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patna

  • Nov 9 2018 7:29AM

निवेश आयुक्त सह बियाडा के एमडी बोले- बिहार के पिछड़ेपन को नौकरशाह सामूहिक रूप से हैं जिम्मेदार

निवेश आयुक्त सह बियाडा के एमडी बोले- बिहार के पिछड़ेपन को नौकरशाह सामूहिक रूप से हैं जिम्मेदार
पटना : बिहार के पिछड़ेपन के लिए नौकरशाह सामूहिक रूप से जिम्मेदार हैं. बिहार कैबिनेट ने मार्च 2018 में निर्णय लिया कि राज्य के सभी रुग्ण प्राधिकरण अपनी जमीन बियाडा को सौंप देंगी. बियाडा इसे औद्योगिक इकाइयों को बेचकर रुपये सरकारी खजाने में जमा कर देगा.
 
इसके बावजूद अब तक किसी भी रुग्ण प्राधिकरण की जमीन बियाडा को नहीं मिली. जमीन की कमी के कारण राज्य का औद्योगिक विकास रुक गया है. यदि ऐसा ही रहा तो बियाडा को बंद करना पड़ सकता है. ये बातें निवेश आयुक्त सह बियाडा के एमडी आरएस श्रीवास्तव ने कहीं. 
 
वे गुरुवार को मुंबई से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे. श्रीवास्तव ने कहा कि अप्रैल से सितंबर 2018 का राज्य में औद्योगिक निवेश का आंकड़ा चिंताजनक है. इस समयावधि में केवल 288 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है और 26 नयी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना हुई है. चिंता की बात यह है कि इस समय करीब 2000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव जमीन के इंतजार में है. इसमें आईटीसी जैसी कंपनियां शामिल हैं. 
 
250 करोड़ का निवेश बिहार के बाहर चला गया
 
निवेश आयुक्त ने कहा कि करीब दो महीने पहले प्रिया गोल्ड का बिहार में 250 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव आया था. यह कंपनी बिहटा में करीब 15 एकड़ जमीन चाहती थी, लेकिन समय पर जमीन नहीं देने के कारण इस कंपनी ने ओडिशा में निवेश कर दिया. उन्होंने कहा कि सर्विस और नॉन प्रायोरिटी सेक्टर को जमीन आवंटन का बियाडा को अधिकार नहीं है. जबकि, इन दोनों सेक्टर में इन दिनों तेजी से निवेश हो रहा है. 
 
ऐसे में उन्होंने बिहार औद्योगिक नीति 2016 में सुधार का प्रस्ताव सरकार को भेजा है. बियाडा एक्ट में भी संशोधन किया जायेगा. निवेश आयुक्त ने कहा कि बिहार राज्य सुगर कॉरपोरेशन के पास करीब 2600 एकड़ जमीन पड़ी है. अन्य विभागों की भी सैकड़ों एकड़ जमीन है, जो बियाडा को मिलती तो उस पर उद्योग स्थापित किये जा सकते थे. 
 
उन्होंने कहा कि इस समय बियाडा के पास करीब 116 एकड़ जमीन है. यह राज्य के 52 इंडस्ट्रियल एरिया में छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटी है. वहीं करीब 2500 एकड़ से अधिक जमीन कानूनी विवादों में फंसी है. अब लंबी लड़ाई उपयोगी साबित नहीं होने के कारण बियाडा एक्जिट पॉलिसी बनाने पर विचार कर रही है. इसके लिए बोर्ड की बैठक 16 नवंबर को होगी.
 

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