ranchi

  • Jan 18 2020 7:36AM
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हो गयी देर! सरकारी मदद से पहले एतु के दरवाजे पर पहुंच गयी मौत, पढ़ें पूरा मामला

हो गयी देर! सरकारी मदद से पहले एतु के दरवाजे पर पहुंच गयी मौत, पढ़ें पूरा मामला
हो गयी देर : प्रभात खबर में छपी खबर पर सीएम ने लिया था संज्ञान ट्वीट कर चतरा के डीसी को दिया था एतु का इलाज कराने का निर्देश 
रांची/कुंदा : चतरा की कुंदा पंचायत के गांव टिकैतबांध का 55 वर्षीय एतु गंझू तीन माह से बीमार था. चारपाई पर लेटे-लेटे वह मौत की दुआ मांग रहा था. 17 जनवरी को प्रभात खबर ने इस खबर प्रमुखता से प्रकाशित िकया. उम्मीद के मुताबिक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस पर संज्ञान लिया. उन्होंने शुक्रवार शाम चार बजे ट्वीट कर चतरा के उपायुक्त को निर्देश दिया कि वे एतु गंझू के इलाज की समुचित व्यवस्था करें और उन्हें सूचित करें. उपायुक्त इस निर्देश पर अमल करते, उससे पहले ही एतु गंझू चल बसा. 
      
गौरतलब है कि  तीन महीने से बीमार एतु गंझू झोलाछाप डॉक्टर से अपना इलाज करा रहा था. उसकी माली हालत ऐसी नहीं थी कि वह शहर जा कर इलाज करा सके. वहीं गांव में ढंग की सड़क भी नहीं है, जिसके चलते उसे किसी वाहन से सरकारी अस्पताल तक पहुंचाना भी संभव नहीं था. सरकारी चिकित्सा व्यवस्था उस तक नहीं पहुंच सकी.
 
ग्रामीणों ने एतु के बीमार होने की सूचना चिकित्सा प्रभारी अरुणोदय कुमार, सहिया मुन्नी देवी व मुखिया रेखा देवी दी थी. इसके बावजूद उसे कोई सरकारी सहायता नहीं मिली और अाखिरकार एतु ने इस निर्दयी दुनिया को अलविदा कह दिया. एतु की पत्नी गुजरी देवी और बेटी रूणा देवी शव से लिपटकर घंटों रोती रहीं. पास में खड़ा एतु का बेटा विनय अपनी किस्मत को कोस रहा था. गुजरी बार-बार एक ही बात दोहरा रही थी : हथवा में पइसा रहतलियव त... मरे नाही देतलियव विनय के बप्पा..., एतना गरीबी रहले पर भी कोई ध्यान नाही देलकव... 
 
सरकारी सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी : डायरेक्टर 
एतु गंझू की मौत के बाद डीआरडीए डायरेक्टर अरुण कुमार एक्का और स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम गांव पहुंची. टीम के सदस्य मृतक के परिवार से मिले. डीआरडीए डायरेक्टर ने एतु के परिवार को सरकारी सुविधा उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया. बीडीओ श्रवण राम ने मौत के कारण की जानकारी ली. साथ ही तत्काल दो हजार रुपये एतु की पत्नी को दिये. उन्होंने विधवा पेंशन व पारिवारिक योजना का लाभ देने का आश्वासन भी दिया. पदाधिकारियों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल चतरा भेज दिया.
 
सिविल सर्जन का दावा : कितना सच, कितना झूठ 
इधर इस मामले के प्रकाश में आने के बाद सिविल सर्जन डॉ अरुण कुमार पासवान ने दावा किया है कि एतु का इलाज चल रहा था. उसे दवा भी दी गयी थी. लेकिन वह नियमित दवा का सेवन नहीं कर रहा था. यही वजह है कि बीमारी बढ़ती गयी. लेकिन एतु के परिवार ने साफ कहा था कि उसे सरकारी व्यवस्था से कोई मदद नहीं मिल रही थी. इलाके के सरकारी चिकित्सक ने एक दिन पहले ही अपने बयान में कहा था कि उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि एतु को हुआ क्या था.
 
झालसा ने लिया संज्ञान, 25 हजार रुपये िदये 
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव कुमार क्रांति प्रसाद ने बताया कि एतु गंझु की मौत के मामले को झारखंड स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (झालसा) के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस एचसी मिश्र ने गंभीरता से लिया. उनके िनर्देश पर तत्काल कॉस्ट फंड से 25 हजार का चेक एतु गंझू की पत्नी को साैंपा गया. साथ ही विधवा पेंशन, आवास योजना, खाद्य सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा सहित अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने का निर्देश दिया गया. उनके बच्चों को स्किल डेवलपमेंट का लाभ दिलाने को कहा गया है. डीएलएसए को फॉलोअप रिपोर्ट देने का भी निर्देश दिया गया है. 
 
उपायुक्त ने ट्वीट कर सीएम को दी जानकारी 
चतरा  के उपायुक्त जितेंद्र कुमार सिंह ने शुक्रवार शाम 6:35 बजे ट्वीट कर  मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि एतु गंझू की मौत के मामले की जांच के लिए तीन  सदस्यीय कमेटी बनायी गयी है. वह पिछले पांच-छह माह से बीमार था और लगातार  उसका इलाज किया जा रहा था. पूर्व में दो बार टीबी जैसी बीमारी को भी उसने  मात दी थी, लेकिन दुर्भाग्यवश उसकी मृत्यु हो गयी.
 
 
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