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  • Sep 12 2019 5:07AM
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पटना : पूर्व स्पीकर सदानंद से हाइकोर्ट ने पूछा क्यों न आपकी बेल खारिज कर दें ?

पटना : पूर्व स्पीकर सदानंद से हाइकोर्ट ने पूछा क्यों न आपकी बेल खारिज कर दें ?
बिना कोर्ट की अनुमति के वे विदेश कैसे चले गये
पटना : पटना हाइकोर्ट ने  बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह की मुश्किलें एक बार फिर  बढ़ा दी है. हाइकोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी कर पूछा है कि बिना कोर्ट की अनुमति के वे विदेश कैसे चले गये? 
 
कोर्ट ने उनसे पूछा है कि क्यों नहीं आपकी अग्रिम जमानत खारिज कर दी जाये. किसी भी अभियुक्त को कोर्ट अग्रिम जमानत  उसी शर्त पर देता है, जिसमें अभियुक्त देश छोड़कर बाहर नहीं जायेगा. फिलहाल निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने कांग्रेसी नेता सदानंद सिंह सहित 41 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया है.
 
इस प्रकार से उनकी मुश्किलें बढती जा रही है. न्यायाधीश राजेंद्र कुमार मिश्रा की एकलपीठ ने अधिवक्ता दिवाकर यादव की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस जारी किया है. याचिकाकर्ता ने कहा कि वे भी पूर्व अध्यक्ष के सताये हुए हैं. मेधावी छात्र होते हुए भी उन्हें विधानसभा सचिवालय में नौकरी के लिए नहीं चुना गया. मालूम हो कि हाइकोर्ट की एकलपीठ ने 2011 में ही पूर्व विधानसभा अध्यक्ष को शर्तों के आधार पर अग्रिम जमानत दी थी. 
 
उनसे कहा गया था वे अदालत के अनुमति के बिना विदेश नहीं जायेंगे. जबकि, सदानंद सिंह वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष की अगुवाई वाली टीम में शामिल होकर मॉरीशस गये और वहां से घूम कर आये. कोर्ट को बताया गया कि बिना उसकी अनुमति के उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिये था. सदानंद सिंह द्वारा कोर्ट के बिना अनुमति के विदेश जाने पर  उनकी जमानत रद्द कराने की याचिका हाइकोर्ट में दायर की है.
 
41 लोगों पर आरोपपत्र दायर
 
मालूम हो  कि साल  2000 से लेकर 2005 के बीच सदानंद सिंह विधानसभा अध्यक्ष थे. उनके कार्यकाल में विधानसभा सचिवालय में कई पदों पर नियुक्ति हुई थी. जिसमें सभा सचिवालय के उच्चाधिकारियों ने अपने सगे-संबंधियों को ही नियुक्त कर लिया था. निगरानी ब्यूरो ने श्री सिंह समेत 41 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र  दायर की है.
 
फार्मासिस्ट के फर्जी निबंधन पर जवाब तलब
 
पटना : सूबे में फार्मासिस्टों के किये जा रहे फर्जी निबंधन के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव व निदेशक प्रमुख से चार सप्ताह में जवाब तलब किया है. न्यायमूर्ति शिवाजी पांडेय व न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने मुकेश कुमार की ओर से दायर  जनहित याचिका पर सुनवाई करते  हुए राज्य सरकार से चार हफ्ते में इस पर विस्तृत जवाब मांगा है. 
 
कोर्ट ने जानना चाहा है कि  राज्य  फार्मासिस्ट काउंसिल  की तरफ से अवैध/फर्जी निबंधन किये जाने के मामले उसके द्वारा अब तक क्या कार्रवाई की गयी है? याचिकाकर्ता  की ओर से  कोर्ट को बताया गया की राज्य में करीब 23 हजार से अधिक निबंधित फार्मासिस्ट है. इतने बड़े तादाद में  निबंधन होने का कारण है कि  बिहार राज्य फार्मासिस्ट काउंसिल सर्टिफिकेट की जांच किये बगैर आनन-फानन में अयोग्य लोगों का निबंधन कर रही है. 
 
वहीं, केंद्रीय जांच समिति ने अपनी  रिपोर्ट में केवल चार हजार फार्मासिस्ट को ही सही प्रमाणपत्र के साथ योग्य पाया है. राज्य में बड़े पैमाने पर फार्मासिस्टों का  फर्जी/अवैध निबंधन होने का दूसरा कारण है कि केंद्र सरकार ने 2015 में  फार्मासिस्ट के लिए जो नियमावली बनायी उसे राज्य सरकार लागू नहीं कर पायी है. हाइकोर्ट ने इस मामले में भी राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी.
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