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  • Sep 11 2019 8:37AM
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पटना : बिना वकील तुरंत न्याय दे रहीं स्थायी लोक अदालतें

पटना : बिना वकील तुरंत न्याय दे रहीं स्थायी लोक अदालतें

अनुज शर्मा

दूर हो रही परेशानी : नौ जिलों में स्थायी लोक अदालतें शुरू, 29 जिलों में जल्द स्थापित की जायेंगी

पटना : आपके मोहल्ले में सफाई नहीं हो रही या दफ्तर जाते समय जाम से परेशान हैं.  स्कूल,  बिजली या बीमा कंपनी मनमानी कर रहे हैं. अस्पताल भी इलाज ठीक से  नहीं कर रहा, ऐसी किसी भी समस्या के लिए कोर्ट-कचहरी या सरकारी अॉफिसों  के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है.  ऐसे मामलों में शीघ्र न्याय के लिए स्थायी लोक अदालत (जन उपयोगी सेवाएं) का दरवाजा खटखटाइये. राज्य में पटना, पूर्णिया, दरभंगा, भागलपुर, गया, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, सहरसा, सारण में ये अदालतें काम करने लगी हैं.  बचे हुए 29  जिलों में इनको स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है. अभी जिस कमिश्नरी या जिला में ये अदालतें काम कर रही हैं, उस कमिश्नरी क्षेत्र के लोग समस्या, शिकायत या जनहित के मुद्दा काे लेकर आवेदन कर सकते हैं.

इन अदालतों में जाने के लिए न तो वकील की जरूरत है और नहीं किसी भी प्रकार के शुल्क या कोर्ट फीस की.  अच्छी बात यह है कि यदि मामले का निबटारा  सेटलमेंट से नहीं होता तो अदालत अपना आदेश पारित करती है. अवार्ड पास होने के पश्चात वह न्यायालय की डिक्री की तरह ही संबंधित पक्षों पर अनिवार्य रूप से लागू कराया जाता है. 

इनसे जुड़ी है समस्या, तो खटखटाएं दरवाजा 

अस्पताल -औषधालय से जुड़ी 

सेवाएं, स्कूल- कॉलेज (शिक्षा), हाउसिंग एंड रियल स्टेट ,  बीमा,  हवाई, सड़क व पानी से जुड़ी परिवहन सेवाएं, डाक, टेलीग्राफ,  टेलीफोन सेवाएं, किसी प्रतिष्ठान  द्वारा जनता को बिजली प्रकाश या पानी की आपूर्ति सेवाएं,  लोक वातावरण, सफाई तंत्र.

महीनों की समस्या का चंद दिनाें में समाधान

स्थायी लोक अदालत (जन उपयोगी सेवाएं) पटना ने आदेश दिया है 

कि पटना नगर निगम के अंतर्गत पड़ने वाले विद्युत शवदाह गृह बांसघाट, गुलबी घाट व खांजेकला को अविलंब चालू करें, ताकि भविष्य में हिन्दू धर्म संस्कार की रक्षा हो सके. वायु जल प्रदूषित नहीं हो तथा गंगा के पानी को  निर्मल रखा जा सके.  यह आदेश उस व्यक्ति की अपील पर आयी है जिसने महीनों तक कई अॉफिसों के चक्कर काटने के बाद स्थायी लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया था. 

राज्य में अभी नौ स्थायी लोक अदालत (जन उपयोगी सेवाएं) काम कर रही हैं. सभी जिलों में इनकी स्थापना होनी है.  आवेदन पर त्वरित निर्णय दिया जाता है. इसकी डिक्री सभी कोर्ट में मान्य है. लोगों से आग्रह है कि वह जन उपयोगी सुविधाओं से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए इनका अधिक से अधिक लाभ उठाएं.   

सुनील दत्त मिश्रा, सचिव, बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार  

 
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