monghyr

  • Dec 11 2019 8:43AM
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50 का रजिस्ट्रेशन, नसबंदी को पहुंचे 20 पुरुष

  •  पुरुष नसबंदी पखवारा में सिर्फ 20 पुरुषों का हुआ ऑपरेशन
  • परिवार नियोजन में लगातार कम होते जा रही पुरुषों की भागीदारी
  • आमजनों को जागरूक करने में फेल हो रही जिला स्वास्थ्य समिति
मुंगेर : जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में परिवार नियोजन की सुविधा उपलब्ध है. परिवार कल्याण के तहत नसबंदी करवाने पर प्रोत्साहन राशि भी दिये जाने का प्रावधान है. बावजूद परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी लगातार कम होते जा रही है. पिछले दिनों जिले भर में चलाये गये पुरुष नसबंदी पखवारा के दौरान मात्र 20 पुरुषों का ही नसबंदी हो पायी है. जिसमें हवेली खड़गपुर अव्वल रहा तथा असरगंज व जमालपुर अपना खाता भी नहीं खोल पाया. 
 
एनएसवी पखवारा में सिर्फ 20 पुरुषों की हुई नसबंदी: लगातार बढ़ते जा रही जनसंख्या को लेकर सरकार ने इस समस्या से निजात पाने को लेकर राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के तहत कई कार्यक्रम चला रखी है. जिसके तहत वर्ष 2045 तक देश की जनसंख्या को स्थिरता प्रदान करने को लेकर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना है. कार्यक्रम में महिला बंध्याकरण व पुरुष नसबंदी पर काम भी चल रहा है. बावजूद बढ़ती आबादी को रोकने में सभी उपाय ढाक के तीन पात साबित हो रहे हैं. 
 
जनसंख्या पर रोक लगाने को सरकार द्वारा पुरुष व महिला को छोटा परिवार अपनाने पर बल दिया जा रहा है. परिवार की धुरी महिला व पुरुष की बराबर जिम्मेवारी के बावजूद जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम में पुरुषों की सहभागिता की कमी से कार्यक्रम धरातल पर आने में विफल हो रहा है. 
 
जिले भर में पिछले दिनों एनएसवी पखवारा के तहत 28 नवंबर से 4 दिसंबर तक पुरुष नसबंदी के मात्र 20 ऑपरेशन हुए. मालूम हो कि इस पखवाड़े के तहत कुल 50 पुरुषों का रजिस्ट्रेशन करवाया गया था. किंतु आधे से अधिक लोग ऑपरेशन के लिए पहुंचे ही नहीं.   
 
एनएसवी पखवारा में असरगंज व जमालपुर रहा फेल: पुरुष नसबंदी पखवारा के दौरान हवेली खड़गपुर जहां 5 ऑपरेशन कर सबसे उपरी पायदान पर है, वहीं असरगंज और जमालपुर में इस पखवाड़े के दौरान एक भी पुरुष की नसबंदी नहीं हो पायी.
 
 वहीं टेटियाबंबर व धरहरा में 1-1, बरियारपुर, संग्रामपुर व तारापुर में 2-2 तथा सदर अस्पताल में 4 व सदर ब्लॉक में 3 पुरुषों का ऑपरेशन किया गया. मालूम हो कि पुरुष नसबंदी पखवारा के तहत प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता रथ को रवाना किया गया था. इतना ही नहीं संबंधित क्षेत्र की आशा तथा एएनएम को कम से कम एक-एक पुरुष को नसबंदी के लिए प्रेरित करने को कहा गया था. किंतु ऐसा नहीं हो पाया. 
 
भ्रांतियों के कारण नसबंदी से हिचक रहे पुरुष: समाज में फैली भ्रांतियों के कारण पुरुष नसबंदी करवाने से हिचकिचाते हैं. नसबंदी से मर्दाना ताकत में कमी सहित शारीरिक कमजोरी जैसी भ्रांतियों के कारण लोग इससे डरते हैं, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है. वैज्ञानिक रूप से किसी प्रकार की कमजोरी पुरुष को नहीं होती है. इसका ऑपरेशन पहले की तुलना में अब अधिक आसान हो गया है.
 
 नसबंदी कराने वाली महिलाओं को 2 हजार व पुरुषों को 3 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है. साथ ही महिलाओं के प्रेरक को 300 व पुरुषों के प्रेरक को 400 रुपये दिये जाते हैं. बावजूद लोगों की पुरानी सोच पुरुष नसबंदी में बाधक बनी हुई है. ऐसे में आशा से महिलाओं को जागरूक करके उनके पुरुषों को प्रेरित किया जा सकता है. 
 
कहते हैं एसीएमओ: एसीएमओ डॉ हिमकर ने बताया कि अधिकांश लोग खेती-बाड़ी में फंसे होने के कारण पखवारा के दौरान अपना ऑपरेशन नहीं करवा पाये हैं. पुरुष नसबंदी और बंध्याकरण लगातार चलते रहता है, इसमें गति लायी जायेगी. 
 
पुरुष मेडिकल वार्ड में चलता है टीबी के मरीज का इलाज, संक्रमण की रहती है आशंका
बदहाल सदर अस्पताल  
पांच माह पूर्व जिला ड्रग-रसिस्टेंट टीबी सेंटर का हुआ था उद्घाटन, अब तक पांच मरीज को भी नहीं किया गया है भर्ती
संक्रमित मरीजों के लिए उपलब्ध करायी गयी व्यवस्था पर नहीं दिया जाता है ध्यान 
 
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