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ranchi

  • Mar 14 2019 8:30AM
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रांची : वर्दी के रौब से कहीं ज्यादा भा रही है अधिकारियों को खादी, आइएएस व आइपीएस अधिकारी चुनाव में आजमाते रहे हैं भाग्य

रांची : वर्दी के रौब से कहीं ज्यादा भा रही है अधिकारियों को खादी, आइएएस व आइपीएस अधिकारी चुनाव में आजमाते रहे हैं भाग्य
  • राज्य में कई आइएएस व आइपीएस अधिकारी चुनाव में आजमाते रहे हैं भाग्य
  • कई अधिकारी नौकरी छोड़ चुनावी जंग भी जीते, यशवंत सिन्हा रहे अगुवा
  • पलामू में दो पूर्व डीजीपी की हो सकती है भिड़ंत, आइएएस की नौकरी छोड़ यशवंत सिन्हा लड़े थे चुनाव
 
सुनील चौधरी 
 
रांची : चुनावी घोषणा होने के महीनों पहले से ही झारखंड के कुछ अधिकारी को वर्दी नहीं भा रहा था. वे खादी की ओर आकर्षित हो रहे थे. हालांकि यह वर्षों से होता आ रहा है कि वर्दी छोड़कर अधिकारी लोकतंत्र के महापर्व में जुट जाते हैं. वर्दी के रौब से ज्यादा उन्हें खादी का रौब भाता है. झारखंड में सबसे पहले आइएएस अधिकारी रहे यशवंत सिन्हा हजारीबाग सीट से चुनाव लड़े. जीते भी. केंद्र में वित्त मंत्री तक बने. 
हालांकि संयुक्त बिहार के समय से ही वह चुनाव लड़ते आ रहे हैं. इसी कड़ी में आइपीएस अधिकारी रामेश्वर उरांव भी हैं. वह भी लोहरदगा सीट से  सांसद का चुनाव जीत चुके हैं. 
 
क्रिकेट में जीते पर राजनीति में हारे : आइपीएस अधिकारी अमिताभ चौधरी ने भी वीआरएस लेकर पहले क्रिकेट का चुनाव लड़ा, फिर रांची संसदीय सीट से चुनाव में किस्मत आजमायी. क्रिकेट के चुनाव में तो वह सफल हो गये. पर राजनीतिक चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. राजनीति में आइपीएस अधिकारी अजय कुमार सिंह भी कूदे. वीआरएस लेकर वह पहले झाविमो के टिकट पर जमशेदपुर चुनाव लड़े और पहली चुनाव में ही जीत दर्ज की. पांच साल सांसद भी रहे. 
 
पर दूसरी बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा. अभी वह झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं. चर्चा है कि संभवत: धनबाद सीट से वह तीसरी बार चुनाव लड़ सकते हैं. आइपीएस अधिकारी रहे सुबोध प्रसाद भी गोड्डा लोकसभा का चुनाव आजसू की टिकट पर लड़ चुके हैं. पर उन्हें सफलता नहीं मिली थी.  
 
दो पूर्व डीजीपी की भिड़ंत पर है सबकी नजर : झारखंड के डीजीपी पद से रिटायर होकर बीडी राम पलामू सीट से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़े. उन्हें पहले चुनाव में ही सफलता मिल गयी. इस बार इसी सीट पर डीजीपी पद से रिटायर हुए राजीव कुमार भी लड़ना चाहते हैं. 
उन्होंने कांग्रेस  की सदस्यता भी ग्रहण कर ली है. यदि उन्हें पलामू सीट से टिकट मिल जाता है, तो इस बार पलामू का चुनाव जोरदार होने की संभावना है. सभी अधिकारियों की नजर इस सीट पर है. 
 
विधानसभा चुनावों में भी अधिकारियों की रही है रुचि : लोकसभा के साथ-साथ विधानसभा चुनाव में भी राज्य के अधिकारियों की रुचि रही है. इसी कड़ी में आइएएस अधिकारी रहे जेबी तुबिद का नाम आता है. वर्ष 2014 में नौकरी के पांच वर्ष पूर्व ही उन्होंने वीआरएस ले लिया. भाजपा ने उन्हें चाईबासा से टिकट दिया. पर श्री तुबिद को सफलता नहीं मिली है.
 
खबर है कि इस बार भी विधानसभा के चुनाव में वह जोर लगायेंगे.आइपीएस अधिकारी रहे लक्ष्मण सिंह भी भाजपा के टिकट पर राजधनवार सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं. पर उन्हें सफलता नहीं मिली थी.  कांग्रेस के वर्तमान विधायक सुखदेव भगत भी राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे. वह भी नौकरी छोड़ कर राजनीति में कूदे और सफल भी हुए. आइएएस अधिकारी विमलकीर्ति सिंह ने भी राजनीति के कारण ही नौकरी से वीआरएस लिया. पर टिकट पाने में वह सफल नहीं हो सके. पंजाब कैडर के आइपीएस अधिकारी रहे अरुण उरांव ने भी राजनीति के लिए नौकरी छोड़ दी. 
 
वह अभी कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हैं. हालांकि अभी तक झारखंड से उन्हें टिकट नहीं मिला है. चर्चा है कि लोकसभा चुनाव के लिए लोहरदगा सीट पर वह भी किस्मत आजमाना चाहते हैं. आइपीएस अधिकारी शीतल उरांव ने भी राजनीति के लिए नौकरी छोड़ दी, पर वह चुनाव नहीं लड़ सके.  
 
झारखंड में अधिकारी रहे, पर चुनाव लड़ा दूसरे राज्यों से  : अाइएएस अधिकारी बीके चौहान कभी झारखंड में स्वास्थ्य सचिव और झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड के चेयरमैन पद पर काम कर चुके हैं. उन्होंने भी वीआरएस लेकर हिमाचल प्रदेश से चुनाव लड़ा. 
भाजपा से उन्हें टिकट मिला. वह सफल भी हुए और विधायक बने. झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड के पहले अध्यक्ष रहे राजीव रंजन भी बिहार के इस्लामपुर विधानसभा चुनाव में जदयू के टिकट पर विधायक बने. बाद में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली. अभी वह भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता के रूप में बिहार में ही सक्रिय हैं.
 

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