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politics

  • Jan 13 2019 6:52AM

23 साल पुरानी शत्रुता भुला सपा-बसपा आये साथ, जानें गठबंधन की बड़ी चुनौतियों के बारे में

23 साल पुरानी शत्रुता भुला सपा-बसपा आये साथ, जानें गठबंधन की बड़ी चुनौतियों के बारे में
लखनऊ : कभी नदी के दो तट मानी जाने वाली सपा और बसपा ने आगामी लोस चुनाव में भाजपा को मात देने के लिए शनिवार को 23 साल पुरानी शत्रुता को भुलाते हुए एक-दूसरे से हाथ मिलाया. बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके लोकसभा चुनाव 2019 के लिए गठबंधन की घोषणा की.

मायावती ने कहा कि यह गठबंधन पीएम मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह यानी गुरु-चेले की नींद उड़ाने वाला है. उन्होंने कहा कि जनहित ‘स्टेट गेस्ट हाउस कांड’ से ऊपर है, इसलिए मैंने उसे भुलाकर सपा के साथ गठबंधन का फैसला किया है. मायावती ने बताया कि सपा-बसपा के बीच सीटों को लेकर भी समझौता हो गया है और दोनों पार्टियां 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. दो-दो सीट सहयोगी पार्टी और कांग्रेस के लिए छोड़ दिया गया है.आइए जानते हैं कुछ खास बातें...

 
 
क्यों आये साथ 
2018 में हुए गोरखपुर, फूलपुर और कैराना उपचुनावों में सपा-बसपा गठबंधन की जीत
2014 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन और भाजपा के बीच कुल वोट शेयर में 0.8 का अंतर
2014 में किसको कितने वोट
 
19.6% बसपा
22.2% सपा
1.0% अपना दल
42.6% भाजपा 
 
जातीय समीकरण
 
22 प्रतिशत दलित मतदाता
14% जाटव
08%   पासी, धोबी, खटीक,   वाल्मीकि, मुसहर   समेत 60 जातियां
19%  मुस्लिम
21%  सवर्ण
45% ओबीसी आबादी
10% यादव
05% कुर्मी
05% मौर्य
04% लोधी
02% जाट
19% मल्लाह लोहार, बिंद राजभर, निषाद, कहार सहित 100 से ज्यादा उपजातियां
 
गठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती 
 
सपा और बसपा को गैर यादव ओबीसी और गैर जाटव दलित को अपने साथ लाने की चुनौती होगी, जो 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ चले गये थे. 2014 के चुनाव में सपा को करीब 22% और बसपा को 20% मत मिले थे. दोनों को करीब 42 % वोट मिले थे, वहीं 2017 के विस चुनाव में सपा-बसपा को 22-22% वोट हासिल हुए थे.
 
यूपी उप-चुनावों के नतीजे 2014 2018 में
 
गोरखपुर
भाजपा  51.8 47.0
सपा+बसपा  38.7 49.3
 
फुलपुर
भाजपा  52.4 39
सपा+बसपा  37.4 47.1
 
कैराना
भाजपा  50.6 46.7
सपा+बसपा  47.5 51.5
(आंकड़े वोट % में) 
 
तीनों उपचुनावों में सपा-बसपा गठबंधन को मिली थी जीत.
 
गठबंधन पर बोले नेता
 
आगामी लोकसभा चुनावों से पहले बने सपा और बसपा के गठबंधन का मैं स्वागत करती हूं. 
ममता बनर्जी
 
यह गठबंधन बेमेल है. केवल सत्ता पाने के लिए किया गया है, जो 2019 में सफल नहीं हो पायेगा. 
रामदास आठवले
 
महागठबंधन अराजकता, भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता लेकर आयेगा. 
योगी आदित्यनाथ
 
हमारा मुख्य उद्देश्य भाजपा को हराना है, जिसके लिए सबको साथ आना है. समर्पण भी है, त्याग भी है. 
अजित सिंह
 

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