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ranchi

  • Aug 25 2019 10:17PM
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अरुण जेटली को सरयू राय की श्रद्धांजलि- अदभुत मेधा, प्रखर वक्ता, दोस्त परस्त इंसान को आखिरी सलाम

अरुण जेटली को सरयू राय की श्रद्धांजलि- अदभुत मेधा, प्रखर वक्ता, दोस्त परस्त इंसान को आखिरी सलाम

।। सरयू राय ।। 

अरुण जेटली जिस सम्मान के हकदार थे, मरणोपरांत वह सम्मान देश ने उन्हें दिया. राजनीति, प्रशासन, पत्रकारिता, विधि क्षेत्र, क्रिकेट जगत के धुरंधरों ने, जिनमें उनके आलोचक भी शामिल हैं, वैचारिक परिधि लांघकर उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को सराहा. उनके साथ के निजी एवं सार्वजनिक संस्मरणों को उद्घाटित किया. स्नेहिल उद्गारों के माध्यम से उनके व्यक्तित्व की विविधताओं को उजागर किया. 

 

भारतीय जनता पार्टी में और पार्टी से बाहर उनके मुरीदों की बड़ी संख्या है. जिन्होंने उन्हें अवसर दिया और अनुकूल- प्रतिकूल परिस्थितियों में उनके साथ खड़े रहे. उनकी संख्या तो अंगुली पर गिनने लायक है. पर विविध क्षेत्रों में उन्होंने जिन्हें प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से बढ़ाया, संभाला, आगे आने का अवसर प्रदान किया उनकी फेहरिस्त लंबी है. 

 

अरुण जी व्यक्तियों, वस्तुओं और परिस्थितियों के पारखी थे. संपर्क में आनेवालों को गुण-अवगुण, खूबियों-खामियों, विशेषताओं- सीमाओं समेत स्वीकारते थे. उनके हास्ययुक्त और परिहासमुक्त वार्तालाप अथवा गप गोष्ठी के दौरान खिंचाई का पात्र भी आनंद की अनुभूति कराता था, अवसाद का नहीं. वार्तालाप के दौरान समय मानो ठहर जाता था. कितना फेंका गया, कौन लपेटा गया, क्या समेटा गया, इस पर ध्यान देने की फुर्सत नहीं रहती थी. 

 

वे सूचनाओं के भंडार थे. अंग्रेजी में कहावत है - इनफॉर्मेशन इज पावर, यानी सूचना शक्ति है. अंग्रेजी की ही एक कहावत है- सक्सेस हैज मेनी फादर्स बट फेल्युइज आर ऑर्फन. यानी सफलता के अनेक बाप होते हैं पर असफलता टुअर होती है. यह वस्तुस्थिति उस समय मेरे समक्ष भी थी. जब मैं 2009 में विधानसभा चुनाव बहुत कम अंतर से हार गया था. 

 

उस समय जब भी मेरी भेंट बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से होती थी, वे कहते थे कि बिहार चले जाइये़. इस बीच अरुण जी एक कार्यक्रम के सिलसिले में पटना में थे. मैं उनसे मिलने गया. अनौपचारिक माहौल में बातचीत चलने लगी. गप गोष्ठी परवान चढ़ी तो वे अचानक मेरी ओर मुखातिब हुए़ मुझसे पूछा, किसने आपको झारखंड जाने के लिये कहा था. 

 

नीतीश की बात क्यों नहीं मान लेते. ऐसा लगा मानो मेरे चुनाव हार जाने और नीतीश जी द्वारा मुझे कही गयी बात की उन्हें पूरी सूचना है.इसी प्रकार एक वाकया संसद भवन के सेंट्रल हॉल का है. अरुण जी संसद चलते समय दिन में एकाध बार सेंट्रल हॉल में जरूर बैठते थे. वे जहां बैठते वहां पत्रकारों, सांसदों की भीड़ लग जाती थी. 

 

अरुण जी जिज्ञासाओं का समाधान भी करते थे़ औरों की सुनते भी थे. मैंने उन्हें देखा तो सोचा जाकर नमस्कार कर लू़ं उन्होंने बिठाया. वार्तालाप के दौरान अचानक मेरी ओर मुखातिब हुए और पूछ बैठे कि राय साहब आपके दो घनिष्ठ मित्र हैं और दोनों ही मेरे पीछे पड़े रहते हैं. भौंचक होकर मैंने पूछा कि ऐसे कौन मेरे मित्र हो सकते हैं. उन्होंने तपाक से कहा. एक गोविंदाचार्य और दूसरे सुब्रमण्यम स्वामी. 

 

मुझे तो सबके बीच मानो काठ मार गया. मैंने विनम्रता से कहा कि सुब्रमण्यम स्वामी निहायत स्वतंत्र विचारों के व्यक्ति हैं. उनके और आपके बीच साबूत बच जाने की स्थिति मेरी नहीं है. जहां तक गोविंद जी की बात है, तो वे मेरे मित्र नहीं बल्कि मेंटर रहे हैं और एक हद तक आपके भी रहे हैं. आप इन दोनों को मेरा मित्र बता कर नाहक मेरा स्तर ऊंचा कर रहे हैं. 

 

मैं सेंट्रल हॉल से झारखंड भवन के रास्ते में था कि उनका फोन आया. उन्होंने कहा कि नॉर्थ ब्‍लॉक के मेरे ऑफिस में आ जाइए. उनके कहे अनुसार मैं नॉर्थ ब्लॉक स्थित वित्र मंत्री के ऑफिस पहुंचा, तो उन्होंने कहा कि सबके बीच ऐसा कहने के प्रति मेरा कोई उद्देश्य नहीं था. एक ऐसे व्यक्तित्व का असमय उठ जाना मेरे लिये निजी आघात है. देश, पार्टी, सरकार के लिये भी यह अपूरणीय क्षति है. अदभुत मेधा, प्रखर वक्ता, अप्रतिम सिद्धांत निष्ठ, दोस्त परस्त इंसान को आखिरी सलाम. 

 

इिवंगत भाजपा नेता अरुण जेटली पर यह संस्‍मरण सरयू राय का है. श्री राय वर्तमान झारखंड सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री हैं. 

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