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  • Apr 15 2017 1:42PM

रचनाकारों के लिए शानदार ‘प्लेटफॉर्म’ बना फेसबुक

रचनाकारों के लिए शानदार ‘प्लेटफॉर्म’ बना फेसबुक

रचनाओं के लिए समय निकालना नहीं पड़ता, वो तो बरबस फूट पड़ती हैं और लेखक/कवि उसे अपने मन से कागज पर उकेर देता है. ये रचनाएं बेहतरीन होती हैं लेकिन कुछ वर्षों पहले तक ऐसी रचनाएं लोगों के सामने नहीं आ पाती थीं, क्योंकि हर रचनाकार की रचना को किसी साहित्यिक पत्रिका में जगह मिले, ऐसा संभव नहीं हो पाता था, लेकिन जब से मार्क जुकरबर्ग ने लोगों के हाथ में फेसबुक जैसा हथियार थमाया है, ऐसी रचनाएं रचनाकार के मन से फूटते ही फेसबुक के जरिये पाठकों तक पहुंच जाती है. आज फेसबुक रचनाकारों के लिए एक शानदार मंच बन गया है. जिसके जरिये लोग अपनी बातें हजारों लोगों तक पहुंचा रहे हैं और साहित्य जगत में अपनी  पैठ बना रहे हैं. वैसी महिलाएं जो गृहस्थी में रमकर अपनी लेखनक्षमता को भुला बैठती थीं, वैसी महिलाओं के लिए तो फेसबुक अचूक हथियार बन गया है. आइए जानें कुछ वैसे रचनाकारों की राय जिन्होंने फेसबुक को एक मंच के रूप में अपनाया और अपनी बातों को लोगों तक पहुंचाया.


बालेंदुशेखर मंगलमूर्ति  (Joint Director Centre for World Solidarity) :
 मेरा ऐसा मानना है कि फेसबुक एक शानदार मंच है, जिसके जरिये आप अपनी बातों को लोगों तक पहुंचा सकते हैं. चूंकि मेरी लिखने में रुचि है और मैं अभी 50-60 साल तक लिखना चाहता हूं, तो मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि फेसबुक मेरी इस यात्रा की शुरुआत है. चूंकि यह तकनीक का युग है. इसलिए मैं अभी किताबों से ज्यादा फेसबुक और ब्लॉग लेखन पर ध्यान दे रहा हूं. इसके जरिये लोग मुझे ना सिर्फ देश, बल्कि विदेशों से भी पढ़ रहे हैं और प्रतिक्रिया दे रहे हैं. मैं एक ब्लॉग https://www.poemsofbalendu.com का संचालन भी कर रहा हूं. मेरे इस ब्लॉग पर भी लोगों की पहुंच फेसबुक के जरिये हो रही है. दरअसल भारत में लोग कविताएं कम पढ़ते हैं या यह कह सकते हैं कि किताबें खरीद कर कम पढ़ते हैं, तो ऐसे में फेसबुक अच्छा माध्यम है, जहां से लोग बिना खर्च किये पढ़ सकते हैं, लिखने वालों के लिए भी यह अच्छा मंच है, जहां लेखक को अपनी रचना पर प्रतिक्रिया तुरंत मिलती हैं, साथ ही लेखक का अपना सर्किल भी बन जाता है, जहां चर्चाएं होतीं हैं. मेरा ऐसा मानना है कि फेसबुक ने ‘राइटिंग कल्चर’ को बढ़ाया है, एक अच्छा प्लेटफॉर्म दिया है. जहां तक बात किताबों की जगह लेने का है, तो मुझे नहीं लगता कि फेसबुक कभी भी किताबों की जगह ले सकता है. फेसबुक पर लिखते वक्त लोग तथ्यों पर ध्यान नहीं देते हैं जबकि किताबों में इन बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है, इसलिए किताबों का अपना महत्व है और उसे दरकिनार नहीं किया जा सकता.
 
स्मिता सिन्हा (Poet & Writer and Freelance Journalist) : मेरी रचनाएं फेसबुक में लिखने से पहले भी प्रकाशित होती रहीं हैं, लेकिन मेरा ऐसा मानना है कि फेसबुक पर लिखने का बहुत फायदा होता है. आपकी पहुंच लोगों तक बढ़ती है. यह लेखन के लिए बहुत अच्छा प्लेटफॉर्म है. इसके जरिये मेरे पाठक विदेशों में भी हैं और मेरी रचनाओं को लाइक और कमेंट कर रहे हैं. मैंने हिंदुस्तान अखबार, पटना में काफी लंबे समय तक काम किया, लेकिन अब बच्चों की जिम्मेदारी के कारण मैं घर से बाहर ज्यादा नहीं जा पाती तो साहित्य लेखन में ध्यान दे रही हूं और फेसबुक के कारण मुझे बहुत फायदा मिल रहा है. जहां तक बात किताबों से फेसबुक की तुलना है, तो मेरा ऐसा मानना है कि किताबें गंभीर लोग पढ़ते हैं और उन्हें पढ़ने वालों का अपना एक वर्ग है, जो कभी खत्म नहीं होगा. किताबों का अपना महत्व है. हां फेसबुक की मदद से मार्केटिंग हो जाती है, पहचान बनती है, इसमें कोई दो राय नहीं है. 


उपासना झा (Former Senior Officer at The Times of India) :
मैं काफी वर्षों से लेखन कर रही हूं, लेकिन रचनाओं को कभी प्रकाशित होने के लिए नहीं भेजा. दोस्तों ने दबाव दिया, तो मैंने फेसबुक पर पिछले दो सालों से लिखना शुरू किया. जिसके बाद मेरी रचनाओं को काफी लोगों ने पसंद किया और साहित्यिक पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं प्रकाशित हुईं. फेसबुक रचनाकारों के लिए एक  बहुत अच्छा प्लेटफॉर्म है. जहां तक बात किताबों की जगह लेने की है, तो मुझे नहीं लगता कि फेसबुक किताबों की जगह ले सकता है. किताबों का अपना महत्व है. उसमें गंभीरता होती है. फेसबुक की अपनी विशेषताएं हैं, जरूरत इस बात की है कि इसे तरीके से इस्तेमाल किया जाये. मैं कविता, कहानी और लेख लिखती हूं, अभी एक उपन्यास लिख रही हूं, जो इस साल तक पूरी हो जायेगी.


मुक्ति शाहदेव ( Senior Teacher and Poet) :
मैं पिछले दो साल से फेसबुक पर लिख रही हूं, मुझे इसके कई फायदे नजर आते हैं. इसका जो सबसे बड़ा फायदा मुझे दिखता है, वो यह है कि इसपर लिखना आसान है, आपको अलग से कोई कोना पकड़कर कागज-कलम लेकर बैठने की जरूरत नहीं. आप कहीं भी बैठकर लिख सकते हैं. साथ ही फेसबुक लिखने वालों को एक प्लेटफॉर्म दे रहा है जिसकी पहुंच हजारों लोगों तक है. यहां प्रतिक्रिया तुरंत मिलती है और आप उसका जवाब भी दे सकते हैं. वैसी महिलाएं जो गृहस्थी में रमकर अपनी बातों को भूल जातीं थीं, उन्हें फेसबुक ने अपना कोना दे दिया है जहां वे अपने मन की कहती हैं. लेकिन फेसबुक कभी किताब की जगह नहीं ले सकता है.
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