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lohardaga

  • Sep 14 2019 9:15PM
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गर्भवती महिलाओं और शिशुओं की देखभाल की जानकारी के साथ सभी पंचायतों में लगाया गया रात्रि चौपाल

गर्भवती महिलाओं और शिशुओं की देखभाल की जानकारी के साथ सभी पंचायतों में लगाया गया रात्रि चौपाल

गोपी कुंवर, लोहरदगा 

उपायुक्त के निदेशानुसार प्रधानमंत्री के महत्वाकांक्षी योजना पोषण अभियान (राष्ट्रीय पोषाहार मिशन) के अंतर्गत 'पोषण माह' के अंतर्गत जिले के सभी पंचायतों में शुक्रवार को रात्रि चौपाल लगाया गया. इसमें पोषण के सूत्र के अंतर्गत पहले सुनहरे एक हजार दिन के बारे जानकारी दी गयी, जिसमें गर्भावस्था के 270 दिन, बच्चे के जन्म का पहला वर्ष के अंतर्गत 365 दिन और दूसरा वर्ष के अंतर्गत 365 दिन शामिल हैं. इसमें गर्भवती माता से लेकर बच्चे को उचित स्वास्थ्य, पर्याप्त पोषण, प्यार भरा व तनावमुक्त माहौल और बच्चे के सही देखभाल करने की सलाह दी गयी. 

गर्भवती माता को कम से कम चार एएनसी जांच कराने, कैल्शियम व आयरन की गोलियों का सेवन करने की सलाह दी गयी. इस दौरान संस्थागत प्रसव के बारे जानकारी दी गयी और जन्म के बाद बच्चे के लिए माता के दूध की महत्ता बतायी गयी. 

नियमित टीकाकरण जरूरी  

रात्रि चौपाल में मौजूद सभी लोगों को बताया गया कि बच्चे का नियमित टीकाकरण कराना जरूरी है. छह माह से बड़े उम्र के बच्चे को स्तनपान के साथ उपरी आहार जरूरी है. पौष्टिक आहार के अंतर्गत अनाज, दालें, हरी पत्तेदार सब्जी, आम, पपीता, अंडा, मांस, मछली, आंगनबाड़ी से मिलनेवाला पोषाहार खाने आदि की सलाह दी गयी. साथ ही बताया गया कि बच्चे को बाजार के बिस्कुट, चिप्स, मिठाई, नमकीन और जूस जैसी चीजें नहीं खिलाएं. 

एनीमिया से बचाव  

एनीमिया से बचाव के लिए दाल, हरी पत्तेदार सब्जी, मेथी, पालक, फल, दूध, दही, पनीर, नींबू, आंवला, अमरूद, खट्टे फल के सेवन की सलाह दी गयी. वहीं मांसाहारी हैं तो अंडा, मांस व मछली का भी सेवन करें. 6-59 माह के बच्चे को हफ्ते में दो बार एक मिलीलीटर आईएफए सिरप, 5 से 9 वर्ष की उम्र में आईएफए की एक गुलाबी गोली खिलाने, 10-19 वर्ष तक की उम्र में हफ्ते में एक बार आईएफए की नीली गोली खाने की सलाह दी गयी. 

साथ ही गर्भवती महिला को गर्भावस्था के चौथे महीने से रोजाना 180 दिन तक आईएफए की एक लाल गोली, धात्री महिला को 180 दिन तक आईएफए की एक लाल गोली और कृमिनाश के लिए एल्बेंडाजोल की निर्धारित खुराक खिलाने की सलाह दी गयी. रात्रि चौपाल में डायरिया प्रबंधन के लिए व्यक्तिगत साफ-सफाई, घर की सफाई, आहार की स्वच्छता का ध्यान रखने की सलाह दी गयी. हमेशा साफ बर्तन में ढककर रखा हुआ पानी पीने की सलाह दी गयी.

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