा घटनाक्रम : अजय उरांव मंगलवार को अपने पिता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेने के लिए रिम्स के फॉरेंसिक विभाग में पहुंचा. यहां क्लर्क वीरेंद्र कुमार अपनी कुर्सी पर बैठे हुए थे. उसने पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांगी, तो वीरेंद्र कुमार ने उससे 1000 रुपये की मांग की. इस पर मृतक के बेटे ने कहा : सर! मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं. 
 
इस पर क्लर्क ने कहा : अच्छा 500 रुपये ही दे दो. मृतक के बेटे ने 100 रुपये की पेशकश की, तो क्लर्क ने कहा : 100 रुपये में कुछ भी नहीं मिलता है और तुम 100-200 की बात कर रहे हो. इसके बाद क्लर्क उठकर बॉडी डिसेक्शन रूम की ओर चल दिया अौर मृतक के बेटे को अपने पीछे आने को कहा. बॉडी डिसेक्शन रूम में मृतक के बेटे ने क्लर्क को 200 रुपये का नोट दिया. इसके बाद क्लर्क अपने कार्यालय पहुंचा. यहां  रिपोर्ट जारी करने से पहले की प्रक्रिया पूरी की और पोस्टमार्टम रिपोर्ट निकाल कर मृतक के बेटे को सौंप दिया.
मैंने किसी व्यक्ति से घूस नहीं लिया है. जो वीडियाे अपको मिला है, वह पूरी तरह से झूठा है.
वीरेंद्र कुमार, क्लर्क, फॉरेंसिक विभाग, रिम्स 

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