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ranchi

  • Jan 12 2019 12:37AM

रांची : इको सेंसेटिव जोन से एक किमी बाहर माइनिंग की अनुमति मांगेगी सरकार

रांची : इको सेंसेटिव जोन से एक किमी बाहर माइनिंग की अनुमति मांगेगी सरकार
मनोज सिंह, रांची : 
राज्य सरकार भारत सरकार को पत्र लिखकर आठ वन्य आश्रयणियों और राष्ट्रीय पार्क के एक किलोमीटर के बाद पांच प्रकार की गतिविधियों के संचालन की अनुमति देने का आग्रह करेगी. इसमें कॉमर्शियल माइनिंग, बड़ा हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट, खतरनाक  पदार्थ के उत्पादन और उपयोग पर रोक, ईंट भट्ठा व प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को रेगुलेटेड (विनियमित) श्रेणी में शामिल करने का आग्रह करेगी.
 
रेगुलेटड श्रेणी में आने से इन उद्योगों के संचालन के लिए सरकार शर्तों के आधार पर अनुमति दे सकती है.  इसमें कहा गया है कि इस मामले में किसी भी तरह का आग्रह राज्य सरकार मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के माध्यम से ही करेगी. राज्य में आठ वन्य आश्रणियों और वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को इको सेंसेटिव जोन में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है. 
 
 मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली बैठक में खान विभाग ने जानकारी दी थी कि 22 फरवरी 2018 को वन विभाग ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है. इसमें आठ राष्ट्रीय पार्क और वन्य आश्रयणियों को इको सेंसेटिव जोन में शामिल करने की बात कही गयी है. इसके लिए लोगों व संस्थाओं से आपत्ति मांगी गयी थी. इसका फाइनल नोटिफिकेशन अभी जारी नहीं हुआ है.
 
इसके बावजूद कई वन अधिकारियों ने अपने-अपने स्तर से निर्देश जारी कर दिया है. इस कारण खनन का काम पूरी तरह रोक दिया गया है. वन विभाग ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार ने कहा कि जब तक अंतिम ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी नहीं हो जाता है, तब तक इको सेंसेटिव जोन के प्रस्तावित एरिया में बिना नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ (एनबीडब्ल्यूएल) की अनुमति के खनन कार्य नहीं हो सकता है.
 
वन विभाग ने कहा कि एक वन्य आश्रयणियों को इको सेंसेटिव जोन घोषित कर दिया गया है. बाकी का ड्राफ्ट प्रकाशित है. चार इको सेसेंटिव जोन पर कोई आपत्ति नहीं आयी है. चार के लिए जो आपत्ति आयी है, उस पर विचार किया जा रहा है. 

तीन श्रेणी में बांटा गया है उद्योगों को 
वन विभाग ने जानकारी दी कि भारत सरकार के मंत्रालय ने इको सेंसेटिव जोन वाले एरिया में होनेवाले कार्यों को तीन श्रेणी में बांटा है. इसमें पूर्णत: प्रतिबंधित, रेगुलेटेड (शर्तों के साथ अनुमति) और अनुमति देने वाली श्रेणी में रखा है. वर्तमान में प्रतिबंधित श्रेणी वाले किसी भी उद्योग को एसबीडब्ल्यूएल से कोई अनुमति नहीं मिली है.

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