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dumka

  • Dec 16 2018 10:05AM
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कल्याण मंत्री डॉ लोइस मरांडी के आवास के सामने धरना पर बैठे पारा शिक्षक की मौत

कल्याण मंत्री डॉ लोइस मरांडी के आवास के सामने धरना पर बैठे पारा शिक्षक की मौत

 22 दिनों से चल रहा घेरा डालो डेरा डालो आंदोलन
दुमका :
उत्क्रमित मध्य विद्यालय चीनाडंगाल के पारा शिक्षक कंचन कुमार दास की मौत उस वक्त हो गयी, जब वे अपने कुछ साथियों के साथ बेमियादी धरना में शामिल थे. मंत्री आवास के सामने 22 दिनों से घेरा डालो डेरा डाला आंदोलन चल रहा है. कंचन बीती रात के करीब दस बजे के करीब दुमका के हथियापाथर स्थित आवास के सामने चल रहे धरना में शरीक हुए थे.

रात में वे वहीं सो गए थे, सुबह सात बजे के करीब सभी साथी उठ गए तो उसे सोया हुआ देखा और उसका पूरा शरीर अकड़ा हुआ था. धरना में बैठे पारा शिक्षकों ने 108 में कॉल कर एम्बुलेंस मंगवाया और आनन फानन में उसे लेकर सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां पहुंचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. कंचन का पूरा शरीर अकड़ा हुआ था और नाक से खून निकल रहा था.

अस्पताल के चिकित्सक डॉ दिलीप कुमार भगत ने बताया कि उक्त पारा शिक्षक को जब अस्पताल लाया गया, तो उसकी मौत हो चुकी थी. मौत की वजह का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही हो पायेगा. आंदोलन में कंचन के साथ रात में मंत्री आवास के सामने सोये युधिर मंडल ने बताया कि कंचन रात के करीब 10.00 बजे वहां पहुंचा था और थोड़ी देर बाद बात चीत करने के बाद कंबल ओढ़कर सो गया था.

जानकारी मिलने पर पहुंचे पिता अखिलेश दास
बेटे की मौत की जानकारी मिलने पर पिता अखिलेश दास सदर अस्पताल पहुंचे. उनका रो रोकर बुरा हाल था. उन्होंने बताया कि कंचन 2005 में पारा शिक्षक बना था. कंचन आंदोलन में शामिल साथियों के लिए घर से चावल लेकर आया था, ताकि आंदोलन जारी रह सके. चावल रखने के बाद वह चला गया था और फिर रात में लौटा था.

पारा शिक्षक की मौत के बाद मुआवजे और नौकरी की मांग
मंत्री डॉ लोईस मरांडी के आवास के बाहर धरना दे रहे पारा शिक्षक कंचन कुमार दास की मौत के बाद पारा शिक्षक संघ के द्वारा 25 लाख रुपये मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को नौकरी की मांग की गई है. एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के राज्य स्तरीय सदस्य मोहन मंडल का कहना है कि काफी दुखद घटना है और मृतक के परिवार वाले को अविलंब 25 लाख का मुआवजा मिलना चाहिए और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी हठधर्मिता छोड़ सकारात्मक पहल करनी चाहिए.

 
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