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  • Nov 19 2019 2:06PM
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बिहार में प्रतिवर्ष चार लाख प्रीमैच्योर बच्चे लेते हैं जन्म

बिहार में प्रतिवर्ष चार लाख प्रीमैच्योर बच्चे लेते हैं जन्म

 दो किलोग्राम से कम वजन के बच्चों को कंगारू मदर केयर से लाभ

पटना : बिहार में हर वर्ष करीब चार लाख (तीन लाख 80 हजार) बच्चे मां की कोख से अपरिपक्व जन्म लेते हैं. जन्म के समय उनका वजन दो किलोग्राम से कम होता है. ऐसे बच्चों को काफी देखभाल की जरूरत होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार राज्य में हर साल 28.65 लाख जीवित बच्चों का जन्म होता है, जिनमें 37 सप्ताह से पहले करीब 10-15 प्रतिशत बच्चे जन्म ले लेते हैं. इसके कारण उनका वजन कम होता है.
 
साथ ही उनको हाइपोथर्मिया बीमारी की आशंका होती है. ऐसे बच्चों को अगर कंगारू मदर केयर दिया जाये तो उनकी जान की जोखिम को कम किया जा सकता है. देश में मनाये जा रहे नवजात शिशु सप्ताह के दौरान राज्य स्वास्थ्य समिति में आयोजित कार्यक्रम में बताया गया कि इस प्रकार के  नवजात को अधिक ठंडी या गर्मी के कारण स्वास्थ्य जटिलताएं बढ़ने का खतरा रहता है. चिकित्सकीय भाषा में इसे हाइपोथर्मिया कहा जाता है. सही समय पर यदि हाइपोथर्मिया का प्रबंधन नहीं किया जाये तो नवजात की जान भी जा सकती है.  इस गंभीर समस्या का निदान आसानी से घर पर भी किया जा सकता है. जिसके लिए ‘कंगारू मदर केयर’(केएमसी) असरदार साबित हो सकता है.
 
कमजोर बच्चों के उचित देखभाल के लिए सभी जिलों में ‘ कमजोर नवजात देखभाल’ कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है. इस कार्यक्रम के तहत आशा एवं एनएनएम चिह्नित कमजोर नवजातों को उनके घर पर ही विशेष देखभाल करती है. कंगारू मदर केयर से नवजात को हाइपोथर्मिया से बचाव के साथ नवजात के वजन में वृद्धि होती है. 
 
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