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  • Mar 14 2018 4:31PM

फूलपुर के बाद सपा ने गोरखपुर सीट भी जीती, योगी आदित्यनाथ ने मानी हार, सौदेबाजी का लगाया आरोप

फूलपुर के बाद सपा ने गोरखपुर सीट भी जीती, योगी आदित्यनाथ ने मानी हार, सौदेबाजी का लगाया आरोप
सपा को मिली बढ़त का जश्न मनाते समर्थक. फोटो - पीटीआइ.




गोरखपुर सीट समाजवादी पार्टी के
उम्मीदवार प्रवीण निषाद ने 21, 961 वोटों से जीत ली.

 

विपक्षी सपा-बसपा की जीत पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि बीएसपी-एसपी में राजनीतिक सौदेबाजी देश के विकास को बाधित करने के लिए बनी है. इसके बारे में हम अपनी रणनीति तैयार करेंगे. उन्होंने कहा कि यह जनता का फैसला है, लोकतंत्र में जनता जनार्दन के रूप में हैं. इस फैसले को हम स्वीकार करते हैं. मैं गोरखपुर व फूलपुर से विजयी प्रत्याशियों को बधाई देता हूं. फूलपुर में सपा के उम्मीदवार नागेंद्र सिंह पटेल ने भाजपा उम्मीदवार को 59613 वोटों से हरा दिया. वहीं, गोरखपुर में समाजवादी पार्टी उम्मीदवार प्रवीण कुमार निषाद 21, 117 वोटों से अागे चल रहे हैं.


फूलपुर से जीतने के नागेंद्र पटेल ने कहा है कि उन्हें बहन जी का बहुत आशीर्वाद था. एक ही विचारधारा की सभी पार्टी एक हुई और हमारी जीत हुई.उन्होंने अपनी जीत का श्रेय अखिलेश यादव, मायावती व फूलपुर की जनता को दिया.



गोरखपुर के सपा प्रत्याशी ने अपनी बढ़त के लिए सपा कार्यकर्ताओं व नेताओं के साथ बसपा सुप्रीमो मायावती के प्रति भी आभार जताया है.


लखनऊ : उत्तरप्रदेश उपचुनाव के नतीजे भाजपा के लिए बेहद निराश करने वाले हैं. उत्तरप्रदेश में लोकसभा की दो सीटों पर गोरखपुर और फूलपुर के लिए हुई वोटिंग में आज भाजपा के दोनों उम्मीदवार हार गये और समाजवादी पार्टी ने इन पर कब्जा कर लिया. फूलपुर सीट सपा के उम्मीदवार ने लगभग 60 हजार व गोरखपुर सीट प्रवीण निषाद ने लगभग 22 हजार वोटों से जीती. वहीं, बिहार की अररिया लोकसभा सीट पर वह लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार सरफराज आलम ने कब्जा कर लिया. एक महीने के अंदर भाजपा के लिए यह दूसरा झटका है, जब उसे राजस्थान उपचुनाव के बाद यूपी और बिहार में हार का सामना करना पड़ा. राजस्थान में भाजपा के पास मजबूत चेहरा वसुंधरा राजे थीं, तो उत्तरप्रदेश में उसके पास योगी आदित्यनाथ जैसे हिंदुत्व के तेजी से उभरते प्रतीक हैं, जिनके बारे में विश्लेषकों का एक तबका यह मान कर चल रहा है कि नरेंद्र मोदी के बाद वही भाजपा के नेतृत्व के सबसे बड़े दावेदार होंगे. योगी आदित्यनाथ ने हार को स्वीकार करते हुए इसके कारणों की समीक्षा की बात कही है और सपा-बसपा पर सौदेबाजी का आरोप लगाया है.

गोरखपुर भाजपा के लिए चार-पांच शीर्ष प्रतिष्ठा सूचक सीटों में एक है, जहां वह हर हाल में जीतना चाहती है. ऐतिहासिक रूप से गोरखपुर सीट से गोरक्षनाथ मठ के महंत या उनकी अनुपस्थिति में हिंदुत्ववादी चेहरे जीतते रहे हैं. योगी भी इसी परंपरा की एक कड़ी रहे हैं और वे यहां से लगातार विजयी होते रहे और पिछले साल मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने यह सीट छोड़ दी थी और पार्टी की ओर से अपने पसंद के शख्स उपेंद्र दत्त शुक्ला को उम्मीदवार बनवाया. वहीं, समाजवादी पार्टी ने यहां से प्रवीण निषाद को उम्मीदवार बनवाया. जबकि फूलपुर सीट से आजादी के बाद जवाहर लाल नेहरू व उनके निधन के बाद उनकी बहन विजया लक्ष्मी पंडित लड़ते व जीतते रहे. बाद में समाजवादियों का दबदबा इस सीट पर हुआ और पहली बार 2014 में मोदी लहर में भाजपा के केशव प्रसाद मौर्य इस सीट से जीते. मौर्य अब राज्य में डिप्टी सीएम हैं और उन्होंने इस कारण यह सीट छोड़ दी. योगी और मौर्य दोनों के लिए अपने प्रत्याशियों को यहां से जीत दिलाना हर हाल में जरूरी रहा है. पर परिणाम उलटा रहा है.
 
 
इस उपचुनाव में सपा को बसपा का समर्थन हासिल था, जिसके एवज में राज्यसभा चुनाव में बसपा को सपा ने समर्थन दिया है. यानी भाजपा की बढ़ती ताकत ने बुआ और बबुआ को करीब ला दिया है. जीत के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रेस कान्फ्रेंस कर बसपा प्रमुख मायावती को विशेष रूप से धन्यवाद दिया और इसे सामाजिक न्याय व दलितों की एकजुटता की जीत बताया. यानी उन्होंने भावी गंठबंधन का संकेत भी लगे हाथ दे दिया. बिहार व यूपी की जीत से उत्साहित  तेजस्वी यादव ने राष्ट्रीय स्तर पर महागंठबंधन बनाने का प्रस्ताव रख दिया है.
 


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लखनऊ में जीत की खुशी में सपा कार्यकर्ताओं ने खेली होली. फोटो - पीटीआइ.


बहरहाल, इस चुनाव से भारतीय जनता पार्टी के पिछड़ने से विपक्षी नेताओं को खुश होने का मौका मिल गया है. यह उपचुनाव इस मायने में खास है कि लोकसभा चुनाव से पूर्व राजनीतिक रूप से अहम दो सबसे बड़े राज्य में यह हो रहा है, जहां की शानदार बढ़त ने 2014 में बड़ी आसानी से भाजपा को सत्ता के दहलीज तक पहुंचाया था. लगातार हार से त्रस्त नजर आ रहे विपक्ष के नेता आज एक-दूसरे के साथ साझा खुशियां शेयर कर रहे हैं और बीजेपी से खार खायी उसकी सबसे पुरानी दोस्त शिवसेना भी बहुत खुश है.

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उत्तरप्रदेश में बुआ-बबुआ के नारे लग रहे हैं, तो बिहार में लालू प्रसाद यादव के पुत्र कह रहे हैं कि आपने लालू को नहीं एक विचार को कैद किया है और अगर लालूजी भाजपा से हाथ मिला लेते तो वे हिंदुस्तान के राजा हरिश्चंद्र होते. वहीं, कोलकाता से ममता बनर्जी लालू प्रसाद यादव, मायावती व अखिलेश यादव को बधाईयां दे रही हैं और यह भविष्यवाणी कर रही हैं कि यह तो भाजपा के खात्मे का आगाज है. जाहिर है ममता बनर्जी इस बहाने मजबूत भाजपा विरोधी गठजोड़ बनाने की पैरोकारी कर रहे हैं और तभी तो उन्होंने कल सोनिया गांधी के रात्रि भोज में अपनी पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में सुदीप बंद्योपाध्याय को भेजा था.

ये चुनाव नतीजे जैसे दिख रहे हैं वैसे ही हुए तो विपक्ष के उन नेताओं की उस धारणा को और बल मिलेगा कि मोदीजी तो मात्र 31 प्रतिशत वोट हासिल कर सत्ता में आये और हम बिखर गये थे इसलिए हमारा वोट भी बिखर गया था. यानी गैर भाजपावाद और मजबूत हो सकता है.  

इलाहाबाद में खुशी का प्रदर्शन करते सपा कार्यकर्ता (नीचे) 



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