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ranchi

  • Apr 16 2018 8:50AM

झारखंड : 2016 की तुलना में 2017 में रेप के मामले बढ़े, इस साल आयी कमी, जानें आंकड़ा

झारखंड : 2016 की तुलना में 2017 में रेप के मामले बढ़े, इस साल आयी कमी, जानें आंकड़ा
राज्य में महिलाओं पर होने वाले अपराध की समीक्षा में सीआइडी ने किया दावा 
 
रांची  : अपराध अनुसंधान विभाग (सीआइडी) ने राज्य में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध की समीक्षा 13-14 अप्रैल को की. इसमें वर्ष 2017 और 2018 के आंकड़ों की  तुलना के  आधार पर सीआइडी के अधिकारियों ने वर्ष 2018 में रेप की घटनाओं में कमी होने  का  दावा किया है. हालांकि 2016 की तुलना में 2017 में रेप के मामलों में वृद्धि हुई है.   
 
समीक्षा में पाया गया कि राज्य में 2014 में रेप के कुल 1122 केस दर्ज हुए थे. केस दर्ज होने का औसत प्रतिशत प्रतिमाह 93.50 था. वर्ष 2015 में रेप के कुल 1198 केस दर्ज किये गये. प्रतिमाह केस दर्ज होने का औसत प्रतिशत 99.83 रहा. वर्ष 2016 में रेप के कुल 1146 केस दर्ज किये गये.
 
केस दर्ज होने का औसत प्रतिमाह 95.50 रहा. वर्ष 2017 में रेप के 1357 मामले दर्ज किये गये. केस दर्ज होने का औसत प्रतिशत प्रतिमाह 113.08 रहा. वहीं वर्ष 2018 में मार्च माह के अंत तक रेप के कुल  328 केस दर्ज किये गये. केस दर्ज होने का औसत प्रतिशत प्रतिमाह 109.08 रहा.  
 
समीक्षा में यह भी पाया गया कि इस वर्ष मार्च माह तक रांची जिला में रेप के 38 केस दर्ज किये गये. इसमें 37 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. 
 
समीक्षा के बाद पुलिस मुख्यालय द्वारा रविवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड पुलिस महिलाओं की सुरक्षा, जागरूकता एवं सशक्तीकरण के लिए नया अभियान चला रही है. इसके तहत राज्य में 26 महिला फ्रेंडली पुलिस थाना व 26 महिला थाना स्थापित किये गये. 
राज्य के करीब पांच हजार पुलिसकर्मियों को महिलाओं से संबंधित केस को त्वरित और संवेदनशीलता के साथ निबटाने के लिए प्रशिक्षण दिया गया. रांची जिला में 40 प्रशिक्षित महिला कमांडो की तैनाती कॉलेज में छात्राओं की सुरक्षा के लिए  की गयी. झारखंड पुलिस द्वारा महिला सशक्तीकरण एवं सुरक्षा के लिए आरक्षी से लेकर डीएसपी तक के सभी वर्गों में 33% महिलाओं की नियुक्त की जा रही है.
 
सुरक्षा के लिए स्मार्ट फोन का प्रयोग करने वाली महिलाओं की सुविधा के लिए पिछले वर्ष शक्ति एप चालू किया गया है. अभी तक हजारों महिलाएं इस एप का लाभ उठा चुकी हैं. इसके अलावा महिलाओं की समुचित सुरक्षा के लिए ऑपरेशन निर्भीक हम-तुम, महिला हेल्प लाइन नंबर और डायल 100 आदि की सुविधा है.
 

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