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patna

  • Oct 3 2017 7:29AM
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बिहार संग्रहालय : इतना सुंदर बना है कि देखनेवाले विरोध करना भूल जायेंगे : सीएम

बिहार संग्रहालय : इतना सुंदर बना है कि देखनेवाले विरोध करना भूल जायेंगे : सीएम
मुख्यमंत्री ने बिहार संग्रहालय की कला दीर्घाओं का किया उद्घाटन
पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि कई तरह के विरोध के बावजूद पूरी भव्यता के साथ बिहार संग्रहालय बनकर तैयार हो गया. 
इसे लेकर पटना हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाएं (पीआईएल)  दायर हुईं. कोर्ट में यह कहा गया कि इस पर फिजूल पैसा खर्च हो रहा है. कोर्ट ने इसे लेकर कई दिशा-निर्देश दिये. यह इतना सुंदर बना है कि इसे देखनेवाले विरोध करना भूल जायेंगे. हालांकि, कुछ काम बाकी है. 
उसे पूरा होते ही कोर्ट के दिशा-निर्देश कहीं टगवाऊंगा, जिसे देख कर लोग जान सकेंगे कि इसे बनवाने में कितनी परेशानी झेलनी पड़ी. वे सोमवार को बिहार संग्रहालय की कला दीर्घाओं के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे. 
 
उन्होंने कहा कि साल 2013 में जब इसका निर्माण शुरू हुआ तब से बहुत सारी अड़चनें आईं. प्रदेश का इतिहास व कला ही हमारी पूंजी है. इसे जानने के बाद ही सुनहरे भविष्य के बारे में काम किया जा सकता है. हमें विरासत में जो चीजें मिलीं, उसे सहेजने के लिए उच्च तकनीकी क्षमतावाले एक संग्रहालय की आवश्यकता थी. यह विश्वस्तरीय संग्रहालय है. 
 
इसे बनवाने में करीब 517 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. यहां देश-विदेश के लोग आयेंगे और पर्यटन का विकास होगा. इसे बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोगों से सलाह ली गयी. कनाडा की टीम का चयन किया गया, जिसने संग्रहालय निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. एक ज्यूरी बनायी गयी, जिसने मॉडल का चयन किया. 
 
कार्यक्रम में हाईकोर्ट के जज केके मंडल, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, कला संस्कृति व युवा विभाग के मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि, शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, भवन निर्माण मंत्री महेश्वर हजारी, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, विधायक श्याम रजक और विधान पार्षद राम वचन राय सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.
 
गौरव को फिर से प्राप्त करना मकसद, मनोरंजन के साथ शिक्षा
 
बिहार के इतिहास को याद करते हुए सीएम ने कहा कि भगवान महावीर का जन्म भी यहीं हुआ. महात्मा बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति भी यहीं हुई, गुरु गोविंद सिंह की जन्मस्थली  भी यहीं है. यहां विश्व प्रसिद्ध नालंदा, विक्रमशिला और तेलहाड़ा के विवि थे. 
 
शून्य का आविष्कार यहीं हुआ. आज भी बोधगया, पावापुरी, राजगीर और पाटलिपुत्र आदि में हमारे धरोहर हैं. इस तरह प्रदेश का गौरवशाली इतिहास रहा है. इन सबका मकसद फिर से उसी गौरव को प्राप्त करना है. 
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संग्रहालय में घूमने से मनोरंजन के साथ बच्चों को अपने इतिहास की जानकारी भी मिलेगी. बच्चों के लिए बाल दीर्घा का उद्घाटन 2015 में ही किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि साल 2000 में वे सांसद थे. इसी साल बिहार का बंटवारा हुआ व झारखंड अलग होने के बाद बिहार के लोग दुखी दिखते थे. लोगों का कहना था कि हमारे यहां खान और खदान नहीं हैं. 
 
इसके बाद बिहार का मुख्यमंत्री बनने के बाद मैंने कहा कि हमारे पास संस्कृति व इतिहास है. यही हमारा गौरव है. उस समय प्रदेश का बजट करीब 26 हजार करोड़ का था, जो अब बढ़ कर एक लाख 60 हजार करोड़ का हो गया है. प्रदेश में ऐसे विकास हो रहा है.
 
पटना संग्रहालय में जगह की कमी
 
सीएम ने कहा कि छात्र जीवन में वे पटना संग्रहालय घूमने जाया करते थे. वहां बड़ी संख्या में ऐतिहासिक धरोहरों का संग्रह है. हालांकि, जगह की कमी के कारण एक ही कमरे में पचास मूर्तियां रखी रहती थीं. ऐसे में उनकी खासियत की जानकारी नहीं मिल सकती थी. इसलिए उनके प्रदर्शन के लिए दूसरा संग्रहालय बनाने की जरूरत थी. 
 
पटना संग्रहालय में हो गयी थी चोरी : पटना संग्रहालय में चोरी की एक घटना का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि वहां से 18 एेतिहासिक मूर्तियां चोरी हो गयी थीं. इसके बाद वहां सुरक्षा के तमाम इंतजाम किये गये. हालांकि, सीबीआई जांच शुरू होने से पहले ही बिहार पुलिस ने 17 मूर्तियां बरामद कर लीं. राहुल सांस्कृत्यायन द्वारा तिब्बत से लायी गयी पांडुलिपियां यहीं रखी हैं और ये यहीं रहेंगी. 
 
दोनों संग्रहालयों का होगा विकास : बिहार और पटना संग्रहालय का एक समान विकास किया जायेगा. कोई भेदभाव नहीं होगा. पटना संग्रहालय में साल 1764 से पहले की चीजें रहेंगी. उसके बाद की चीजें बिहार संग्रहालय में आ जायेंगी. आनेवाले समय में एक ही टिकट पर इन दोनों संग्रहालयों का भ्रमण किया जा सकेगा. 
 
अगले साल के अंत तक हर घर बिजली : सीएम ने कहा कि सरकार का यह संकल्प है कि इस साल के अंत तक प्रदेश के हर बसावट में  व अगले साल के अंत तक बिहार के हर घर में बिजली उपलब्ध हो जायेगी.  
 
संग्रहालय उसके पास होता है, जिसके पास विरासत है
 
बिहार संग्रहालय के विभिन्न दीर्घाओं के लोकार्पण के मौके पर उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि संग्रहालय उनके पास होता है, जिसके पास विरासत है.
 
अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा-मैं अमेरिका कई बार गया. पर किसी ने वहां नहीं कहा कि चलिये म्यूजियम दिखा लाते हैं, क्योंकि अमेरिका के पास अपनी कोई विरासत नहीं, संस्कृति नहीं. इसलिये वहां म्यूजियम नहीं है. यूरोप मैं कई बार गया, वहां संग्रहालय हैं. उनकी संस्कृति है, इसलिये संग्रहालय है. बिहार म्यूजियम के लिये सरकार को बहुत संघर्ष करना पड़ा है. 
 
अड़ंगा लगाने के लिये बार-बार कोर्ट में कुछ न कुछ मामला डाल दिया जाता था. फिर भी सरकार को सफलता मिली. बुलेट ट्रेन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल खड़े करने वालों को उप मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा- प्रधानमंत्री बुलेट ट्रेन की चिंता करते हैं तो गरीबों के शौचालय की भी चिंता करते हैं. 
 
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