monghyr

  • Nov 19 2019 8:10AM
Advertisement

बीआरएम कॉलेज की छात्रा ने दिया ईमानदारी व मानवता का परिचय

 मुंगेर : आज जहां लोग ईमानदारी और मानवता को भूलकर केवल अपने फायदे के बारे में सोचते हैं. वहीं मुंगेर विश्वविद्यालय के अंगीभूत बीआरएम कॉलेज की एक छात्रा ने ईमानदारी और मानवता का परिचय देकर मिसाल कायम की है. जिसे लेकर पूरे कॉलेज में छात्रा के इस कार्य की प्रशंसा हो रही है. 

 
कॉलेज के शिक्षक डॉ प्रकाश कुमार ने बताया कि 2018 में कॉलेज के स्नातक पार्ट-3 में नामांकित सदर प्रखंड के सीताकुंड निवासी छात्रा रूपा कुमारी उर्फ रूपाली को कॉलेज में 15 सौ रुपये गिरा मिला था. जिसे उठाकर छात्रा ने शिक्षक को पैसा देकर कहा कि यह पैसा किसी छात्रा का गिर गया होगा. 
 
यह जिसका होगा, उसे दे दीजियेगा, ताकि वह इस पैसे से अपना कार्य कर सके. जिसके बाद इस संबंध में कॉलेज में एक नोटिस चिपका दिया गया. लेकिन एक वर्ष के दौरान कोई भी छात्रा उस पैसों को लेने नहीं आयी.
 
 इस बीच पैसे पाने वाली छात्रा रूपा कुमारी कॉलेज से पास होकर चली गयी. जिसके एक वर्ष बाद रूपा कुमारी किसी कार्य से शनिवार को कॉलेज आयी. जिसे देखकर डॉ प्रकाश कुमार को पैसों की बात याद आयी तो उन्होनें रूपा को बुलाकर उसे पैसे को लेने को कहा. साथ ही कहा कि वह पैसा इस एक वर्ष में कोई छात्रा लेने नहीं आयी. 
 
लेकिन रूपा कुमारी ने उसे पैसे लेने से मना कर दिया. वहीं छात्रा के इस ईमानदारी को देखकर डॉ प्रकाश कुमार सहित सभी अन्य शिक्षक काफी प्रभावित हुए. जिसके बाद सभी शिक्षकों ने छात्रा को 2 हजार रुपये ईनाम के रूप में देना चाहा. लेकिन छात्रा ने उसे भी यह कहकर मना कर दिया कि उसने यह कार्य ईनाम लेने के लिये नहीं किया.
 
 जिसके बाद शिक्षकों के काफी समझाने पर छात्रा ने वे 2 हजार रुपये लेकर अपने घर के पास ही रहने वाली एक विधवा महिला ललिता देवी को दे दिया. छात्रा रूपा कुमारी ने बताया कि ललिता देवी के पति संतोष कुमार का काफी समय पहले ही देहांत हो चुका है. जिसके बाद ललिता देवी आसपास के घरों में छोटा-मोटा काम कर अपने 6 संतानों को पेट पाल रही है.
 
 वह अपने घर से कॉलेज आने के समय प्रतिदिन ललिता देवी के छोटे-छोटे बच्चों को देखती थी और ललिता देवी की मदद करना चाहती थी. छात्रा ने बताया कि वह एक मध्यम वर्गीय परिवार से है. उसके पिता आटा चक्की का मिल चलाते हैं. जबकि वह 7 भाई-बहन है. जिसमें 4 भाई तथा 3 बहन है. रूपा के इस कार्य से अन्य छात्र-छात्राओं को भी प्रेरणा लेने की जरूरत है.
 
Advertisement

Comments

Advertisement
Advertisement