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ranchi

  • Oct 17 2019 7:17PM
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झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 : मतदाताओं को रिझाने के लिए यात्रा पर राजनीतिक दलों के नेता, देखें VIDEO

झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 : मतदाताओं को रिझाने के लिए यात्रा पर राजनीतिक दलों के नेता, देखें VIDEO

मिथिलेश झा

रांची : झारखंड में विधानसभा चुनावों की तारीखों का अब तक एलान नहीं हुआ है, लेकिन चुनाव का खुमार राजनीतिक दलों के सिर चढ़कर बोल रहा है. यात्राओं का दौर चल रहा है. सभी पार्टियां एक-दूसरे की खामियां गिनाने में लगी हैं. अपनी खूबियां बता रही हैं. सत्ता में आने के लिए लोगों को सब्जबाग भी दिखाये जा रहे हैं. कोई एक साल में 5 लाख लोगों को रोजगार देने की बात कर रहा है, तो कोई विकास को और रफ्तार देने की बात कर रहा है. एक पार्टी तो झारखंड को पूरी तरह डर के साये में देख रही है.

लोकसभा चुनावों की तरह झारखंड विधानसभा चुनाव में भी सरकार को घेरने के लिए विरोधी दल एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं. शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा, बाबूलाल मरांडी की झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) और कांग्रेस ने मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा था. परिणाम सामने आने के बाद किसी ने खुलकर, तो किसी ने दबी जुबान में अपने सहयोगी दलों की आलोचना की. भाजपा ने 14 में से 12 लोकसभा सीटें जीत ली.

भाजपा के शासन में इतनी बड़ी जीत से उत्साहित सूबे के मुखिया रघुवर दास ‘जोहार जनआशीर्वाद यात्रा’ पर निकले. लोगों को बताया कि उनकी सरकार ने प्रदेश के विकास के लिए क्या-क्या काम किये. यात्रा के दौरान कई जगहों पर उन्होंने सैकड़ों, हजारों करोड़ रुपये की योजनाओं की घोषणा और शुरुआत भी की. मुख्यमंत्री रघुवर दास सूबे की जनता को केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होने के फायदे भी बता रहे हैं.

रघुवर दास बता रहे हैं कि कैसे उन्होंने केंद्र के साथ मिलकर गांव-गांव और घर-घर तक बिजली पहुंचायी. उज्ज्वला योजना के तहत महिलाओं को लकड़ी और कोयला के धुआं से मुक्ति दिलायी. मुफ्त गैस कनेक्शन के साथ फ्री में सिलिंडर भी दिये. बेरोजगार युवाओं को प्राइवेट कंपनियों में रोजगार दिलाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया. गरीबों को आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिलवाया. मोमेंटम झारखंड के जरिये राज्य में भारी निवेश आकर्षित किये.

‘जोहार जन आशीर्वाद यात्रा’ के दौरान वह कांग्रेस और झामुमो पर झारखंड में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के आरोप लगाये. दावा किया कि उनकी सरकार की सभी योजनाएं गांव, गरीब, किसान, महिला और युवाओं पर केंद्रित हैं. सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम तबके तक पहुंचाना ही उनका लक्ष्य है.

दूसरी तरफ, ‘परिवर्तन रथ’ पर सवार मुख्य विपक्षी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा रघुवर दास सरकार पर तानाशाही के आरोप लगा रही है. पार्टी के मुखिया हेमंत सोरेन लोगों को बता रहे हैं कि उनकी लड़ाई सत्ता के लिए नहीं है. झारखंड के बेहतर भविष्य के लिए है. नया झारखंड बनाने में मदद करने के लिए लोगों का साथ मांग रहे हैं. रघुवर दास के नेतृत्व में चल रही भाजपा सरकार को हेमंत सोरेन युवा विरोधी, आदिवासी विरोधी और गरीबों के विकास का विरोधी करार दे रहे हैं. और इस सरकार को सत्ता से बेदखल करने की लोगों से अपील कर रहे हैं.

इतना ही नहीं, हेमंत सोरेन लोगों को यह भी बता रहे हैं कि वह सत्ता में आये, तो क्या-क्या करेंगे. उनका दावा है कि सरकार ने लैंड बैंक के नाम पर 21 लाख एकड़ जमीन लोगों से हथिया ली है. इसे पूंजीपतियों और अपने सहयोगियों के हवाले यह सरकार कर देगी. हेमंत ने कहा है कि झाखंड में उनकी सरकार बनी, तो यह पूरी जमीन वह आदिवासियों को वापस दिलायेंगे. एक साल के भीतर वह 5 लाख बेरोजगारों को नौकरी देंगे. जब तक नौकरी नहीं मिलेगी, तब तक इतने युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देंगे. हेमंत कह रहे हैं कि वह हर झारखंडवासी को जमीन पर उसका हक दिलायेंगे.

भाजपा और झामुमो के बाद बात करते हैं झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) की. इस पार्टी के मुखिया बाबूलाल मरांडी हैं. बाबूलाल मरांडी ‘जनादेश यात्रा’ पर हैं. कहते हैं कि रघुवर दास की सरकार झारखंड विकास मोर्चा को खत्म करना चाहती है. वह लोगों से पूछते हैं कि रघुवर जी के कितने झूठ आप जानते हैं? झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि वह एक नया झारखंड बनाने जा रहे हैं. एक आधुनिक झारखंड. बाबूलाल मरांडी कह रहे हैं कि झारखंड डर के साये में जी रहा है.

सुदेश कुमार महतो की ऑल झारखंड स्टूडेंट्स पार्टी यानी आजसू पार्टी ने भाजपा, झामुमो या झाविमो प्रजातांत्रिक की तरह कोई विशेष अभियान यात्रा नहीं निकाली है, लेकिन वह अपने तरीके से पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को मोबिलाइज कर रहे हैं. वह लोगों को बता रहे हैं कि वह सामाजिक असमानता को मिटाना चाहते हैं. सामाजिक न्याय उनकी पार्टी का मूलमंत्र है. वह चाहते हैं कि झारखंड से गरीबी और पिछड़ापन खत्म हो जाये. चूल्हा सम्मेलन, बूथ प्रभारी सम्मेलन कर रहे हैं. वह मां-माटी और भाषा की भी बात कर रहे हैं. लेकिन, किसी खास मुद्दे पर किसी एक पार्टी को घेर रहे हों, ऐसा नहीं है.

अब बात देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की. देश पर सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली इस पार्टी की रणनीति क्या है? चुनावों में वह किसके साथ जायेगी? कौन पार्टी का चेहरा होगा? इसके बारे में कोई स्पष्टता नहीं है.

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