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  • Nov 20 2019 9:57AM
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गूगल पर बीमारी का इलाज ढूंढ़कर बीमार हो रहे युवा, पढ़ें यह खास रिपोर्ट

गूगल पर बीमारी का इलाज ढूंढ़कर बीमार हो रहे युवा, पढ़ें यह खास रिपोर्ट

एक ओर जहां हम तकनीकी रूप से एडवांस हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उसपर पूरी तरह से आश्रित भी हो रहे हैं. जागरूकता के लिए इंटरनेट का माध्यम सही है, लेकिन इसके अधिक इस्तेमाल से नुकसान भी हो रहा है. पिछले दिनों कई ऐसे मामले जेनरल फिजिशियन और मनोचिकित्सक के पास आये हैं जिनमें न केवल युवा बल्कि स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चे इंटरनेट के जरिये बीमारियों को सर्च करते हैं और फिर खुद में उसके लक्षणों को पाकर अपने साथ-साथ पूरे घरवालों को भी परेशानी में डाल देते हैं. पेश है जूही स्मिता की रिपोर्ट.

ऐसे आ रहे हैं मामले

पटना पाटलिपुत्र कॉलोनी का रहने वाला पवन (19) कई दिनों से सिर दर्द से परेशान था. एक दिन वह सिर दर्द का कारण और उसका उपाए ढूंढ़ने के लिए इंटरनेट का रुख करता है. इंटरनेट पर दिये गये लक्षणों के हिसाब से वह अपनी बीमारी का अंदाजा लगाता है. इंटरनेट पर उसे सिरदर्द के लिए माइग्रेन और ब्रेन ट्यूमर जैसी बीमारियां तक की जानकारी दी जाती है. इससे वह परेशान होकर डॉक्टर से संपर्क करता है और डॉक्टर से जिद करके सिटी स्कैन लिखवाता है. टेस्ट कराने पर उसका रिपोर्ट बिल्कुल सामान्य आता है और कुछ ही दिनों में उसका सिरदर्द वापस चला जाता है. इस तरह इंटरनेट पर बीमारी, दवाई या अन्य चीजों को समझने की कोशिश करने वाला सिर्फ पवन ही नहीं बल्कि कई लोग हैं. जो बीमारियों के लक्षण और इलाज खोजने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं. वह बीमारी के बारे में इंटरनेट पर पढ़ते हैं और उस पर अपने निष्कर्ष निकालने लगते हैं. इस रिसर्च के आधार पर ही वो डॉक्टर से भी इलाज करने के लिए कहते हैं. डॉक्टर्स का आए दिन इस तरह के मरीजों से आमना-सामना होता है और उन्हें समझा पाना डॉक्टर के लिए चुनौती बन जाती है. जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ बीमारी की जानकारी लेने तक ही सीमित नहीं है बल्कि लोग वीडियो देखकर सर्जरी करना तक सीख रहे हैं. किसी फिल्मी गाने और कुकिंग रेसिपि के वीडियो की तरह आपको सर्जरी के वीडियो भी आसानी से मिल जाते हैं.

गूगल पर आंख मूंदकर भरोसा करना ठीक नहीं

मनोचिकित्सक डॉ बिंदा सिंह का कहना है कि कई बार इंटरनेट से कोई जानकारी लेना खतरनाक भी हो सकता है. वह कहती हैं कि अपनी बीमारी के बारे में सबकुछ जानना मरीज का हक है. लेकिन, परेशानी ये होती है कि नेट पर दी गयी हर जानकारी सही नहीं होती. कई तरह की सनसनीखेज बातें नेट पर डाली जाती हैं. उनका कहना है कि लोगों के बीच बीमारी में एक-दूसरे से सलाह देने का चलन बहुत पहले से ही है, लेकिन इंटरनेट आने से इसमें काफी इजाफा हुआ है. इसमें जानकारी भी बहुत ज्यादा मिल जाती है. लोग जल्दी जानकारी चाहते हैं. डॉक्टर के पास जाने के लिए उन्हें इंतजार करना होता है जबकि इंटरनेट तुरंत उसी वक्त उपलब्ध होता है. पर इंटरनेट पर दी गयी हर जानकारी पर आंख मूंदकर भरोसा करना ठीक नहीं है.

केस-1
बेली रोड का रहने वाला रोहित (काल्पनिक नाम) कक्षा दसवीं का छात्र है. इंटरनेट से सीजोफ्रेनिया बीमारी के लक्षणों की जानकारी लेकर वह खुद में कुछ लक्षणों को पाता है और इस बीमारी से खुद को पीड़ित मानने लगता है. माता-पिता उसके बर्ताव से परेशान हो कर जब डॉक्टर के पास जाते हैं तो डॉक्टर उसका रिपोर्ट बिल्कुल नॉर्मल बताते हैं.

केस-2
कंकड़बाग के रहने वाले अरविंद (काल्पनिक नाम) अपने कम हाइट की वजह से परेशान थे. दोस्तों की सलाह से वह इंटरनेट से कुछ जानकारी लेकर ऑनलाइन दवाइयां ऑर्डर करते हैं और उसका सेवन करने लगते हैं. कुछ दिन बाद जब उनका सेहत बिगड़ने लगता है तो वह डॉक्टर के पास जाते हैं. जहां डॉक्टर उसे उन दवाइयों काे खाने से मना कर देते हैं.

इन बातों का रखें ख्याल

-अभिभावकों को अपने बच्चों के साथ समय बिताने की जरूरत  है

-बच्चों की जिज्ञासा को समझें और उसका जवाब दें

-कई बार युवा इंटरनेट से ऑनलाइन दवा ऑर्डर करते हैं

-रात में मोबाइल के इस्तेमाल करने से बचें

मेरे पास लगातार ऐसे केस आ रहे हैं जिसमें युवा और बच्चे इंटरनेट से बीमारियों के लक्षणों को देख कर खुद को इसके शिकार समझ कर  घरवालों को परेशान कर रहे हैं. किशोरावस्था में युवाओं का मन जिज्ञासा से भरा होता है ऐसे में जरूरी है उनकी जिज्ञासा को शांत किया जाये.
- डॉ बिंदा सिंह, मनोचिकित्सक

यह ट्रेंड बच्चों में ही नहीं बड़ों में बढ़ रहा है. बीमारी से जुड़ी जानकारी के लिए न सिर्फ इंटरनेट का सहारा लेते हैं कई बार कुछ हेल्थ टिप्स को अपना भी लेते हैं जिससे उन पर साइकोलॉजिकल प्रभाव पड़ता है. इंटरनेट से जागरूक होना अच्छी बात है, लेकिन अगर कोई  बीमारी है तो तुरंत डॉक्टरी सलाह लें.
- डॉ दिवाकर तेजस्वी, जेनरल फिजिशियन

 
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