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  • Jul 22 2019 9:56PM
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मुंबई के MTNL इमारत में लगी आग, सभी 84 लोगों को सुरक्षित बचाया गया

मुंबई के MTNL इमारत में लगी आग, सभी 84 लोगों को सुरक्षित बचाया गया

मुंबई : मुंबई में सोमवार को एक टेलीफोन एक्सचेंज इमारत में आग लग गयी. इमारत की छत पर हवाई सीढ़ी की मदद से यहां फंसे सभी 84 लोगों को बाहर निकाला गया है. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. वहीं, 25 वर्षीय एक दमकल कर्मी सागर साल्वे अभियान के दौरान धुएं की चपेट में आ गये. इसके बाद उन्हें भाभा अस्पताल में भर्ती किया गया. उनकी हालत स्थित है और खतरे से बाहर है.

अधिकारी ने बताया कि ऐसी आशंका है कि आग से प्रभावित तीसरी, चौथी, पांचवी और अन्य मंजिल पर लोग फंसे हुए हो सकते हैं और उन्हें बाहर निकालने के लिए तलाश जारी है. यह इमारत उपनगरीय बांद्रा इलाके में स्थित है. इससे एक दिन पहले ही दक्षिणी मुंबई में स्थित प्रसिद्ध ताज महल पैलेस होटल के पीछे स्थित एक चार मंजिला आवासीय इमारत में आग लग गयी थी. इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गयी और दो अन्य घायल हो गये. एक अधिकारी ने बताया कि अग्निशमन कर्मी इमारत में ऑक्सीजन मास्क और सर्चलाइट से लैस होकर घुसे हैं. पहली बार एक नये तरह का रोबोट रोबोफायर का इस्तेमाल आग पर काबू पाने के अभियान में किया गया.

उपनगरीय बांद्रा में स्थित एमटीएनएल की इमारत में अपराह्न तीन बजे आग लग गयी थी. सुरक्षित बाहर निकाले गये लोगों ने बताया कि कामकाज का दिन होने की वजह से ज्यादा लोग इमारत में थे. इनमें से ज्यादातर एमटीएनएल के कर्मचारी ही थे. अधिकारी ने बताया कि आग तीसरी और चौथी मंजिल से शुरू हुई थी जिसके बाद लोग घबराई हुई स्थिति में इमारत से बाहर निकलने की कोशिश में लग गये थे. वहीं जो लोग ऊपरी मंजिल पर थे, वह खुद को बचाने के लिए छत पर पहुंच गये. इसके बाद छत पर फंसे सभी 84 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.

उन्होंने बताया कि दमकल के 14 वाहनों, एक रोबोफायर, एक एम्बुलेंस, एक हवाई सीढ़ी समेत अन्य उपकरण आग को बुझाने और लोगों को बाहर निकालने के काम में लगाये गये. अधिकारी ने बताया कि हवा तेज होने और धुएं की मोटी चादर होने से अग्निशमन कर्मियों को आग पर काबू पाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा. आग की वजह से निकट की इमारत भी प्रभावित हुई. हालांकि, आग लगने के पीछे का वास्तविक पता अभी तक नहीं चला है. पिछले एक दशक में मुंबई में आग से जुड़ी 49,000 घटनाएं हो चुकी हैं और 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. महाराष्ट्र सरकार ने विधानसभा में 2018 में यह जानकारी दी थी.

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