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patna

  • May 12 2016 6:53AM

ढूंढ़ने से भी जिले में नहीं मिल रहे कैथी लिपि के अनुवादक

अनुवादकों की कमी के कारण जिला निबंधन कार्यालय में लोगों को हाे रही काफी परेशानी
पटना : मीठापुर निवासी उमेश पिछले कुछ दिनों से अनुवादक की तलाश में थे. जिस जमीन की वे रजिस्ट्री कराना चाह रहे थे, उसका खतियान कैथी में लिखा था. इससे वे जमीन की पूरी डिटेल  नहीं ले पा रहे थे. बड़ी मुश्किल से एक अनुवादक मिला जिससे वे खतियान का हिंदी अनुवाद करा सके. 
 
इस तरह की समस्या झेलने वाले उमेश अकेले नहीं हैं. ऐसे हजारों लोग हैं जो कैथी, फारसी और उर्दू के दस्तावेजों का अनुवाद कराने के लिए अनुवादक की तलाश में परेशान हो रहे हैं. जिला निबंधन कार्यालय में वर्षों पुराने दस्तावेज है, जो कैथी और उर्दू में लिखे हैं. आज उन दस्तावेजों काे हिंदी करने वाला अनुवादक ढूंढ़ने से भी नहीं मिल रहा है. 
 
इससे उन दस्तावेजों की जानकारी जुटाना लोगों के लिए बहुत मुश्किल साबित हो रहा है. जिला निबंधन कार्यालय में 1795 से लेकर कई पुराने दस्तावेज अब भी रिकाॅर्ड रूम में रखे हैं. इनमें लाखाें दस्तावेज ऐसे हैं, जो कैथी, उर्दू और महाजनी में लिखे हैं. ऐसे में  जब उनसे संबंधित जमीन की रजिस्ट्री की जाती है, तो उन दस्तावेजों के अनुवादक तलाश की जाती है. पर, अनुवादक नहीं होने से लोगों को परेशानी हो रही है. 
 
निकाला जाता है ब्याेरा
 
किसी भी जमीन का पूरा ब्योरा खतियान से निकाला जा सकता है. वह खतियान जिला निबंधन कार्यालय के रिकॉर्ड रूम में होता है. जब जमीन की खरीद पर संदर्भ यानी टाइटल लिखा जाता है, तो उस जमीन का पूरा डिटेल दर्ज किया जाता है. यानी जमीन कब किसके नाम रही अौर कब-कब कितना हिस्सा बिक्री  किया गया है. इन सारी बातों की जानकारी खातियान से ली जाती है.
 
एकमात्र हबीबुल हसन हैं कैथी के जानकार
 
जिला निबंधन कार्यालय में वर्ष 2009 से सेवानिवृत्त हबीबुल हसन, जिनकी नियुक्ति   कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर ‘मे आई हेल्प यू काउंटर’ के लिए की गयी थी, कैथी के एकमात्र जानकार हैं. अब वे बुजुर्ग हो गये हैं. वे पूर्व में जिला निबंधन कार्यालय में उर्दू और कैथी के अनुवादक के रूप में सेवा देते रहे. यहां तक की दूर-दूर से लोग इनकी तलाश करते हुए कार्यालय पहुंचते और अनुवाद भी कराते थे. 
 
कैथी के अनुवादकों की कमी है. पूर्व में, इन भाषाओं के जो जानकार हुआ करते थे, अब उनके नहीं रहने से लोगों को परेशानी हो रही है. साथ ही सरकार की ओर से इन भाषाआें की ट्रेनिंग की व्यवस्था नहीं की गयी है.  
 
ब्रह्मानंद सिंह, अध्यक्ष, बिहार दस्तावेज नवीस संघ 
 
रोज चार से पांच दस्तावेज कैथी और उर्दू के आते हैं. इनका अनुवाद करने की मांग की जाती है. पूर्व में जिला निबंधन कार्यालय में कांट्रेक्ट की सेवा के दौरान लोगों को सहूलियत हुआ करती थी. लेकिन अब उम्र साथ नहीं दे रही है.  
 
हबीबुल हसन, कैथी जानकार
 
यह है परेशानी
 
जमीन की नहीं मिल पाती है पूरी जानकारी
जमीन सही है या गलत इस बात की जानकारी खतियान से मिलती है
पूर्व में जमीन किसकी थी, किसने किसको कैसे बेचा ये सारी बातें खतियान में दर्ज होती हैं 
खतियान का जब तक हिंदी  अनुवाद नहीं हो पायेगा, तब तक रजिस्ट्री के दौरान टाइटल में वह सारी बातें नहीं भरी जा सकेंगी
 

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