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khabro ki khabar

  • Feb 24 2015 8:00AM

‘सर्विसवाली बहू’ में दिखे चाईबासा के रंग

‘सर्विसवाली बहू’ में दिखे चाईबासा के रंग

चाईबासा/जमशेदपुर : माटी की खुशबू ऐसी होती है, जो हमेशा अपनों को अपनी ओर खींचती है. कोल्हान की माटी ने भी मुंबई में रह रहे अपने कलाकार बेटे को खींचा है. वैसे तो कोल्हान की पृष्ठभूमि पर कई सीरियल और फिल्म बन चुके हैं, लेकिन इन दिनों चर्चा में है जी टीवी पर सोमवार से शुरू हुआ सीरियल ‘सर्विसवाली बहू’. विलेज ब्वॉय प्रोडक्शन के तहत बने इस सीरियल में सिर्फ चाईबासा और जमशेदपुर के विषय-वस्तु को परोसा भर नहीं गया है, बल्कि इसके प्रोड्यूसर भी चाईबासा निवासी राकेश पासवान ही हैं. 

सोमवार से यह सीरियल ऑन एयर हो गया. पहले एपिसोड में कुजू नदी और उस पर बने पुल को दृश्य में शामिल किया गया है. साथ ही चाईबासा स्टेशन, रेलवे क्रॉसिंग , पुलिस स्टेशन , रोरो नदी पर बने पुल व अन्य जगहों को भी फिल्माया गया है. सीरियल की नायिका पीडब्ल्यूडी में इंजीनियर की भूमिका में है. इस सीरियल में चाईबासा टाइम्स नाम का अखबार भी पढ़ते हुए दिखाया गया है.

चाईबासा के गुट्टुसाई मुहल्ला निवासी राकेश पासवान ने स्कूलिंग वहीं के सेंट जेवियर्स स्कूल से की, जबकि ग्रेजुएशन टाटा कॉलेज से किया. श्री पासवान के पिता सोहन कुमार किरीबुरू स्थित सेल में नौकरी करते थे. उनकी मां कृष्णा देवी का मायका जमशेदपुर के बिरसानगर में है. डायरेक्टर के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत सीरियल ‘सुरभि’ से की. इसके बाद उन्होंने बहु चर्चित सीरियल ‘बाबा ऐसो वर ढूंढ़ो’ व ‘अफसर बिटिया’ आदि का भी निर्देशन किया.  

जीटीवी पर सोमवार से प्रसारित ‘सर्विसवाली बहू’ नामक फिक्शन सीरियल को राकेश पासवान ने प्रोड्यूस किया है. विजेल ब्वाय प्रोडक्शन के तहत बने इस सीरियल में टीवी के चर्चित चेहरों की अदाकारी देखने को मिलेगी. सोमवार की शाम श्री पासवान अपने सीरियल की लॉन्चिंग में व्यस्त थे. फिर भी उन्होंने प्रभात खबर से अपने सीरियल के बारे में बताते हुए कहा कि मेरा बचपन चाईबासा और जमशेदपुर में ही बीता है.

कोल्हान मेरे लिए सिर्फ विषय भर नहीं है. वहां से मेरी संवेदना जुड़ी हुई है. सीरियल का विषय तो देशव्यापी है, लेकिन संवेदनावश मैंने इसे कोल्हान के लोगों को समर्पित किया है. उन्होंने कहा कि कोल्हान में सीरियल की शूटिंग तो नहीं हुई है, लेकिन वहां के कई लोकेशन जरूर टीवी सीरियल में देखने को मिलेंगे. सीरियल की कहानी फिक्शन बेस्ड है, इसलिए इसमें रोमांच की विपुलता है. दर्शकों को हर दिन नया सस्पेंस देखने  को मिलेगा.  सीरियल में जमशेदपुर व चाईबासा के कलाकार तो नहीं हैं, लेकिन जिन कलाकारों को मौका दिया गया है, वे काफी मंङो हुए हैं.

यह पूछे जाने पर कि चाईबासा या जमशेदपुर में छोटे या बड़े परदे के उद्योग के लिए क्या संभावना है, उन्होंने कहा कि फिल्म या धारावाहिक में सबसे पहला मसला टीआरपी का होता है. टीआरपी से सीरियल या फिल्म को पहचान मिलती है. इन दोनों शहरों में टीआरपी की प्रणाली विकसित नहीं हुई है. बिना टीआरपी प्रणाली के फिलहाल यहां फिल्म या उद्योग धंधे जैसी बात नहीं की जा सकती. यहां शूटिंग की परेशानियों के मसले पर उन्होंने कहा कि पहला मसला सुरक्षा का होता है. रिमोट एरिया में आप शूटिंग के लिए जा नहीं सकते हैं. लोकेशन क्रिएट करना पड़ता है. उसके लिए एक प्लान से काम करना होता है. क्या इस पर कहीं भी काम हो रहा है. पंजाब, मध्य प्रदेश में जाकर देखिए. वहां की सरकार कितनी गंभीर है.

 

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