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ranchi

  • Jun 19 2019 8:20AM
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रांची : मुख्यमंत्री ने दिया निर्देश, स्थानीय भाषा के शिक्षकों की भी नियुक्ति करें

रांची : मुख्यमंत्री ने दिया निर्देश, स्थानीय भाषा के शिक्षकों की भी नियुक्ति करें
शिक्षा, साक्षरता एवं कौशल विकास विभाग की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा, दिया निर्देश
नयी बहाली में भी जिलावार नियुक्ति के लिए परीक्षा लेने का निर्देश  
शिक्षकों की बहाली से रिजल्ट में हुए सुधार और ड्राप आउट दर में भी कमी आने की सराहना की
 
रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने नयी बहाली में भी जिलावार नियुक्ति के अनुरूप आवेदन  आमंत्रित कर जल्द परीक्षा कराने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि  नियमों का सरलीकरण कर स्थानीय भाषा के शिक्षकों की भी नियुक्ति करें.  आदिवासी बहुल जिलों में शिक्षकों की सबसे ज्यादा कमी है. पहले उन जिलों पर  फोकस करें, जहां अभी शिक्षक नहीं हैं. 
 
वहां पर घंटी आधारित शिक्षक बहाल करें. संताल परगना, कोल्हान, पलामू, लातेहार, गढ़वा जैसे जिलों पर विशेष फोकस  करने की जरूरत है. श्री दास ने ये बातें मंगलवार को प्रोजेक्ट भवन में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग तथा उच्च और तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग की समीक्षा  बैठक में कही. उन्होंने कहा कि झारखंड में पिछले साढ़े चार साल में स्कूली शिक्षा व साक्षरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम हुए हैं. 
 
इसी का नतीजा है कि भारत सरकार द्वारा प्रशंसा की गयी है. पहले की तुलना में झारखंड में प्राथमिक से लेकर हाई स्कूल तक की शिक्षा व्यवस्था में सुधार हुए हैं. राज्य में अब तक 31 हजार शिक्षकों की सीधी बहाली हो चुकी है. इसके अतिरिक्त अभी और शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया चल रही है.  शिक्षकों की बहाली बढ़ने से रिजल्ट में सुधार तो हुआ ही है, ड्रॉप आउट दर में भी काफी कमी आयी है. 
 
बिजली पहुंची, अब हर स्कूल में पहुंचायें पानी : राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए मुख्यमंत्री ने एक लक्ष्य निर्धारित कर काम करने का निर्देश देते हुए कहा कि स्कूलों में बेंच-डेस्क, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचा दी गयी हैं. 
 
अब हर स्कूल में पानी पहुंचाने का काम तेजी से करना है. इसके लिए सीएसआर या 14वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग किया जायेगा.  मुख्यमंत्री ने राज्य में शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए दूसरे राज्यों से एक्सपर्ट बुलाकर मास्टर ट्रेनर तैयार करने का सुझाव दिया.
 
नियोक्ता शर्तें पूरी नहीं करते हैं तो कार्रवाई करें
 
हाल ही में विभिन्न कंपनियों में रोजगार पानेवाले बच्चों से फीडबैक लेने का निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जो बच्चे काम छोड़ रहे हैं, उनसे कारण जानें. यदि वादे के अनुसार नियोक्ता शर्तें पूरी नहीं कर रहा है, तो उन पर कार्रवाई की जायेगी. बैठक में  मंत्री नीरा यादव, मुख्य सचिव डॉ डीके तिवारी, विकास आयुक्त सुखदेव सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ सुनील कुमार बर्णवाल और अन्य अिधकारी थे.
 
उच्च शिक्षा को पीपीपी मोड पर चलाने का निर्देश
 
बैठक में उच्च शिक्षा को पीपीपी मोड पर चलाने का निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े संस्थानों के साथ करार करें. संस्थान ही शिक्षण संस्था चलायें. राज्य के बच्चों को इसमें प्राथमिकता दी जाये. सरकार उनकी हर संभव मदद करेगी.  श्री दास ने कहा कि  पलायन रोकने व रोजगार मुहैया कराने में यह सबसे कारगर है. स्किल डेवलेपमेंट के माध्यम से राज्य में अब तक 71902 प्रशिक्षित लोगों में से 48672 लोगों को रोजगार से जोड़ा जा चुका है. 
 
1828 पंचायतों में ड्रॉप आउट दर हुआ शून्य
 
बैठक में बताया गया कि  केंद्रीय मानव संसाधन विभाग द्वारा राज्य में चल रही आकांक्षा योजना की सराहना की गयी है. इसमें सरकारी स्कूल के बच्चों को मेडिकल और इंजीनियरिंग की कोचिंग दी जा रही है. इसके तहत अब तक 47 बच्चों का चयन किया जा चुका है. 
 
राज्य में प्राथमिक से हाइस्कूल में नामांकन में काफी सुधार हुआ है. 2010-11 में जहां प्राथमिक स्कूलों में 75.5 प्रतिशत ट्रांजिशन दर थी, वहां 2017-18 में 94.8 प्रतिशत हो गयी. मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जिलों में ट्रांजिशन दर कम है, उन पर विशेष ध्यान दें. बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्य की 1828 पंचायतों में ड्रॉप आउट दर शून्य हो गयी है. इनमें 17366 स्कूल हैं.  
 
शून्य ड्रॉप आउट पंचायतों के मुखिया व स्कूल के प्राचार्यों को मुख्यमंत्री ने अपनी ओर से प्रशंसा पत्र भेजने को कहा. राज्य में ई-विद्यावाहिनी, मिड डे मिल आदि में भी अच्छा काम करने पर अधिकारियों को बधाई दी.  
 
पलायन रोकने के लिए दें वोकेशनल ट्रेनिंग 
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य से पलायन रोकने के लिए स्कूल पास छात्र-छात्राओं को वोकेशनल ट्रेनिंग दें. जेसीइआरटी के तहत ऐसे सिलेबस डिजाइन करने को कहा, जिससे लोगों में देशभक्ति और राज्यभक्ति की भावना मजबूत हो.  
 
महान लोगों के जीवन, उनके द्वारा दिये गये बलिदान आदि के बारे में पढ़ाया जाये. रिजल्ट में सुधार पर स्कूलों, प्राचार्य और बीडीओ की दक्षता मापी जाये. जो स्कूल अच्छा कर रहे हैं, उन्हें राज्य स्तर पर पुरस्कृत किया जायेगा. जो लगातार खराब प्रदर्शन कर रहे हैं, उन पर कार्रवाई की जायेगी. स्कूलों की यूनिफार्म के लिए कुछ जिलों ने स्वयं सहायता समूह को जोड़ा है. 
 
जिन जिलों में स्वयं सहायता समूह को नहीं जोड़ा गया है, उन्हें जोड़ने का निर्देश जारी करें. स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षण देकर इससे जोड़ें. स्कूलों में स्वच्छता रखने पर उन्होंने कहा कि प्राचार्यों को इसमें हर माह छोटी सी राशि देकर साफ-सफाई करनी चाहिए. वे चाहें, तो स्कूल का माहौल बदल सकता है. 
 
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