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ranchi

  • Aug 22 2019 4:44PM
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रांची में कल से शुरू होगी शहरी गैस वितरण प्रणाली, CNG स्टेशनों और PNG आपूर्ति का शुभारंभ करेंगे धर्मेंद्र प्रधान

रांची में कल से शुरू होगी शहरी गैस वितरण प्रणाली, CNG स्टेशनों और PNG आपूर्ति का शुभारंभ करेंगे धर्मेंद्र प्रधान

रांची : झारखंड में शुक्रवार को प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा योजना की शुरुआत होने जा रही है. इसके तहत रांची के धुर्वा स्थित प्रभात तारा मैदान में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथा इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शुक्रवार (23 अगस्त, 2019) को CNG (संपीड़ित प्राकृतिक गैस) की आपूर्ति और सीएनजी से चलने वाले वाहनों का उद्घाटन करेंगे. केंद्रीय मंत्री ओरमांझी के मधुबन विहार और डोरंडा के खुकरी में सीएनजी स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे. साथ ही वह श्यामली कॉलोनी में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) की आपूर्ति की शुरुआत भी करेंगे.

 

गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) के कार्यकारी निदेशक (पूर्वी क्षेत्र) केबी सिंह ने गुरुवार को रांची के होटल बीएनआर चाणक्य में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी. उन्होंने बताया कि 75 हजार वाहनों को सीएनजी की आपूर्ति के लिए 11 स्टेशन स्थापित किये जायेंगे. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा के नाम से प्रसिद्ध जगदीशपुर-हल्दिया एवं बोकारो-धामरा प्राकृतिक गैस पाइपलाइन (जेएचबीडीपीएल) के जरिये प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की जायेगी. श्री सिंह ने बताया कि आगामी पांच वर्षों में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में सीएनजी की आपूर्ति शुरू हो जायेगी.

श्री सिंह ने बताया कि बोकारो से रांची के बीच 90 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है. इसमें 60 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है. बाकी काम भी जल्द पूरा कर लिया जायेगा. इसके बाद पाइपलाइन से सीएनजी की आपूर्ति शुरू कर दी जायेगी. जब तक काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक विशेष कंटेनर के जरिये बिहार की राजधानी पटना के रास्ते प्राकृतिक गैस सड़क मार्ग से रांची पहुंचायी जायेगी.  उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि मार्च, 2020 तक पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा हो जायेगा.

उन्होंने बताया कि जून, 2018 में इस परियोजना पर काम शुरू हुआ था. शुक्रवार को झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथा इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा इसका उद्घाटन करेंगे. श्री सिंह ने बताया कि ऑटो बनाने वाली तीन कंपनियों पिजाजिओ, बजाज और टीवीएस ने सीएनजी ऑटो की आपूर्ति की सहमति दी है. ऑटो रिक्शा चालकों और ऑटो के मालिकों को सीएनजी के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया जा रहा है. उनके बीच जागरूकता कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं.

झारखंड में बिछेगी 551 किमी पाइपलाइन, उद्योगों का होगा विकास

गेल के कार्यकारी निदेशक ने बताया कि पूर्वी भारत को देश के प्राकृतिक गैस ग्रिड से जोड़ने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को साकार करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा योजना के तहत गैस पाइपलाइन उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओड़िशा, पश्चिम बंगाल और असम से होकर गुजरेगी. इस परियोजना की 551 किलोमीटर पाइपलाइन झारखंड में बिछायी जायेगी. इससे पूर्वी भारत का औद्योगिक विकास होगा.

1.25 लाख वाहनों को CNG, 10.46 लाख घरों को PNG सप्लाई

गेल ने झारखंड में 1.25 लाख से अधिक वाहनों को सीएनजी और 10.46 लाख घरों में पीएनजी की आपूर्ति का लक्ष्य रखा है. इसके लिए रांची और जमशेदपुर में 22 सीएनजी स्टेशन बनाये जायेंगे. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए झारखंड में 4,366 करोड़ रुपये का निवेश किया जायेगा. राज्य में 551 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछायी जायेगी, जो एक दर्जन जिलों से होकर गुजरेगी. इसमें चतरा, गिरिडीह, हजारीबाग, बोकारो, रामगढ़, धनबाद, सरायकेला, रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा और पूर्वी सिंहभूम जिला शामिल हैं. उन्होंने बताया कि रांची और जमशेदपुर सीजीडी परियोजनाओं पर 1500 करोड़ रुपये का खर्च आयेगा. इसमें 450 करोड़ रुपये अगले तीन से पांच साल में खर्च किये जायेंगे.

कस्बों तक सीमित होगी पीएनजी की आपूर्ति

गेल के कार्यकारी निदेशक ने एक सवाल के जवाब में कहा कि गांवों में पाइपलाइन के जरिये गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करना महंगा सौदा होगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गांवों में लोगों को सिलिंडर दिये जा रहे हैं. पीएनजी सेवा की शुरुआत होने के बाद लोग एलपीजी सिलिंडर सरेंडर करेंगे, उससे गांवों में गैस की सप्लाई होगी. शहरों के सिलिंडर जब गांवों में पहुंच जायेंगे, तो गैस की किल्लत भी कम हो जायेगी.

प्राकृतिक गैस से होगा सिंदरी उर्वरक संयंत्र का पुनरोद्धार

केबी सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा परियोजना से पूर्वी भारत में उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा. इससे बिहार के बरौनी, झारखंड के सिंदरी और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित उर्वरक संयंत्रों के पुनरोद्धार में मदद मिलेगी. इतना ही नहीं, पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में नवनिर्मिक खाद कारखाना मेटिक्स को भी प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की जायेगी. इसकी वजह से खाद कारखानों की उत्पादन क्षमता 75 लाख टन बढ़ जायेगी. फलस्वरूप भारत का खाद आयात बिल घटेगा और उर्वरक की अपनी जरूरतें पूरी कर पायेगा.

वाहनों में तब्दीली पर आयेगा 25 से 40 हजार रुये तक खर्च

पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों को सीएनजी चालित वाहनों में तब्दील करने में 25 से 40 हजार रुपये तक खर्च आयेगा. श्री सिंह ने बताया कि पेट्रोल से चलने वाले वाहनों को सीएनजी मोड में लाने में 20-25 हजार रुपये ही खर्च होंगे, जबकि डीजल व्हिकल को बदलने में 40 हजार या इससे कुछ ज्यादा का खर्च आ सकता है. उन्होंने कहा कि वाहन मालिकों के लिए खर्च तो बढ़ जायेगा, लेकिन भविष्य में यह कीमत वसूल हो जायेगी. उन्होंने कहा कि फिलहाल सीएनजी की कीमत पेट्रोल-डीजल से ज्यादा नहीं होगी.

CNG-PNG के फायदे

गेल के कार्यकारी निदेशक (पूर्वी क्षेत्र) केबी सिंह ने सीएनजी और पीएनजी के फायदे भी बताये. उन्होंने कहा कि सीएनजी पर्यावरण के अनुकूल ईंधन है. सीएनजी में सल्फर या लेड जैसी चीजें नहीं होतीं, जो प्रदूषण का कारक होते हैं. यह हवा से हल्का है. इसलिए रिसाव होने की स्थिति में यह ऊपर उठता है. इतना ही नहीं, उच्च प्रज्ज्वलन तापमान की वजह से इसमें आग लगने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है. यह पारंपरिक ईंधन की तुलना में काफी किफायती भी है.

श्री सिंह ने बताया कि घरों में पाइपलाइन के जरिये गैस की आपूर्ति सस्ती पड़ेगी. गैस की वजह से घरों में आग लगने या विस्फोट की घटनाएं नहीं के बराबर होंगी. चूंकि गैस की आपूर्ति सीधे आपकी रसोई में होगी, सिलिंडर ढोने या इसके वजन की चिंता आपको नहीं रह जायेगी. मीटर के जरिये गैस की खपत की जानकारी आपको मिल जायेगी. उन्होंने यह भी कहा कि एलपीजी की तुलना में यह 10-15 फीसदी सस्ता होगा.

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