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  • Dec 11 2019 5:22PM
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ISRO ने रिसैट-2बीआर1 और नौ विदेशी उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया

ISRO ने रिसैट-2बीआर1 और नौ विदेशी उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने रडार इमेजिंग पृथ्वी निगरानी उपग्रह ‘रिसैट-2बीआर1' को नौ अन्य विदेशी वाणिज्यिक उपग्रहों के साथ बुधवार को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया.

इन उपग्रहों को ले जाने वाले 44.4 मीटर लंबे (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) ने तेज गर्जना करते हुए और धुएं का गुबार छोड़ते हुए यहां स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम लाॅन्च पैड से अपराह्न तीन बजकर 25 मिनट पर शानदार ढंग से उड़ान भरी. ‘रिसैट-2बीआर1' को प्रक्षेपण के लगभग 16 मिनट बाद और अन्य उपग्रहों को लगभग पांच मिनट बाद उनकी अलग-अलग निर्दिष्ट कक्षाओं में स्थापित कर दिया गया. इसरो प्रमुख के सिवन और अन्य वैज्ञानिकों ने सभी 10 उपग्रहों के निर्दिष्ट कक्षाओं में स्थापित होने पर एक-दूसरे को बधाई दी. बाद में, मिशन नियंत्रण केंद्र से सिवन ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है जो संयोग से पीएसएलवी की 50वीं उड़ान का दिन है. उन्होंने कहा, इसरो ने ऐतिहासिक मिशन को अंजाम दिया है. मुझे यह घोषणा करते हुए अत्यंत खुशी हो रही है कि 50वें पीएसएलवी ने ‘रिसैट-2बीआर1' को 576 किलोमीटर की कक्षा में सफलतापूर्वक बेहद सटीक तरीके से स्थापित कर दिया है.

सिवन ने कहा कि ‘रिसैट-2बीआर1' एक जटिल उपग्रह है, लेकिन इसका निर्माण कम समय में ही कर लिया गया. उन्होंने कार्य में शामिल टीम की सराहना की. पीएसएलवी के संबंध में उन्होंने अभिकल्पना से लेकर मूर्त रूप देने तक डॉ श्रीनिवासन, डॉ माधवन नायर जैसी असाधारण अंतरिक्ष हस्तियों के योगदान को याद किया. उन्होंने रेखांकित किया कि नायर ने प्रक्षेपण यान को क्रियाशील किया था. सिवन ने कहा कि पीएसएलवी की भार ले जाने की क्षमता 860 किलोग्राम से बढ़कर 1.9 टन तक हो गयी है. यह अब तक 52.7 टन भार ले जा चुका है जिसमें 17 प्रतिशत ग्राहक उपग्रह थे. उन्होंने वैज्ञानिकों की प्रशंसा करते हुए मिशन को बड़ी सफलता बताया.

इसरो प्रमुख ने भविष्य के मिशनों को लेकर विश्वास जताया कि इसरो की टीम हमेशा की तरह बड़ी सफलता हासिल करेगी. आज 628 किलोग्राम वजनी रडार इमेजिंग पृथ्वी निगरानी उपग्रह ‘रिसैट-2बीआर1' के प्रक्षेपण से पहले इस साल मई में रिसैट-2बी को कक्षा में स्थापित किया गया था. पीएसएलवी-सी 48 पर सवार ‘रिसैट-2बीआर1' के साथ नौ विदेशी उपग्रहों को भी आज कक्षा में स्थापित किया गया. इनमें से अमेरिका के छह उपग्रह और इजराइल, इटली तथा जापान का एक-एक उपग्रह शामिल है. उपग्रहों का प्रक्षेपण न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड के साथ वाणिज्यिक प्रबंधन के तहत किया जा रहा है. कुल 50 मिशनों में से 48 मिशन इसरो के लिए सफल रहे हैं. पीएसएलवी ने अब तक लगभग 310 विदेशी उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया है. इस तरह का पहला उपग्रह सितंबर 1993 में प्रक्षेपित किया गया था.

ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) की मदद से प्रक्षेपित कुछ महत्वपूर्ण मिशनों में ‘चंद्रयान-1', मंगलयान (मॉम) और एक साथ रिकॉर्ड 104 उपग्रहों का प्रक्षेपण शामिल है. पीएसएलवी-सी48 ‘क्यूएल कनफिगरेशन' वाली दूसरी उड़ान है. समान ‘कनफिगरेशन' वाली पहली उड़ान अप्रैल 2019 (पीएसएलवी-सी45/एमिसैट और 28 अन्य उपग्रह) में रवाना की गयी थी. सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग के साथ ही ‘रिसैट 2बीआर1' को कृषि, वन और आपदा प्रबंधन के कार्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जायेगा. अमेरिका के छह उपग्रहों का इस्तेमाल जहां बहुद्देश्यीय दूर संवेदी उद्देश्यों के लिए होगा, वहीं इटली के उपग्रह का इस्तेमाल अनुसंधान उद्देश्य पर आधारित है. इसरो ने कहा कि पीएसएलवी-सी48/रिसैट-2बीआर1 इसरो का इस वर्ष छठा प्रक्षेपण है जिसका जीवनकाल पांच साल का होगा.

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