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gaya

  • Mar 15 2019 6:11AM

गया : पत्थर काटने वाली भागवती देवी जब बनीं थी सांसद

गया : पत्थर काटने वाली भागवती देवी जब बनीं थी सांसद
कंचन
 
गया : पत्थर  तोड़कर अपने व परिवार का लालन-पालन करनेवाली महिला भागवती देवी न केवल विधानसभा बल्कि संसद की दहलीज तक पहुंचीं. इन्हें राजनीतिक क्षितिज पर लाने का श्रेय जाता है दो सोशलिस्ट नेताओं को. अब न भागवती देवी हैं और न ही वे दोनों सोशलिस्ट नेता. भागवती ने अपने जुझारूपन से राजनीति में जो किया वह आज भी महिलाओं के लिए  प्रेरणा है. 
 
बात 1968 की है. बाराचट्टी की रहनेवाली भागवती देवी जीविकोपार्जन के लिए गया शहर के पास के गांव नैली-दुबहल में पत्थर तोड़ रही थीं. इसी बीच उस रास्ते  से सोशलिस्ट नेता उपेंद्र नाथ वर्मा गुजर रहे थे. भागवती पत्थर तोड़नेवाली अन्य महिलाओं के साथ तो बातें कर रही थीं, उसे सुन वर्मा जी के पांव ठिठक  गये. थोड़ा ठहरे.
 
भागवती को पास बुलाया और कहा, राजनीति में आ जाओ. तुम्हारा व समाज दोनों का भला होगा. बाद में उपेंद्र नाथ वर्मा ने भागवती के बारे में तब के सोशलिस्ट नेता राम मनोहर लोहिया को बताया. 
 
लोहिया जी भी भागवती के जुझारूपन के कायल हो गये और संयुक्त सोशलिस्ट  पार्टी जिसका बरगद छाप चुनाव चिह्न था, से टिकट देकर बाराचट्टी विधानसभा से मैदान में उतारा. भागवती विजयी होकर पहली बार विधानसभा पहुंचीं. 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतीं. हालांकि यह सरकार लगभग दो ही साल चल सकी. वर्ष 1980 से भागवती राजनीति से दूर चली गयीं.
 
रुपये-दो रुपये के चंदे से जीत गयी थीं चुनाव
 
सोशलिस्ट  पार्टी के नेताओं को भागवती के बारे में तो पता था ही. इसी बीच 1990 में  लालू प्रसाद की सरकार आयी, 1995 में लालू प्रसाद ने फिर भागवती देवी को  बुलाकर टिकट दिया और वह राजद के टिकट पर विधायक बनीं.
 
एक ही साल बाद लोकसभा  का चुनाव था  और राजद के टिकट पर भागवती को गया संसदीय क्षेत्र से चुनाव  लड़ने का मौका मिल गया. सरल, सहज व अक्खड़ स्वभाव की महिला जिनमें जुझारूपन  था, ने यहां भी अपने को स्थापित किया और बन गयीं सांसद.
 
बाराचट्टी  के कुरमावां गांव के रहनेवाले भागवती देवी के करीबी दिनेश प्रसाद ने बताया  कि इतनी बार चुनाव जीतने के बाद भी भागवती में कोई गुमान नहीं था. तामझाम  से दूर. बिल्कुल सादगी व साधारण जीवन जीती थीं. उन्होंने बताया कि 1969 में  जब वह पहली बार चुनाव लड़ीं थी, तो रुपये-दो रुपये  के चंदे से चुनाव जीत  गयी थीं. 
 
भागवती के तीन बेटों में एक विजय मांझी राजनीति में हैं और फरवरी  2005 में वह विधायक बने.  बेटी समता देवी 1998 के उप चुनाव व 2015 के  विधानसभा चुनाव में विधायक बनीं.
 

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