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gumla

  • Jul 19 2019 1:46AM
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कई सार्वजनिक कुओं पर कर लिया कब्जा

गुमला : सरकार पानी बचाने में लगी है. मुहिम भी चल रही है. अधिकारियों को जल संग्रह मुहिम चलाने का निर्देश भी दिया गया है. सरकार के निर्देश के बाद गुमला में जल संरक्षण पर अभियान चल रहा है. लेकिन गुमला शहर के दर्जनों सरकारी कुएं सरकारी मुहिम को मुंह चिढ़ा रहे हैं. 50 से 100 वर्ष पुराने कुएं, जो वर्षों पहले गुमला शहर की प्यास बुझाती थी,  आज इनका अस्तित्व खतरे मेें है.

 
कई कुओं का अतिक्रमण कर लिया गया है. कुछ कुओं में कूड़ा-कचरा भर कर उसे समतल करने का प्रयास चल रहा है. कुछ कुओं में पानी है, लेकिन बरसात तक ही पानी रहता है. उसके बाद सूख जाता है. अगर प्रशासन ध्यान दे, तो इन कुओं को बचाया जा सकता है. प्रभात खबर ने कुओं की पड़ताल की है. पड़ताल में पला चला कि कई कुओं को जीवित किया जा सकता है.
 
जरूरी है इन कुओं की साफ-सफाई की. लोहरदगा रोड स्थित होटल बिंदेश के समीप बने कुआं का उपयोग स्थानीय लोग करते थे, लेकिन कुआं की साफ-सफाई नहीं होने के कारण कुआं में गंदगी भर गयी है. इस कारण कुआं बेकार पड़ा है. अगर बगल की छत से यहां वाटर हार्वेस्टिंग किया जाये,  तो इस गांव का लाभ गर्मी के दिनों में भी लोगों को मिलेगा. इसी प्रकार मेन रोड स्थित सरकारी कुआं की घेराबंदी कर  दी गयी है, जिस वजह से कुएं के पानी का उपयोग दूसरा कोई नहीं कर पा रहा है. सरदा कांप्लेक्स में बना कुआं काफी पुराना है. कुछ वर्ष पूर्व तक इस कुएं के पानी का उपयोग लोग करते थे, लेकिन कुआं की घेराबंदी कर दिये जाने से इसका सार्वजनिक उपयोग नहीं हो पा रहा है.
 
शांति नगर स्थित बीसफूटा मैदान का कुआं काफी पुराना और बड़ा है, परंतु इस कुआं में पानी का नामों निशान नहीं है. कुआं में पत्थर भरे पड़े हैं. ललित उरांव बस स्टैंड के पीछे काफी पुराना विशाल कुआं था. वर्षों पूर्व स्थानीय लोग इसका उपयोग करते थे. स्टैंड बनने के बाद उस इलाके का रास्ता बंद होने की वजह से इसका इस्तेमाल बंद हो गया है.
 
पटेल चौके के समीप पटेल पार्क में पुराना कुआं था, जिसका स्थानीय लोग उपयोग करते थे, परंतु रोड चौड़ीकरण के दौरान उस कुआं को भर दिया गया. इन सब कुआें के अलावा गुमला शहरी इलाकों में दर्जनों सार्वजनिक कुआं है, जिसकी सही से देखरेख नहीं होने के कारण उपयोग नहीं हो पा रहा है. अभी भी गुमला में कुछ सार्वजनिक कुएं हैं,  जिनका गुमला के लोग सही उपयोग कर रहे हैं. वहीं कई ऐसे सार्वजनिक कुएं हैं, जिसे लोगों ने अपने कब्जे में कर लिया है.
 
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