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muzaffarpur

  • Sep 21 2019 5:31AM
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हाईस्कूल में दो ही शिक्षक, स्मार्ट क्लास में बच्चे खुद ही पढ़ते और समझते हैं

मुजफ्फरपुर : दोपहर के डेढ़ बज रहे हैं. मीनापुर प्रखंड के हाईस्कूल रानी खैरा में स्मार्ट क्लास में हिंदी की कक्ष चल रही है, लेकिन यहां कोई शिक्षक बताने-समझाने के लिए नहीं हैं. छात्र खुद ही टीवी स्क्रीन पर देखकर समझ रहे हैं और टीवी को भी खुद ही ऑपरेट कर रहे हैं. 

 
 इस हाईस्कूल में वर्ष 2014 से दो ही शिक्षक हैं. एक सोशल साइंस के और एक साइंस के. बाकी विषय छात्र खुद ही पढ़ते हैं.  स्कूल में मनोज तिवारी सोशल साइंस और राकेश कुमार साइंस पढ़ाते हैं. उन्होंने बताया कि शिक्षक नहीं हाेने से दिक्कत है. हमलोगों को जितना पता है उतना तो बता देते हैं, बाकी बच्चे खुद ही पढ़ते हैं. इस स्कूल में 152 छात्रों का दाखिला है. 
 
सरकार की स्मार्ट क्लास योजना जमीन पर धराशायी हो रही है. कई स्कूलों में कमरे अभी तैयार  ही कियेे जा रहे हैं. उन स्कूलों का कहना है कि कमरे जर्जर हैं. उन्हें ठीक कराना होगा़  उसके बाद ही स्मार्ट क्लास के सामान लगा सकते हैं.  जर्जर स्कूल में तो सामान ही चोरी हो जायेगी. मुजफ्फरपुर में 221 हाईस्कूलों में स्मार्ट क्लास शुरू करने हैं. इसके लिए सभी को 90-90 हजार रुपये भी दिये गये हैं. 
 
स्कूल के कमरे तैयार नहीं,  कैसे शुरू करें क्लास. मीनापुर के रामकृष्ण हाईस्कूल में अभी स्मार्ट क्लास के लिए कमरा तैयार ही हो रहा है. टीवी लगाने के लिए बिजली दौड़ा दी गयी है. स्कूल के प्राचार्य सुनील कुमार ने बताया कि स्कूल वर्ष 1954 का है, इसलिए मरम्मत की जरूरत थी. कमरों में ग्रिल नहीं थे इसलिए आरएमएसए से जो पैसा आया था उससे स्मार्ट क्लास का कमरा बन रहा है. 
 
रामकृष्ण हाईस्कूल से पांच किलोमीटर आगे चदुनी शिव हाईस्कूल तुर्की की हालत और भी खराब है. यहां स्मार्ट क्लास जिस कमरे में चलना है वह पूरी तरह जर्जर है. स्कूल के दूसरे कमरे भी खराब हैं. स्कूल के प्राचार्य संतोष कुमार ने बताया कि स्मार्ट क्लास की मीटिंग में उन्होंने कमरा नहीं होने की बात उठायी थी पर आगे कुछ नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि जब कमरा ठीक हो जायेगा तब स्मार्ट क्लास चलायेंगे. 
 
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