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giridih

  • Apr 4 2019 1:09AM
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दस करोड़ की धोखाधड़ी मामले में भाजपा नेता सुरेंद्र बर्मन का बेल रिजेक्ट, फरार

गिरिडीह : दस करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने व्यवसायी सुरेंद्र बर्मन का बेल रिजेक्ट कर दिया है. बेल रिजेक्ट होने के बाद से श्री बर्मन फरार चल रहे हैं. यह जानकारी कोलकाता के व्यवसायी व सर्राफ ग्रुप ऑफ कंपनीज के प्रबंध निदेशक राजू सर्राफ ने दी. उन्होंने गिरिडीह में पत्रकार सम्मेलन आयोजित कर बताया कि गिरिडीह के भाजपा नेता सुरेंद्र बर्मन ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि जमीन के कारोबार में उन्हें अच्छा मुनाफा होगा.

इस कारोबार को देखते हुए उन्होंने ओवरसिज स्क्रैप ट्रेडिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की और श्री बर्मन को कंपनी का निदेशक बनाकर झारखंड में जमीन खरीद-बिक्री के लिए अधिकृत कर दिया. निदेशक बनने के बाद उन्हें जमीन खरीदारी के लिए 2007 से लेकर 2011 के बीच करोड़ाें रुपये दिये. 

 
 हालांकि गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद श्री बर्मन को दिया गया सामान्य अधिकार पत्र रद्द कर दिया गया. जिसकी संपुष्टि श्री बर्मन ने भी की. लेकिन इसके बाद भी अधिकार पत्र का दुरुपयोग करते हुए श्री बर्मन ने कंपनी के नाम से ही अन्य बैंकों में अपना खाता खुलवा लिया व लेन-देन किया. जिससे कंपनी की साख पर विपरीत असर पड़ा और अंतत: कंपनी करोड़ों रुपये के नुकसान में चली गयी. श्री सर्राफ ने बताया कि धोखाधड़ी के इस कारनामे की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने श्री बर्मन को कंपनी के निदेशक पद से भी हटा दिया.
 
इसके बाद भी श्री बर्मन ने धोखाधड़ी की. वे निदेशक पद से हटाये जाने के बाद भी कंपनी का निदेशक बनकर कंपनी की जमीन को बेचते रहे और रुपये अपने पास रखते रहे. इतना ही नहीं, बर्मन ने 10.06.2016 को एक एकरारनामा कर यह भी स्वीकार किया कि शंकरचक में 14.68 एकड़ जमीन उन्होंने कंपनी के पैसे से खरीदी है और इस जमीन के लिये रेलवे से मिलने वाला मुआवजा भी कंपनी को वापस कर देंगा. इस एकरारनामे के बाद भी श्री बर्मन ने उन्हें राशि वापस नहीं लौटायी.
 
सर्राफ ने कहा कि अंतत: गिरिडीह मुफस्सिल थाना में भादवि की धारा 420, 467, 468, 471 व 406 के तहत मामला दर्ज करवाया. मामले में 30 जनवरी, 2018 को गिरिडीह के जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गयी. निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ बर्मन ने झारखंड हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की है. जहां 26 मार्च, 2019 को उनका बेल रिजेक्ट कर दिया गया. 
 
श्री सर्राफ ने बताया कि जमीन खरीदारी के लिए जो पैसे उन्होंने बर्मन को दिये थे, बर्मन ने वह जमीन कंपनी के नाम पर न खरीदकर अपने और अपने रिश्तेदारों के नाम से खरीद ली. इतना ही नहीं, कई बिकी हुई जमीन भी बर्मन ने कंपनी के नाम से खरीदवा दिया. बिकी हुई जमीन की जानकारी जब स्थानीय लोगों ने उन्हें उपलब्ध करायी तो वे हतप्रभ रह गये. कई तथ्य और साक्ष्य मिलने के बाद उन्होंने अंतत: न्यायालय का सहारा लिया. 
 
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