Advertisement

Markets

  • Nov 16 2019 9:45PM
Advertisement

OMG : प्याज निर्यातक व्यापारी को 54 लाख रुपये का भुगतान करेगा ECGCI, जानें...

OMG : प्याज निर्यातक व्यापारी को 54 लाख रुपये का भुगतान करेगा ECGCI, जानें...

मुंबई : प्याज भारत के उपभोक्ताओं के लिए इस समय अनमोल रत्न बना हुआ है, मानो यह प्याज न होकर हीरा हो गया हो. प्याज की बात जैसे ही आती है, लोगों के कान खड़े हो जाते हैं. अगर आपको यह खबर बतायी जाये कि प्याज को लेकर फलाने को जुर्माना भरना पड़ रहा है, तो यह आपके लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं होगा. दरअसल, महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (ईसीजीसीआई) को सेवा में कमी के लिए एक प्याज निर्यातक को 54 लाख रुपये से अधिक का भुगतान करने का निर्देश दिया है.

आयोग ने बुधवार को दिये अपने आदेश में ईसीजीसीआई को निर्यातक को हुए नुकसान के लिए 48,70,234 रुपये मानसिक पीड़ा के लिए, पांच लाख रुपये और 50 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के लिए भुगतान करने को कहा. शिकायत के अनुसार, प्याज निर्यात में संलग्न नवी मुंबई स्थित ब्लॉसम ग्रोसरी एंड फूड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने ईसीजीसीआई से आठ करोड़ रुपये की बहुक्रेता जोखिम पॉलिसी नवंबर, 2014 से एक साल की अवधि के लिए खरीदी थी. निर्यातक को वियतनाम से एक निर्यात ऑर्डर मिला था.

शिकायत के अनुसार, 11 से 17 नवंबर 2014 तक चार खेप प्याज बुक हुआ. हालांकि, पहली दो खेप प्राप्त करने के बाद खरीदार ने निर्यातक से वित्तीय और विपणन समस्याओं का हवाला देते हुए शेष खेप नहीं भेजने को कहा. चूंकि, खेपें पहले ही भेज दी गयी थीं, निर्यातक ने उसे वियतनाम और मलेशिया में अलग-अलग खरीदारों को बेच दिया. शिकायत में कहा गया कि इससे निर्यातक को 48.70 लाख रुपये का नुकसान हुआ.

निर्यातक ने ईसीजीसीआई के समक्ष दावा पेश किया, जिसने यह कहते हुए इसे खारिज कर दिया कि खरीदार ने गुणवत्ता का मुद्दा उठाया था, जो दावे में शामिल नहीं है. हालांकि, शिकायतकर्ता ने दलील दी कि खरीदार ने दो खेपें भेजे जाने के आठ महीने बाद जुलाई, 2015 में गुणवत्ता का मुद्दा उठाकर उसे ठगा था. आयोग ने दलीलें सुनने के बाद कहा कि ईसीजीसीआई लिमिटेड ने आयात-निर्यात के दौरान नुकसान के लिए शिकायतकर्ता का बीमा करने के बाद मूल खरीदार द्वारा देर से सूचना दिये जाने के आधार पर दावे को खारिज कर दिया.

आयोग ने कहा कि ईसीजीसीआई गुणवत्ता विशेषज्ञ की कोई रिपोर्ट रिकॉर्ड में नहीं लाया, इसलिए वह खुद की दलील को साबित करने में असफल रहा. आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता के दावे को खारिज करने का कृत्य सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के बराबर है.

Advertisement

Comments

Advertisement
Advertisement